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Vizag Gas Leak : पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बिना एलजी पॉलिमर में हो रहा था काम, अब देना होगा जवाब

Vizag Gas Leak : पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के बिना एलजी पॉलिमर में हो रहा था काम, अब देना होगा जवाब

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गुरुवार तड़के हुए गैस लीक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई.

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गुरुवार तड़के हुए गैस लीक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई.

Vizag Gas Leak: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने News18 को बताया कि एलजी पॉलिमर प्राइवेट लिमिटेड ने नियमों के उल्लंघन (violations) कैटेगरी के तहत ईसी के लिए अप्लाई किया था. यह एक स्पेशल कैटेगरी है, जिसे मंत्रालय ने 2017 में विभिन्न क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वन-टाइम एमनेस्टी के हिस्से के रूप में स्थापित किया था.

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    नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित एलजी पॉलिमर प्राइवेट लिमिटेड की यूनिट में गैस लीक (Vizag Gas Leak) से 11 लोगों की मौत और 5000 लोगों के बीमार होने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 50 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि जमा करने का निर्देश दिया है. News 18 को मिले कंपनी के अहम दस्तावेज के मुताबिक, एलजी पॉलिमर महज राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी के आधार पर 2004 से 2018 तक काम करती रही. इस दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी नहीं ली गई.

    एलजी पॉलिमर प्राइवेट लिमिटेड ने ऐसा करने के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) की अधिसूचना, 1994 और 2006 को भी दरकिनार कर दिया, जिसमें कहा गया है कि मौजूदा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की जरूरत है.

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने News18 को बताया कि कंपनी ने नियमों के उल्लंघन (violations) कैटेगरी के तहत ईसी के लिए अप्लाई किया था. यह एक स्पेशल कैटेगरी है, जिसे मंत्रालय ने 2017 में विभिन्न क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए वन-टाइम एमनेस्टी के हिस्से के रूप में स्थापित किया था. ये व्यवस्था खास तौर पर उनके लिए थी, जिन्होंने काम शुरू करने से पहले पर्यावरण मंजूरी नहीं ली थी.

    इस बारे में जब News18 ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संपर्क किया, तो उन्होंने हमारे कॉल का कोई जवाब नहीं दिया. वहीं, इस संबंध में पर्यावरण मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'मार्च में लॉकडाउन से ठीक पहले फाइल हमारे पास आई थी. हमें पहले परियोजना के इतिहास का मूल्यांकन करना होगा. यहां तक कि अगर कोई उद्योग ईआईए अधिसूचना से पहले स्थापित किया गया था, तो जिस समय यह आधुनिकीकरण के विस्तार की योजना बना रहा है, उसे नए सिरे से मंजूरी प्राप्त करनी होगी.'

    दिक्कत ये है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ईआईए अधिसूचना, 2020 के संशोधित मसौदे में परियोजनाओं के लिए पोस्ट-फैक्टो की मंजूरी पर जोर दे रहा है और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा इसका विरोध किया गया है. मंत्रालय ऐसा इसलिए भी कर रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने फ़ैसलों में कुछ स्पष्ट नहीं किया है.

    उधर, एनजीटी की जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने इस घटना की जांच करने के लिए जस्टिस बी शेषासन रेड्डी की एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. इन्हें 18 मई से पहले एक रिपोर्ट पेश करनी है.

    बता दें कि आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में गुरुवार तड़के हुए गैस लीक हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई. हादसे में 5 गांव प्रभावित हुए हैं. हादसे का कारण पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिये हैं. इसके अलावा मृतकों के परिवार वालों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है.

    (अंग्रेजी में इस आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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