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अमेरिकी सांसदों का महज कुछ घटनाओं पर ध्यान देना दुर्भाग्यपूर्ण: भारत

अमेरिकी सांसदों का महज कुछ घटनाओं पर ध्यान देना दुर्भाग्यपूर्ण: भारत

भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा देश में धार्मिक स्वतंत्रता के विषय पर लिखे गए पत्र को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि उन्होंने ‘महज कुछ घटनाओं को ध्यान में रखकर’ ऐसा किया है।

भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा देश में धार्मिक स्वतंत्रता के विषय पर लिखे गए पत्र को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि उन्होंने ‘महज कुछ घटनाओं को ध्यान में रखकर’ ऐसा किया है।

भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा देश में धार्मिक स्वतंत्रता के विषय पर लिखे गए पत्र को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि उन्होंने ‘महज कुछ घटनाओं को ध्यान में रखकर’ ऐसा किया है।

    नई दिल्ली। भारत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा देश में धार्मिक स्वतंत्रता के विषय पर लिखे गए पत्र को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि उन्होंने ‘महज कुछ घटनाओं को ध्यान में रखकर’ ऐसा किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने साथ ही जोर दिया कि कुछ गलत होने पर आतंरिक प्रक्रियाओं द्वारा उनसे निपटा जाता है। इन प्रक्रियाओं में स्वतंत्र न्यायपालिका शामिल है।

    उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के इन सदस्यों ने लंबे समय से समावेश एवं सहिष्णुता को लेकर प्रतिबद्ध बहुलवादी समाज के तौर पर भारत की सराहना करने के साथ महज कुछ घटनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। स्वरूप ने कहा कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के अपने दर्जे पर गर्व है। भारतीय संविधान अल्पसंख्यक समुदायों सहित अपने नागरिकों के लिए संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करता है। कुछ गलत होने पर हमारी आंतरिक प्रक्रियाएं उनसे निपटती हैं, जिनमें स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वायत्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, सतर्क मीडिया और जीवंत नागरिक समाज शामिल हैं।

    गौरतलब है कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर गंभीर चिंता जताते हुए 34 शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके मूल अधिकारों का संरक्षण करने के लिए फौरन कदम उठाने और इसका हनन करने वाले को न्याय के दायरे में लाने को कहा।

    प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में इन सांसदों ने कहा है कि हम सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए फौरन कदम उठाने की मांग करते हैं कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के मूल अधिकारों का संरक्षण किया जाए और हिंसा करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए।

    प्रवक्ता ने यह भी कहा कि सरकार सांवैधानिक सिद्धांतों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है जो एक बहु जातीय एवं बहु धार्मिक समाज के तौर पर 1.25 अरब लोगों के देश की आधारशिला रखते हैं। 25 फरवरी को लिखे पत्र में कहा गया कि भारत के ईसाई, मुसलमान और सिख समुदायों से होने वाला बर्ताव विशेष चिंता की बात है। यह पत्र टॉम लंटोस मानवाधिकार आयोग ने प्रेस में जारी किया था।

    Tags: India

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