कोरोना को हराना है! अनलॉक के बावजूद अब भी लॉकडाउन सा जीवन जी रहे इस गांव के लोग

कोरोना को हराना है! अनलॉक के बावजूद अब भी लॉकडाउन सा जीवन जी रहे इस गांव के लोग
राजकोट के पास कोणकट गांव कोरोना महामारी को हराने में मिसाल बना हुआ है. (फोटो- TWITTER/ @kulinparekh से साभार)

गुजरात (Gujrat) का कणकोट गांव कोरोना (Corona) के खिलाफ लड़ाई में देश का सबसे सफल गांव बना हुआ है. गांव में अभी तक कोरोना का एक भी मरीज (patient) सामने नहीं आया है. इसके लिए गांव वालों की पहल रंग लाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2020, 11:20 AM IST
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राजकोट. कोरोना से बचने के लिए देश भर में लॉकडाउन लगाया गया, जिसका पालन कराने के लिए राज्य सरकारों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा. लेकिन देश में एक ऐसी जगह भी है, जहां अनलॉक होने के बावजूद लोग कोरोना को हराने के लिए अभी भी लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं.

राजकोट का कणकोट गांव देशवासियों के लिए एक मिसाल बना हुआ है. ग्रामीणों की सतर्कता और नियमों के पालन की वजह से अभी तक यहां कोरोना का एक भी मरीज सामने नहीं आया है. राजकोट शहर से सटे इस गांव में 1500 से ज्यादा लोग रहते हैं, लेकिन यहां किसी भी समय जाने पर सड़क और चौराहे वीरान ही मिलेंगे. दरअसल ग्रामीणों ने देशभर में अनलॉक लागू होने के बाद भी गांव में लॉकडाउन के नियमों का पालन करना जारी रखा है.

गांव में बाहर के लोगों के आने पर पूर्ण प्रतिबंध



कणकोट गांव के सरपंच शैलेषभाई नंदणिया बताते हैं कि गांववालों पर किसी तरह का कोई दवाब नहीं है, और न ही कोई नियम थोपा गया है. गांव के बुजुर्ग और समझदार लोगों ने ही निर्णय लिया है कि देशभर में भले अनलॉक हो जाए पर कोरोना को हराने के लिए गांव में लॉकडाउन के नियमों का पालन किया जाएगा.
गांववालों ने अपने रिश्तेदारों को भी आने से किया मना

तीज-त्यौहार के बीच रिश्तेदारों का एक-दूसरे के घर आना जाना नार्मल है, लेकिन कणकोट गांव के ग्रामीणों ने अपने सभी रिश्तेदारों को गांव में न आने की हिदायद दे रखी हैं.





जरूरी काम हो तभी दो-तीन लोग जाते है शहर

सरपंच नंदाणिया के अनुसार ग्रामीणों की जरूरत के सामान की पूर्ति के लिए समय-समय पर दो से तीन लोग शहर जाते हैं और सभी ग्रामीणों के जरूरत के सामन की खरीददारी करते हैं. इस दौरान शहर जाने वाले लोग सतर्कता और जरूरी नियमों का पूरा पालन करते हैं. दूसरी ओर गांव में यदि किसी का निधन भी हो जाए. तो केवल शमशान जाने के लिए 15 लोगों को ही अनुमति दी जाती है. यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जाता है.

गांव के स्कूल में सुरक्षा का पूरा इंतजाम

फिलहाल पूरे देश के साथ इस गांव में भी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है, लेकिन किसी बच्चे के पास स्मार्ट फोन नहीं है, तो गांव के स्कूल में समयानुसार मोबाइल की व्यवस्था कर दी जाती है.
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