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चमोली त्रासदी : ग्रामीणों को शक- रेडियोएक्टिव डिवाइस हो सकती है बाढ़ का कारण

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. 150 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.
उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. 150 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

Chamoli Disaster: रविवार को जोशीमठ में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट गया जिससे अलकनंदा नदी एवं उससे जुड़ी अन्य नदियों में भीषण बाढ़ आ गई. आखिरी अपडेट तक 31 शव निकाले जा चुके हैं और 150 से ज्यादा लोग अभी भी लापता थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 9, 2021, 4:20 PM IST
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नई दिल्ली. चमोली (Chamoli) के तपोवन इलाके (Tapovan) में रविवार को आई बाढ़ का कारण रेडियोएक्टिव डिवाइस के चलते पैदा हुई गर्मी हो सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में तपोवन के रैणी गांव के लोगों ने ऐसी आशंका जाहिर की है. रैणी में बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. कंचनजंगा के बाद भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी नंदा देवी पर 1965 में पहाड़ की चोटी पर चीन पर नजर रखने के लिए सीआइए और आईबी द्वारा लगाए गए परमाणु-संचालित निगरानी उपकरण के लिए आयोजित एक गुप्त अभियान के दौरान डिवाइस खो गया था.

हालांकि, अभियान का संचालन करने वाली पर्वतारोहण टीम एक बर्फ़ीले तूफ़ान में फंस गई और उसे पर्वत के आधार पर उपकरण छोड़ कर वापस लौटना पड़ा. एक साल बाद, जब वे इस क्षेत्र में वापस गए, तो उन्हें ये डिवाइस नहीं मिल सकी. बाद के अभियानों में भी उपकरण का पता नहीं लगाया जा सका. इस डिवाइस की जीवन अवधि 100 साल से अधिक है और माना जाता है कि यह अभी भी क्षेत्र में कहीं है. नंदादेवी बायोस्फीयर में स्थित चमोली जिले के रैणी गांव के पास जिस दिन बाढ़ आई तो वहां रहने वाले ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने हवा में एक अत्यंत तीखी गंध महसूस की, क्योंकि पहाड़ से निकलने वाली धूल और मलबा लुढ़क कर नीचे आकर ऋषिगंगा नदी में गिर गया.

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विशेषज्ञ पता लगा रहे कारण
इससे पहले हिमस्खलन तथा बाढ़ के कारणों का पता लगा रहे विशेषज्ञों ने बताया था कि जलवायु परिवर्तन या पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फ पिघलने से उत्तराखंड के चमोली जिले में बाढ़ आई होगी. इस बाढ़ ने उत्तराखंड में 2013 की त्रासदी से पैदा जख्मों को फिर से हरा कर दिया जब पहाड़ों में भीषण बाढ़ आने से हजारों लोगों की मौत हो गई थी. रविवार को जोशीमठ में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट गया जिससे अलकनंदा नदी एवं उससे जुड़ी अन्य नदियों में भीषण बाढ़ आ गई. आखिरी अपडेट तक 31 शव निकाले जा चुके हैं और 150 से ज्यादा लोग अभी भी लापता थे.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का बर्फ एवं हिमस्खलन अध्ययन संस्थान बाढ़ के कारणों का पता लगा रहा है लेकिन ठंड के समय में ग्लेशियर के पिघलने का स्पष्ट कारण पता नहीं चल पा रहा है.

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के महानिदेशक रंजीत रथ ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि बाढ़ ग्लेशियर झील फटने के कारण आई या भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण अस्थायी तौर पर यह घटना घटी.
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