हिंदू मंदिरों को सरकारी कब्जे से मुक्त कराने का एजेंडा हाथ में लेगा विश्व हिंदू परिषद, प्रस्ताव पास

विहिप के मुताबिक आजादी के पहले अंग्रेजों ने मंदिरों को अपने नियंत्रण में लेने की परंपरा शुरू की.

विहिप के मुताबिक आजादी के पहले अंग्रेजों ने मंदिरों को अपने नियंत्रण में लेने की परंपरा शुरू की.

VHP: विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि पिछले डेढ़ हजार वर्षों से आक्रमण के कालखण्ड में हमारे मंदिर हिन्दू समाज तथा धर्म-संस्कृति व प्रेरणा के, शक्ति और धर्मधारणा के महत्वपूर्ण केन्द्र होने से निरंतर ही आक्रमण और विध्वंस के लक्ष्य रहे हैं.

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नई दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल बैठक (उपवेशन) में मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करवाने का प्रस्ताव पास हुआ. विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि इस प्राचीन देश में हिन्दू धर्म की रक्षा में और यहां के चिरंतन ऐसे अध्यात्म ज्ञान के प्रसार में मंदिरों की एक अहम भूमिका रही है. मंदिर अनादिकाल से समाज जागरण और अध्यात्म ज्ञान प्रसार के, उपासना के तथा राष्ट्र जागरण के और सामाजिक परिवर्तन के शक्ति केन्द्र रहे हैं.

आज भी ऐसे अनेक मंदिरों में करोड़ों भक्त श्रद्धा से दर्शन के लिये जाते हैं और श्रेष्ठ अनुभूतियों का अनुभव करते हैं. विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि पिछले डेढ़ हजार वर्षों से आक्रमण के कालखण्ड में हमारे मंदिर हिन्दू समाज तथा धर्म-संस्कृति व प्रेरणा के, शक्ति और धर्मधारणा के महत्वपूर्ण केन्द्र होने से निरंतर ही आक्रमण और विध्वंस के लक्ष्य रहे हैं. बाद में ब्रिटिशों के कालखण्ड से उस समय के राज्यकर्ताओं ने मंदिरों के लिए विविध कानून लाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करना प्रारंभ कर दिया.

दुर्भाग्य से भारत स्वतंत्र होने के बाद भी यह कब्जे की गलत परंपरा मंदिरों के अधिग्रहण के रूप में विविध राज्य सरकारों द्वारा अनवरत अभी भी चल रही है. विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल के सभी धर्माचार्यों, संतों का यह सुविचारित मत है कि हिन्दू मंदिरों के ऊपर केवल हिन्दू समाज का ही स्वामित्व रहना चाहिए. इसलिए अब भारत के संविधान में आवश्यक वह परिवर्तन करते हुए मंदिरों के प्रबंधन में, उनकी सम्पत्ति में, विविध धार्मिक व्यवस्थाओं में सरकारों का किसी भी प्रकार से स्वामित्व या सहभागिता नहीं होनी चाहिए और ऐसे योग्य कानून बनाने की अपेक्षा विश्व हिन्दू परिषद का केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल करता है.

पूजा पद्धाति शास्त्रों का किया जिक्र
साथ ही धार्मिक आस्था के अनुसार चलने वाली प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही मंदिरों की पूजा पद्धति शास्त्रों के अनुसार हिन्दू समाज के पूज्य धर्माचार्यों, विद्वानों, भक्तों के मार्गदर्शन में अबाधित रूप से चलनी चाहिए. मंदिरों का संचालन, प्रबंधन, वहां की उपासना, पूजा पद्धति मंदिरों का स्वामित्व यह किसी भी सरकार के, सरकारी अधिकारियों के या न्यायालयों का विषय नहीं हो सकता है.

इसीलिए जो लाखों-लाखों मंदिर आज सरकारी नियंत्रण में हैं उनको मुक्त करने की मांग मार्गदर्शक मण्डल करते हुए उसके सुयोग्य संचालन और प्रबंधन के लिए और उसकी संपत्ति के संरक्षण करने के लिऐ एक योग्य व्यवस्था हिन्दू समाज में आज निर्माण करने की आवश्यकता है.





मंदिरों को समाजाभिमुख बनाते हुए धर्म-संस्कृति-समाज के शक्ति - केन्द्र के रूप में पुनः खड़ा करना आज समय की मांग है.

मंदिरों का सरकारी नियंत्रण समाप्त करके हिन्दू समाज के ही नियंत्रण और मार्गदर्शन में सभी मंदिरों का योग्य प्रबंधन करने के लिये हिन्दू समाज का व्यापक जागरण और प्रबोधन करने की भी आज आवश्यकता है. इस आवश्यकता को पूर्ण करने के लिये विश्व हिन्दू परिषद का यह केन्द्रीय मार्गदर्शक मण्डल अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त करता है. विश्व हिंदू परिषद के इस प्रस्ताव के प्रस्तावक प्रस्तावक अखिलेश्वरानंद जी महाराज   थे और इसके अनुमोदक स्वामी डाॅ0 श्यामदेवाचार्य जी महाराज बने.
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