अगर ऐसा हुआ तो ईवीएम नहीं वीवीपैट की गिनती को माना जाएगा आखिरी

गिनती के समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लोकसभा क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्र में पांच ईवीएम और इनसे संबंधित वीवीपैट में दर्ज वोटों का मिलान किया जाएगा.

News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 8:05 AM IST
अगर ऐसा हुआ तो ईवीएम नहीं वीवीपैट की गिनती को माना जाएगा आखिरी
प्रतीकात्मक तस्वीर
News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 8:05 AM IST
लोकसभा चुनाव के छह चरण के मतदान हो चुके हैं. 19 मई के सातवें और आखिरी चरण के मतदान होने हैं. 23 मई को चुनाव के नतीजे आएंगें. इससे पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि मतदान के नतीजों में थोड़ी देरी हो सकती है. इसका कारण है कि वीवीपैट में दर्ज मतों की गिनती में समय लग सकता है. अब आयोग का कहना है कि मतगणना के दौरान ईवीएम और वीवीपैट में दर्ज मतों के बीच अंतर पाए जाने पर वीवीपैट के आंकड़ों को ही आखिरी माना जाएगा.

गिनती के समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लोकसभा क्षेत्र के हर विधानसभा क्षेत्र में पांच ईवीएम और इनसे संबंधित वीवीपैट में दर्ज वोटों का मिलान किया जाएगा. हालांकि प्रत्याशी की मांग पर किसी विशेष ईवीएम और संबंधित वीवीपैट की भी गिनती की जा सकती है.

चुनाव आयोग की ओर से सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को मतगणना के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. बता दें इस बार सभी बूथों पर ईवीएम के साथ ही वीवीपैट का भी इस्तेमाल किया गया है.

ये भी पढ़ें- चुनावी हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में एक दिन पहले चुनाव प्रचार EC ने लगाई रोक

आयोग ने साफ कर दिया है कि अगर किसी भी कारण ईवीएम और वीपीपैट में दर्ज मतों के आंकड़े अलग-अलग होते हैं तो वीपीपैट की गिनती को आखिरी मानकर चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा. मतगणना के दौरान आयोग लॉटरी के जरिए चुने गए पांच वीवीपैट की गिनती करेगा. लेकिन अगर किसी उम्मीदवार को खास ईवीएम पर संदेह हो तो वह संबंधित वीपीपैट की गिनती के लिए चुनाव अधिकारी के पास आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार या तो खुद या फिर अपने मतगणना एजेंट के माध्यम से यह आवेदन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी मांग के पक्ष में ठोस कारण बताना होगा. हालांकि, गिनती कराने या ना कराने का फैसला पूरी तरह चुनाव अधिकारी के विवेक पर निर्भर करेगा.

हालांकि ईवीएम और पोस्टल बैलेट की गिनती के साथ ही आंकड़ों के आधार पर जीत-हार की स्थिति तो शाम तक साफ हो जाने की उम्मीद है. मगर, नतीजों की आखिरी घोषणा वीवीपैट की गिनती पूरी होने के बाद ही होगी. ऐसे में चुनाव नतीजों के आधिकारिक आंकड़े आने में देरी हो सकती है.

बता दें इस बार सर्विस वोटर पर बार कोड का इस्तेमाल किया गया है. ऐसे में एक सर्विस बैलेट पेपर को रीडर के माध्यम से पढ़े जाने पर औसतन ढाई मिनट का समय लग रहा है. इस कारण से जिन लोकसभा क्षेत्रों में सर्विस वोटर ज्यादा हैं, वहां चुनाव परिणाम देर से जारी होंगे.गौरतलब है कि देश में सबसे ज़्यादा सर्विस वोटर 42,575 जम्मू सीट पर हैं, इसके बाद उत्तराखंड में गढ़वाल संसदीय सीट पर 34,433 सर्विस वोटर हैं.

ये भी पढ़ें-

लोकसभा चुनाव: यहां लोगों के पास है वोटर कार्ड, पर समंदर ने बदल दिया घर का पता

चुनाव आयोग का ट्विटर को आदेश, Exit Polls से जुड़े ट्वीट तुरंत हटाए

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पाससब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

जिम्मेदारी दिखाएं क्योंकि
आपका एक वोट बदलाव ला सकता है

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

डिस्क्लेमरः

HDFC की ओर से जनहित में जारी HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पूर्व में HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI R­­­­eg. No. 101. कंपनी के नाम/दस्तावेज/लोगो में 'HDFC' नाम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HDFC Ltd) को दर्शाता है और HDFC लाइफ द्वारा HDFC लिमिटेड के साथ एक समझौते के तहत उपयोग किया जाता है.
ARN EU/04/19/13626

News18 चुनाव टूलबार

  • 30
  • 24
  • 60
  • 60
चुनाव टूलबार