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नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराऊंगा या राजनीति से संन्यास ले लूंगा : भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी

शुभेंदु अधिकारी. (File Pic)
शुभेंदु अधिकारी. (File Pic)

West Bengal Assembly Elections: ममता बनर्जी ने सोमवार को घोषणा की है कि वह नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ेंगी. नंदीग्राम को हाल ही में तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी की पारंपरिक सीट माना जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2021, 6:40 PM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) के नंदीग्राम (Nandigram) से चुनाव लड़ने की घोषणा के कुछ ही देर बाद टीएमसी छोड़ भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने कहा कि नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराएंगे या राजनीति से संन्यास ले लेंगे. दरअसल शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट से ही चुनाव लड़ते आए हैं और इस क्षेत्र में उनका दबदबा भी बताया जाता है.

इससे पहले अधिकारी ने वोटर्स को सस्पेंस में रखते हुए कहा था कि मैं नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के अपने फैसले के बारे में आपको अपनी रैली में बताऊंगा. बता दें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी लड़ाई को राजनीतिक दिग्गज शुभेंदु अधिकारी के गढ़ में ले जाते हुए सोमवार को घोषणा की कि वह वहां से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी. बनर्जी ने इस बड़ी घोषणा के लिए नंदीग्राम को चुना जो भाजपा से दो-दो हाथ करने के तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो के संकल्प का परिचायक है. भाजपा राज्य में एक दशक से राज कर रही तृणमूल को सत्ता से उखाड़ फेंकने की जी-तोड़ कोशिश में जुटी है.

ममता बनर्जी ने नंदीग्राम को बताया अपने लिए भाग्यशाली
मुख्यमंत्री ने यहां एक रैली में कहा कि दूसरे दलों में जाने वालों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं क्योंकि जब तृणमूल कांग्रेस बनी थी, तब उनमें से कोई साथ नहीं था. बनर्जी ने कहा, ‘‘ मैंने हमेशा से नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत की है. यह मेरे लिए भाग्यशाली स्थान है. इस बार, मुझे लगा कि यहां से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए. मैं प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी से इस सीट से मेरा नाम मंजूर करने का अनुरोध करती हूं.’’
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मंच पर मौजूद बख्शी ने तुरंत अनुरोध स्वीकार कर लिया.

शुभेंदु अधिकारी की भी पैठ है मजबूत
बता दें नंदीग्राम में तत्कालीन वाम मोर्चे की सरकार द्वारा स्पेशल इकोनॉमिक जोन के निर्माण के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण करने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. राजनीतिक झगड़े के कारण प्रचलित और खूनी विरोध प्रदर्शनों का फायदा ममता और उनकी पार्टी को मिला जिसके कारण टीएमसी 34 साल के वाम मोर्चे के शासन का अंत कर सत्ता में आ गई.

अधिकारी को कोलकाता के लगभग 130 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित नंदीग्राम में हुए आंदोलन का चेहरा माना जाता है, भाजपा में जाने के बाद, अधिकारी ने अक्सर बनर्जी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने क्षेत्र के लोगों को भुला दिया है जिन्होंने राज्य में उनकी सत्ता हासिल करने में मदद की है.
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