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खेलो इंडिया, ब्रू-शरणार्थी और एग्जाम, पढ़ें मन की बात में PM मोदी क्‍या-क्‍या बोले

News18Hindi
Updated: January 26, 2020, 11:51 PM IST
खेलो इंडिया, ब्रू-शरणार्थी और एग्जाम, पढ़ें मन की बात में PM मोदी क्‍या-क्‍या बोले
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में कहा कि शांति हर सवाल के जवाब का आधार होना चाहिए

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) कार्यक्रम में कहा कि हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती. दुनिया की किसी भी समस्या का हल, कोई दूसरी समस्या पैदा करने से नहीं बल्कि अधिक-से-अधिक उसका समाधान ढूंढकर ही हो सकता है.

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  • Last Updated: January 26, 2020, 11:51 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गणतंत्र दिवस (Republic Day) पर 'मन की बात' (Mann Ki Baat) में कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है और शांति हर सवाल के जवाब का आधार होना चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की कि एकजुटता से हर समस्या के समाधान का प्रयास हो और भाईचारे के जरिये हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करें.

आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम इक्कीसवीं सदी में हैं, जो ज्ञान-विज्ञान और लोक-तंत्र का युग है. क्या आपने किसी ऐसी जगह के बारे में सुना है जहां हिंसा से जीवन बेहतर हुआ हो?’’

उन्होंने पूछा, ‘‘ क्या आपने ऐसी किसी जगह के बारे में सुना है, जहां शांति और सद्भाव जीवन के लिए मुसीबत बने हों?’’

समस्या का हल समाधान ढूंढने में

पीएम मोदी ने कहा कि हिंसा, किसी समस्या का समाधान नहीं करती. दुनिया की किसी भी समस्या का हल, कोई दूसरी समस्या पैदा करने से नहीं बल्कि अधिक-से-अधिक उसका समाधान ढूंढकर ही हो सकता है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आइये, हम सब मिल कर,एक ऐसे नए भारत के निर्माण में जुट जाएं, जहां शांति हर सवाल के जवाब का आधार हो. एकजुटता से हर समस्या के समाधान के प्रयास हो और, भाईचारा, हर विभाजन और बंटवारे की कोशिश को नाकाम करे.’’

नये साल में पहला 'मन की बात' कार्यक्रमगणतंत्र दिवस समारोह की वजह से इस रविवार प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो कार्यक्रम के समय में बदलाव किया गया. सुबह 11 बजे की बजाय आज के लिए शाम 6 बजे का वक्त तय किया गया था. यह प्रधानमंत्री मोदी का नये साल में पहला 'मन की बात' कार्यक्रम है.

पूर्वोत्तर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपने भी समाचार में देखा होगा कि अभी कुछ दिनों पहले असम में, आठ अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप के 644 लोगों ने अपने हथियारों के साथ आत्म-समर्पण किया . जो पहले हिंसा के रास्ते पर चले गए थे उन्होंने अपना विश्वास, शान्ति में जताया और देश के विकास में भागीदार बनने का निर्णय लिया है, मुख्य-धारा में वापस आए हैं.

विवाद को सुलझाने का एकमात्र रास्ता शांति
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष, त्रिपुरा में भी 80 से अधिक लोग, हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्य-धारा में लौट आए हैं जिन्होंने यह सोचकर हथियार उठा लिए थे कि हिंसा से समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है, उनका यह विश्वास दृढ़ हुआ है कि शांति और एकजुटता ही, किसी भी विवाद को सुलझाने का एक-मात्र रास्ता है.

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में अलगाववाद काफी कम हुआ है और इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इस क्षेत्र से जुड़े हर एक मुद्दे को शांति के साथ, ईमानदारी से, चर्चा करके सुलझाया जा रहा है .

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश के किसी भी कोने में अब भी हिंसा और हथियार के बल पर समस्याओं का समाधान खोज रहे लोगों से आज, इस गणतंत्र-दिवस के पवित्र अवसर पर अपील करता हूं कि वे वापस लौट आएं. मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में, अपनी और इस देश की क्षमताओं पर भरोसा रखें .’’

PM Modi

पीएम ने किया ब्रू-रियांग शरणार्थियों का जिक्र
ब्रू-रियांग शरणार्थियों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दिल्ली में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किये गए. इसके साथ ही, लगभग 25 वर्ष पुरानी ब्रू-रियांग शरणार्थी समस्या के एक दर्दनाक अध्याय का अंत हुआ.

उन्होंने कहा कि यह समस्या 90 के दशक की है . 1997 में जातीय तनाव के कारण ब्रू रियांग जनजाति के लोगों को मिज़ोरम से निकल करके त्रिपुरा में शरण लेनी पड़ी थी . इन शरणार्थियों को उत्तर त्रिपुरा के कंचनपुर स्थित अस्थाई कैम्पों में रखा गया . यह बहुत पीड़ा दायक है कि ब्रू रियांग समुदाय के लोगों ने शरणार्थी के रूप में अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खो दिया था. 23 साल तक - न घर, न ज़मीन, न परिवार के लिए , बीमारी के लिए इलाज़ का प्रबंध और ना बच्चों के शिक्षा की सुविधा.

किसी सरकार ने नहीं की इन शरणार्थियों की मदद
पीएम मोदी ने कहा कि सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन इनकी पीड़ा का हल नहीं निकल पाया. लेकिन इतने कष्ट के बावज़ूद भारतीय संविधान और संस्कृति के प्रति उनका विश्वास अडिग बना रहा.

उन्होंने कहा कि और इसी विश्वास का नतीज़ा है कि उनके जीवन में आज एक नया सवेरा आया है. समझौते के तहत, करीब 34000 ब्रू-शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा. इतना ही नहीं, उनके पुनर्वास और सर्वांगीण-विकास के लिए केंद्र सरकार लगभग 600 करोड़ रूपए की मदद भी करेगी. प्रत्येक विस्थापित परिवार को घर बनाने में उनकी मदद की जाएगी . इसके साथ ही, उनके राशन का प्रबंध भी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये समझौता कई वजहों से बहुत ख़ास है. ये सहकारी संघवाद की भावना को दर्शाता है.

PM मोदी ने की 'खेलो इंडिया' की तारीफ, कहा- गरीब बच्चों को मिला मौका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 71वें गणतंत्र दिवस के मौके पर 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्‍यम से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि असम की राजधानी में हुए तीसरे खेलो इंडिया में देश भर के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. इस 13 दिवसीय प्रतियोगिता के दौरान महाराष्ट्र ने 78 स्वर्ण, 77 रजत और 101 कांस्य पदक के साथ अपनी लगातार दूसरी खेलो इंडिया युवा खेल ट्राफी जीती. हरियाणा 200 पदक (68 स्वर्ण, 60 रजत और 72 कांस्य पदक) के साथ दूसरे जबकि दिल्ली 122 पदक (39 स्वर्ण, 36 रजत और 47 कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

प्रधानमंत्री मोदी ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का ऐलान किया


खेलो इंडिया में टूटे कई रिकॉर्ड
पीएम मोदी ने कहा, 'मैं असम की सरकार और असम के लोगों को खेलो इंडिया की शानदार मेजबानी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. इस महोत्सव के अंदर 80 रिकॉर्ड टूटे जिसमें से 56 रिकॉर्ड तोड़ने का काम हमारी बेटियों ने किया है. जब यह शुरू हुआ था तब उसमें 3500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था वहीं अब इसकी संख्या बढ़कर छह हजार हो गई है. इसमें कई ऐसे बच्चे हैं जो अभाव और गरीबी के बीच पले-बढ़े हैं.'

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 71वें गणतंत्र दिवस के मौके पर 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्‍यम से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि असम की राजधानी में हुए तीसरे खेलो इंडिया में देश भर के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. इस 13 दिवसीय प्रतियोगिता के दौरान महाराष्ट्र ने 78 स्वर्ण, 77 रजत और 101 कांस्य पदक के साथ अपनी लगातार दूसरी खेलो इंडिया युवा खेल ट्राफी जीती. हरियाणा 200 पदक (68 स्वर्ण, 60 रजत और 72 कांस्य पदक) के साथ दूसरे जबकि दिल्ली 122 पदक (39 स्वर्ण, 36 रजत और 47 कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा.

खेलो इंडिया में टूटे कई रिकॉर्ड
पीएम मोदी ने कहा, 'मैं असम की सरकार और असम के लोगों को खेलो इंडिया की शानदार मेजबानी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. इस महोत्सव के अंदर 80 रिकॉर्ड टूटे जिसमें से 56 रिकॉर्ड तोड़ने का काम हमारी बेटियों ने किया है. जब यह शुरू हुआ था तब उसमें 3500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था वहीं अब इसकी संख्या बढ़कर छह हजार हो गई है. इसमें कई ऐसे बच्चे हैं जो अभाव और गरीबी के बीच पले-बढ़े हैं.'

आत्‍मविश्‍वास से भरा हुआ है युवा
गणतंत्र दिवस की संध्या पर मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों के साथ 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के अनुभव के बाद मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि देश का युवा आत्म विश्वास से भरा हुआ है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोर्ड परीक्षा देने जा रहे स्टूडेंट्स को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ाई के साथ ही फिजिकल एक्टिविटी के बारे में छात्रों को जागरूक करना चाहिए. पीएम ने कहा, 'मैं चाहता हूं कि देश का हर एक स्टूडेंट पढ़ाई के साथ-साथ फिजिकल एक्टिविटी में हिस्सा ले और वह शारीरिक रूप से फिट रहे.'



पीएम मोदी ने कहा कि देश के सभी स्कूलों से मेरा आग्रह है कि वे फिजिकल एक्टिविटी और खेलों को पढ़ाई के साथ जोड़कर 'फिट स्कूल' बनें. पीएम ने सभी देशवाशियों से अपील की कि अपनी दिनचर्चा में फिजिकल एक्टिविटी को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दें. पीएम मोदी ने कहा कि लोगों को रोज अपने आप को यह याद दिलाना चाहिए कि हम फिट तो इंडिया फिट.

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First published: January 26, 2020, 5:47 PM IST
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