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शशिकला की रिहाई से राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा: अलागिरी

आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला को चार साल की जेल हुई थी.(फाइल फोटो)
आय से अधिक संपत्ति मामले में शशिकला को चार साल की जेल हुई थी.(फाइल फोटो)

पूर्व मुख्‍यमंत्री जयललिता की सहयोगी वी के शशिकला की 27 जनवरी को जेल रिहाई तय हो गई है. तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के. एस. अलागिरी ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में इस रिहाई से शायद ही कोई प्रभाव हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 9:23 PM IST
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कोयंबटूर . तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के. एस. अलागिरी ने गुरुवार को कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की नजदीकी सहयोगी रहीं शशिकला की जेल से रिहाई का राज्य की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने खबरों का हवाला देते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा, सत्ताधारी अन्नाद्रमुक पर शशिकला को पार्टी में लेने के लिए दबाव बना रही है.

अलागिरी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि शशिकला की 27 जनवरी को होने वाली रिहाई से तमिलनाडु की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. आय के ज्ञात स्रोत से 66 करोड़ रुपये ज्यादा की संपत्ति के मामले में फरवरी 2017 में चार साल कैद की सजा पाने वाली शशिकला को बेंगलुरु की पराप्पना अग्रहारा जेल में रखा गया है.





गठबंधन की सीटों पर फैसला स्‍टालिन करेंगे
द्रमुक की युवा इकाई के सचिव उदयनिधि स्टालिन ने बयान दिया था कि वह सीटें गठबंधन के दलों को नहीं दी जानी चाहिए जिन पर जीत सुनिश्चित है. इस बयान पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अलागिरी ने कहा कि इस पर निर्णय द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन लेंगे. उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे का मामला बातचीत से सुलझाया जाएगा. उन्होंने कहा कि तीसरे मोर्चे की परिकल्पना राज्य के हित में नहीं है और कांग्रेस इसके पक्ष में नहीं है.

कौन हैं शशिकला और क्‍यों गईं थीं जेल
शशिकला, राज्‍य की लोकप्रिय नेता और पूर्व सीएम जयललिता की सबसे करीबी शख्स थीं. वे जयललिता के राजनीति में आने के पहले से उनकी खास दोस्‍त थीं. उन्‍होंने जयललिता का तब भी साथ दिया था, जब 1987 में एमजी रामचंद्रन के अंतिम संस्कार के दौरान अपमानित किया गया था. वे कुछ अवसरों को छोड़ दें तो हमेशा ही जयललिता के साथ रहीं. शशिकला के भतीजे सुधाकरण को जयललिता ने अपना दत्‍तक पुत्र बनाया था. शशिकला को ज्ञात स्रोत से अधिक आय और संपत्ति के मामले में चार साल की सजा सुनाई गई थी. स्‍पेशल कोर्ट के इस फैसले पर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उन्‍हें रिहा कर दिया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था.
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