विटामिन डी: हमें इसके बारे में बात करने की ज़रूरत क्यों है

केवल कुछ ही खाद्य पदार्थ ऐसे है जिनसे विटामिन डी की सही मात्रा शरीर को मिल पाती है
केवल कुछ ही खाद्य पदार्थ ऐसे है जिनसे विटामिन डी की सही मात्रा शरीर को मिल पाती है

दुनिया भर में लगभग 50% लोग, विटामिन डी (vitamin D) की कमी से जूझ रहे हैं. वहीं बात अगर सिर्फ़ भारत (India) की करें, तो हाल के आंकड़ों से पता चला कि 76% भारतीयों (76% Indians) में विटामिन डी की कमी है. आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 18 से 30 साल की उम्र के भारतीयों में विटामिन डी की कमी का स्तर सबसे ज़्यादा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 3:20 PM IST
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लोग अब धीरे-धीरे विटामिन डी की कमी और इसकी ज़रूरत को लेकर जागरूक हो रहे हैं. अब समझ पा रहे हैं कि हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए ये कितना ज़रूरी है. बदलते वक्त के कारण हम सभी की शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है और ऐसे में हमें सेहतमंद बनाए रखने में विटामिन डी की भूमिका को पहचान मिली है. इसलिए मेरा मानना है कि यह सही समय है विटामिन डी की कमी से होने वाली कई तरह की परेशानियों और बीमारियों पर बात करने का. एक डॉक्टर होने के नाते अब तक मैंने, मरीज़ों में कई तरह के लक्षण देखें हैं, जो अक्सर हड्डियों/मांसपेशियों में दर्द और थकान के तौर पर नज़र आते हैं.

इन सभी लक्षणों की एक मुख्य वजह है- शरीर में विटामिन डी की कमी. इसलिए शरीर में विटामिन डी की ज़रूरी मात्रा और इसकी कमी के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत ज़रूरी है. मेरा मानना है कि यह स्वास्थ्य से जुड़ी हमारी आज के दौर की कई और समस्याओं पर बात करने का भी सही समय है. हमारे काम करने की आदतों और तरीकों में पिछले कुछ समय में काफ़ी बदलाव आया है, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं.

मैंने पिछले कुछ महीनों में लोगों की शारीरिक गतिविधियों के कम होने के कारण मरीज़ों में खराब होती सेहत के कई लक्षण देखें हैं, जैसे हड्डियों/मांसपेशियों में दर्द और थकान. इनका एक प्रमुख कारण है विटामिन डी की कमी. इसलिए हमें विटामिन डी की ज़रूरत और इसकी कमी के लक्षणों को पहचानना ज़रूरी है.



दुनिया भर में लगभग 50% लोग, विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं. वहीं बात अगर सिर्फ़ भारत की करें, तो हाल के आंकड़ों से पता चला कि 76% भारतीयों में विटामिन डी की कमी है. आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 18 से 30 साल की उम्र के भारतीयों में विटामिन डी की कमी का स्तर सबसे ज़्यादा है.
बोन मास की कमी और मांसपेशियों की कमजोरी भी विटामिन डी की कमी से जुड़ी हुई है. इनके कारण हड्डियों के फ्रैक्चर होने से लेकर हड्डियों से जुड़े विकार जैसे अस्थि भंग और अस्थि विकार जैसे ऑस्टियोमलेशिया (हड्डियों का नरम होना), ऑस्टियोपीनिया (अस्थि अल्पता ) और ऑस्टियोपोरोसिस (अस्थि-सुषिरता) का खतरा बढ़ जाता है.

हाल के दिनों में हो रहे शोधों से पता चलता है कि, दिल की बीमारी, टाइप -2 मधुमेह, फ्रैक्चर और हड्डियों का टूटना, अवसाद, कैंसर जैसी रोगों के साथ ही, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में विटामिन डी की भूमिका महत्वपूर्ण है. लेकिन, इन सबके साथ इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि विटामिन डी जैसे अहम पोषक तत्वों की कमी कैसे हमारी सेहत को प्रभावित कर सकती है. इसलिए मैं सलाह देता हूं कि, अपनी सेहत का ध्यान रखें ताकि इस तरह की बीमारियों से बचा जा सके.

सुबह के 10 से दोपहर 3 के बीच दिन में दो बार 10-15 मिनट की धूप, विटामिन डी की रोज़ाना की ज़रूरत को पूरा करने के लिए काफ़ी है.


विटामिन डी के स्रोत 

वयस्कों के लिए 30 एनजी / एमएल विटामिन डी की मात्रा शरीर में इसके सही स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है. विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत धूप, जो त्वचा में विटामिन डी के संश्लेषण में मदद करता है. केवल कुछ ही खाद्य पदार्थ ऐसे है जिनसे विटामिन डी की सही मात्रा शरीर को मिल पाती है; ज्यादातर मछलियां जैसे सालमन और टूना, मछली के लिवर का तेल, पनीर और अंडे की जर्दी इसके अच्छे स्रोत हैं. बच्चों के लिए विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत हैं-अंडे. इसके साथ ही सुबह के 10 से दोपहर 3 के बीच दिन में दो बार 10-15 मिनट की धूप, विटामिन डी की रोज़ाना की ज़रूरत को पूरा करने के लिए काफ़ी है. मैं अधिकांश मरीज़ों को यही सलाह देता हूं कि, वो अपने हिसाब से तय करें कि उनके लिए इनमें से क्या आसानी से उपलब्ध है और उस हिसाब से अपनी विटामिन डी की दैनिक खुराक लें. यदि फिर भी कमी रह जाती है, तो फिर सप्लीमेंट ले सकते हैं.

क्या विटामिन डी की कमी का कारण क्या है?
आमतौर पर जो लोग धूप में पर्याप्त समय नहीं बिताते हैं, वे विटामिन डी की कमी का शिकार हो सकते हैं. या इसके अलावा भी कई कारण हो सकते हैं, जैसे धूप का बहुत धीमा होना या धूप में निकलने पर 30 से अधिक एसपीएफ़ वाली सनस्क्रीन का उपयोग. आपके शरीर को विटामिन डी की जितनी ज़रूरत है उसका शरीर में बन पाना, आपकी त्वचा के रंग पर भी निर्भर करता है. मोटापा भी विटामिन डी की कमी से जुड़ा हुआ है. आमतौर पर मोटापे से जूझ रहे लोगों में आहार से मिलने वाले विटामिन डी का कम अवशोषण और वसा का अपावशोषण, जिसमें छोटी आंत पोषक तत्वों को अवशोषित करने में असमर्थ होती है, जो विटामिन डी से जुड़ा है. इसके बात एक और महत्वपूर्ण कारण है उम्र, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ धीरे-धीरे विटामिन डी को सिंथेसाइज़ करने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है.

हमें डॉक्टर से पूछकर ही सप्लीमेंट लेने चाहिए….
डॉक्टरों के सुझाव के हिसाब से कई तरह के सप्लीमेंट भारतीय बाज़ार में उपलब्ध हैं. ग्रैन्यूल्स / टैब्स / कैप्स जैसे सप्लीमेंट को फैट प्रोडक्ट के साथ लेने की सलाह दी जाती है, ताकि ये शरीर में अच्छे से अवशोषित (अब्ज़ॉर्ब) हो सकें. इनके आलावा नैनो लिक्विड फॉर्मूलेशन भी हैं जिन्हें सीधे ही कंज़्यूम किया जा सकता है. विटामिन डी के नैनोपार्टिकल फॉर्मूलेशन वाले लिक्विड पर हुए अध्य्यन ये बताते हैं इसके सेवन और अपनी लाइफ़ स्टाइल में थोड़े बदलाव लाकर काफ़ी बेहतर परिणाम देखे जा सकते हैं.

डॉक्टर, स्वास्थ्य अधिकारी इन समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठा रहे हैं और अलग-अलग रोगी प्रोफाइल जैसे शिशुओं से लेकर बड़ों तक विटामिन डी की कमी के बारे में अधिक जागरूकता पैदा कर रहे हैं.

विटामिन डी की कमी से होने वाली समस्याओं के बारे में, लोगों में और जागरुकता लाने के लिए अब डॉक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी भी अपनी तरफ़ से लिए कदम उठा रहे हैं. इसलिए अब वे भी मरीज़ों के हिसाब से अलग-अलग प्रोफाइल बना रहे हैं और शिशुओं से लेकर बड़ों तक सभी की सेहत में इसकी क्या अहमियत है, इसके बारे में जागरुकता ला रहे हैं.

विटामिन डी, इसकी कमी के लक्षण, और इसे कैसे ठीक किया जाए, इसके बारे में अधिक जानकारी पाएं और Abbott के D Strong, Active Life कैंपेन के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें.

डिस्क्लेमर: पार्टनर्ड कॉन्टेंट

** यह लेख Abbott India की भागीदारी के साथ Dr. Abhyudaya Verma. M.D (General Medicine), DNB Endocrinology Consultant Endocrinologist at SEWA clinic, Indore ने लिखा है.

डॉ. अभ्युदय वर्मा


इस लेख में दी गई जानकारी केवल लोगों को जागरुक करने के लिए है, किसी भी तरह की चिकित्सकीय सलाह नहीं देती. इसे जुड़े किसी भी सवाल या जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें .

References:

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2. Aparna P et al. Vitamin D deficiency in India. Family Med Prim Care. 2018 Mar-Apr; 7(2): 324–330.
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8. 8. Bothiraja C, Pawar A & Deshpande G. Ex vivo absorption study of a nanoparticle based novel drug delivery system of vitamin D3(Arachitol Nano™) using everted intestinal sac technique. J Pharma Investing. 2016;46(5):425-432.
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