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कोरोना को सांप्रदायिक रंग देने पर बोले सहस्त्रबुद्धे- विदेश नीति सोशल मीडिया से तय नहीं होती

कोरोना को सांप्रदायिक रंग देने पर बोले सहस्त्रबुद्धे- विदेश नीति सोशल मीडिया से तय नहीं होती

भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे (Vinay Sahasrabuddhe,) साफ कहते हैं कि भारत अपनी शर्तों पर निवेश चाहता है.

भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे (Vinay Sahasrabuddhe,) साफ कहते हैं कि भारत अपनी शर्तों पर निवेश चाहता है.

भारत को कोरोना वायरस (Coronavirus) के साथ-साथ सोशल मीडिया के उन दुष्प्रभावों से भी लड़ना पड़ रहा है, जो उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. हाल ही में 57 देशों के संगठन ओआईसी (OIC) ने कहा कि भारत में कोरोना से लड़ाई को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है.

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    नई दिल्ली. भारत इस समय कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से लड़ने के साथ-साथ निवेश की आगामी संभावनाओं पर भी नजर रखे हुए है. यही कारण है कि उसे सोशल मीडिया के उन दुष्प्रभावों से भी लड़ना पड़ रहा है, जो उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं. हाल ही में द ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भारत की इस बात के लिए आलोचना की थी कि यहां कोरोना से लड़ाई को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है. जी-7 (G7) के देशों व चीन (China) के बिगड़ते रिश्तों पर भी भारत की नजर है. हालांकि, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) के अध्यक्ष व भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे (Vinay Sahasrabuddhe,) साफ कहते हैं कि भारत अपनी शर्तों पर निवेश चाहता है. उनसे बातचीत के मुख्य अंश:

    चीन इस समय पोस्ट कोरोना वर्ल्ड का सामना कर रहा है, जहां कई देश उसके खिलाफ हो रहे हैं. भारत की चीन को लेकर भी इकोनॉमिक पॉलिसी बदल रही है. क्या यह भारत-चीन रिश्तों की नई शुरुआत है?  इस सवाल के जवाब में विनय सहस्त्रबुद्धे कहते हैं कि अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. दुनिया की चीन के प्रति बदले रुख पर बात करने की कोई जरूरत नहीं है. हर कोई इसे जानता है. चीन भी यह सब देख-समझ रहा है. देखते हैं आगे क्या होता है. एक बात साफ है कि हर देश इन्वेस्टमेंट के लिए नियम बनाते वक्त अपने हितों का ख्याल रखता है. भारत भी ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह अपनी शर्तों पर निवेश चाहता है. जहां तक भारत-चीन संबंधों की बात है तो अभी इस पर कोई पूर्वाग्रह बनाना ठीक नहीं है. इस पर जल्दबाजी में कुछ बदलने वाला नहीं है. भारत सरकार अपनी पॉलिसी संतुलित रखती है.

    हाल ही में जी-7 ने चीन के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है. बहुत लोगों को लगता है कि दुनिया में शुरू हुए चीन-विरोधी मूवमेंट का फायदा भारत को मिलेगा.? इस सवाल के जवाब में विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा, यह दुनिया प्रतिस्पर्धा की है. यहां हर देश के लिए बराबर मौके हैं. सिर्फ जी-7 ही क्यों, कई और देश भारत को निवेश के लिए बेहतर देश मान रहे हैं. चीन के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार और वाजपेयी सरकार की तुलना कैसे करेंगे. सहस्त्रबुद्धे इसके जवाब में कहते हैं कि भारत की विदेश नीति समय के मुताबिक बदलती रही है. मुझे लगता है कि जो वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में हुआ, पीएम मोदी उसी को आगे बढ़ा रहे हैं. हम चाहते हैं कि पड़ोस से हमारे संबंध अच्छे रहे हैं.

    जब से कोविड-19 (Covid-19) महामारी सामने आई है, तब से पीएम मोदी दुनिया के नेताओं से बात कर रहे हैं. इससे उनकी छवि को कितना फायदा हुआ है. देश में कोविड-19 से निपटने के लिए भारत सरकार कैसा काम कर रही है. मेडिकल इक्विपमेंट में कमी की बात भी सामने आ रही है? सहस्त्रबुद्धे ने जवाब दिया कि मोदी पहले से ही विश्व के नेताओं से बात करते रहे हैं. उनकी भरोसमंद नेता की छवि और मजबूत हुई है. जहां तक देश में मेडिकल इक्विपमेंट में कमी की बात है तो लगभग हर देश के साथ ऐसा देखने को मिल रहा है. मुझे लगता है कि भारत कोरोना से लड़ाई बहुत अच्छे तरीके से लड़ रहा है.

    निजामुद्दीन मरकज की घटना के बाद देश मे कोविड-19 को भी सांप्रदायिक रंग दिया गया? आप इस पर क्या कहेंगे, जबकि ओआईसी ने भी इसकी आलोचना की है? सहस्त्रबुद्धे ने इस पर कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, जिसे ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है. यह अब बीती बात है. हम लोकातांत्रिक देश हैं और सोशल मीडिया को नियंत्रित नहीं कर सकते. जहां तक ओआईसी से हमारे संबंधों की बात है तो यह बहुत पुराने और गहरे हैं. ये संबंध इतने मजबूत और भरोसेमंद हैं कि इन पर सोशल मीडिया के कुछ पोस्ट का असर नहीं होगा.

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    Tags: BJP, China, Coronavirus, Coronavirus pandemic, COVID 19, G7, ICCR, India, Lockdown, OIC, Vinay Sahasrabuddhe

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