रेलवे के बेकार हो चुके सामान से बनेगा देश का पहला 'रेलवे आपदा प्रबंधन गांव' 

भाषा
Updated: August 13, 2017, 11:53 PM IST
रेलवे के बेकार हो चुके सामान से बनेगा देश का पहला 'रेलवे आपदा प्रबंधन गांव' 
कार हो चुके सामान से बनेगा  'रेलवे आपदा प्रबंधन गांव'  (Source: GettyImages)
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Updated: August 13, 2017, 11:53 PM IST
रेलवे के बेकार हो चुके सामान का इस्तेमाल करके रेल विभाग हादसों का नाटकीय रूपांतरण तैयार करेगा ताकि बचाव अभियान की कोशिशों में सुधार किया जा सकें. इसके लिए 'रेलवे आपदा प्रबंधन गांव' बनाया जा रहा है. बेंगलुरू के बाहरी क्षेत्र में अगले साल दिसंबर तक इस गांव के स्थापित होने की उम्मीद है.

रेलवे अधिकाि‍रियों ने बताया है कि 'यह सुरक्षा कर्मियों द्वारा की जाने वाली मॉक ड्रिल की तरह होगा. यह ज्यादा से ज्यादा वास्तविक बनाया जाएगा.' इस योजना के ब्लूप्रिंट के अनुसार, रेलवे ने 3,483 लोगों की आबादी वाले कर्नाटक के 3.32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हेज्जाला गांव की पहचान की गई है. जहां वह आपदा प्रबंधन संस्थान और सुरक्षा गांव का निर्माण करेगा. इस योजना में 44.42 करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है.

इसमें कहा गया है, 'सैद्धांतिक कक्षाओं के साथ व्यावहारिक तौर पर प्रशिक्षण के लिए विभिन्न परिस्थितियों और रेल हादसों के वास्तविक दृश्यों में प्रशिक्षण देने के लिए सुरक्षा गांव की अवधारणा की परिकल्पना की गई.'

ब्लूप्रिंट में कहा गया है कि बोगियों, पहियों और इंजन जैसे बेकार हो चुके पुराने साजो सामान को विभिन्न औजारों तथा उपकरणों के साथ सुरक्षा गांव तैनात किया जाएगा ताकि व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा सकें.

बेंगलुरू से करीब 25 किलोमीटर दूर गांव में रेल दुर्घटनाओं का विश्लेषण करने के लिए वर्चुअल रिएलिटी सेन्टर भी होगा.


इसमें कहा गया है, 'इस केंद्र का मकसद विविध वातावरण और क्षेत्र में विभिन्न आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षण मुहैया कराना है.' गांव में निर्माण कार्य शुरू हो गया है और अगले साल दिसंबर तक काम पूरा हो जाएगा.
First published: August 13, 2017
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