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जम्मू-कश्मीरः महबूबा बोलीं- पॉलिटिकली लड़े बीजेपी, ED को हथियार ना बनाए

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमारे लिए कर्ज लेना भी करप्शन बन गया है. कोई प्रॉपर्टी नहीं है. अगर कुछ होता तो ये हमारे वालिद के मकबरे की जांच नहीं कराते.
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमारे लिए कर्ज लेना भी करप्शन बन गया है. कोई प्रॉपर्टी नहीं है. अगर कुछ होता तो ये हमारे वालिद के मकबरे की जांच नहीं कराते.

Jammu and Kashmir DDC Elections 2020: जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने कहा कि केंद्र सरकार एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है और डीडीसी चुनावों में सीट जीतने के लिए मैनिपुलेशन हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 23, 2020, 7:40 PM IST
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श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर जिला विकास परिषद (Jammu and Kashmir DDC Elections) के चुनावों में गुपकार एलायंस के तहत चुनाव लड़ी पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने बुधवार को केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला. चुनाव नतीजों के एक दिन बाद महबूबा ने कहा कि बीजेपी को लड़ना है तो राजनीतिक रूप से लड़े. ईडी, सीबीआई और एनआईए को हथियार ना बनाएं. चुनाव में मैनिपुलेशन का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के दरम्यान उनके मंत्री एक महीने से टेंट लगाए हुए थे. पूरी मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव में किया गया.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के प्रदर्शन पर श्रीनगर में महबूबा ने कहा, "हमने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा और 31 सीटें जीतीं, लेकिन डेमोक्रेसी का चेहरा सिर्फ चुनाव नहीं होता है. केंद्र सरकार ने जब अनुच्छेद 370 खत्म किया तो इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार बताया. लेकिन, जब लोग अपनी आवाज उठाते हैं तो जेल में बंद कर देते हैं. नहीं मानते हैं तो मुकदमे कर देते हैं. किसानों के खिलाफ कानून लाए आज लाखों किसान सड़क पर हैं. अनुच्छेद 370 को गैर-कानूनी तरीके से हटाया. जो भी फाइट करता है, उनको टुकड़े-टुकड़े कहकर जेल में डाला जाता है. आज किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, उनको खालिस्तानी कहते हैं. कई यूनियन के यहां रेड डाला है. लोकतंत्र बड़ी सोच है. मौलिक अधिकार है."

महबूबा ने कहा, "जम्मू-कश्मीर के स्वाभिमान की बहाली करनी है और ये मेरे अस्तित्व से भी बड़ी चीज है. मुझे नहीं लगता कि डीडीसी चुनाव परिणाम के बाद विधानसभा चुनाव जल्दी कराएंगे. नतीजों से साफ है कि लोग पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ हैं." पीडीपी नेता ने बीजेपी पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे जेल में डाल दें, लेकिन दूसरे लोगों को प्रताड़ित ना करें.



पीडीपी नेता ने कहा, ''ये कहते रहे कि इनकी पार्टी खत्म हो गई. 30 से ज्यादा सीटें हमने जीती हैं. ये प्रवर्तन निदेशालय (ED) का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. हम जो भी मांगते हैं, संविधान के अंदर मांगते हैं. महबूबा कभी खामोश नहीं रहेगी. ये जम्मू-कश्मीर की इज्जत का सवाल है. मुझे नहीं पता कि ये मेरी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस है. पहले से ही बहुत सारे नेताओं को उठाकर ले गए हैं. किसी को कुछ नहीं बताते. कहते हैं आपको प्रिवेंटिव डिटेंशन में बंद किया है.''
आक्रोशित स्वर में महबूबा ने कहा, "ये लोग हमें टेरर फंडिंग से जोड़ना चाहते हैं. मिलिटेंट की फैमिली थी, मुफ्ती साहब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे. उनकी फैमिली को बैंक अकाउंट के जरिए मदद करते थे. ये आज भी कहती हूं और कल भी कहती थी. वाहिद को आतंक के साथ कनेक्ट करना बुजदिली है."

उन्होंने कहा, "मुझे कई बार संदेश देने की कोशिश की गई कि जम्मू-कश्मीर छोड़ दीजिए. मैं कोई बड़ी हस्ती नहीं हूं. जम्मू-कश्मीर के मजलूम लोगों की आवाज हूं. अनुच्छेद 370 की वजह से डाका डाला गया. एजेंसियों को हथियार बनाया गया है. मैं कहती हूं कि गंभीर मामला है तो जांच करो. लेकिन, ये लोग इतने गिर गए हैं कि मुफ्ती साहब के मकबरे का ऑडिट कर रहे हैं. एक इंसान जिसने इनके साथ हाथ मिलाया. वो दुनिया में नहीं है. लेकिन, उनके मकबरे का ऑडिट हो रहा है."

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमारे लिए कर्ज लेना भी करप्शन बन गया है. कोई प्रॉपर्टी नहीं है. मेरी बहन डॉक्टर है. वो हजारों डॉलर टैक्स देते हैं. उसको भी कुरेदना शुरू कर दिया है. बीजेपी के पास कोई पॉलिटिकल दलील नहीं है. अगर कुछ होता तो ये हमारे वालिद के मकबरे की जांच नहीं कराते.

पीडीपी नेता ने कहा, "ये लोग ईडी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. वाहिद को एनआईए ले गई. एक महीना कस्टडी में रखा. कोशिश करते रहे कि वो मान जाए और मामला मेरे तक पहुंच जाए. 200-250 लोगों ने उससे पूछताछ की. हमारे रिश्तेदार हैं. सहकर्मी हैं. हमारे यहां अल्ताफ काम करते थे. उनके घर में छापा डाला. अंजुम फाज़ली के घर छापा मारा. नईम साहब और बशीर मीर को उठाकर ले गए. कोई ऑर्डर नहीं था. कोई समन नहीं था. उठाकर ले जाते हैं. रखते कहीं और हैं."

बता दें कि डीडीसी चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, पीपुल्स मूवमेंट, सीपीआई (एम), अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने कुल मिलाकर 110 सीटें जीती हैं. बीजेपी अकेले 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है.
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