असम के पुलिस कर्मी ने हाथरस गैंगरेप के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर की असंवेदनशील टिप्पणी

हाथरस गैंगरेप मामले में न्याय की मांग करते प्रदर्शनकारी लोग
हाथरस गैंगरेप मामले में न्याय की मांग करते प्रदर्शनकारी लोग

आलोचकों और प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh police) और राज्य सरकार (state government) पर अपराध करने वाले कथित अपराधियों (alleged perpetrators of crime) के साथ के साथ मिले होने का आरोप लगाया है और बढ़ते हुए प्रदर्शनों में पीड़ित के लिए न्याय (justice for the victim) की मांग की जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2020, 4:12 PM IST
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नई दिल्ली. हाथरस गैंगरेप का मामला (Hathras gang rape case) भारत में कानून और व्यवस्था, महिला सुरक्षा (women's safety) और महिला विरोधी मानसिकता के चिर-परिचित सवालों को वापस ले आया है. दिल्ली के कुख्यात निर्भया मामले (Delhi's infamous Nirbhaya case), जिसमें 23 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट की दिल्ली में एक जघन्य अपराध (heinous crime) में जान गई थी, के ठीक आठ साल बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय दलित लड़की (Dalit girl) के रेप और मौत की घटना के बाद उसी तरह के विरोध प्रदर्शनों (protests) ने देश को हिलाकर रख दिया है.

आलोचकों और प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh police) और राज्य सरकार (state government) पर अपराध करने वाले कथित अपराधियों (alleged perpetrators of crime) के साथ के साथ मिले होने का आरोप लगाया है और बढ़ते हुए प्रदर्शनों में पीड़ित के लिए न्याय (justice for the victim) की मांग की जा रही है.

घटना से सीखते नहीं दिख रहे हैं पुलिस अधिकारी
इस घटना ने कानून-व्यवस्था की देख-रेख करने वालों के जरिए ही सत्ता का दुरुपयोग करने के बारे में एक बहस को भी जन्म दिया है, जो एक जघन्य अपराध की शिकार महिला की मौत होने के बाद भी उसकी गरिमा की रक्षा करने में विफल रही.
फिर भी पुलिस अधिकारी इससे कुछ सीखते नहीं दिख रहे हैं और यह बात हाल ही में असम पुलिस के एक कर्मचारी और प्रदर्शनकारियों से जुड़ी एक घटना से भी साबित होती है. द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाथरस बलात्कार पीड़िता के लिए न्याय की मांग करने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों के सामने पड़ने पर असम पुलिस के एक अधिकारी ने "बिना मां के पैदा हुआ हूं" कहकर आपत्तिजनक टिप्पणी की.



पुलिस वाले ने इसे गैर गंभीर मामला बता दरकिनार करने की कोशिश की
दरअसल जब पुलिस वाले के विरोध प्रदर्शन पर हंसने का विरोध किया गया और प्रदर्शनकारियों की ओर से उसे इसके लिए बोला गया, तो उन्होंने इस मामले को एक गैर-गंभीर मामला बता किनारे करने का प्रयास किया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा कि यह घटना असम में नहीं उत्तर प्रदेश में हुई थी और प्रदर्शनकारियों को इसके बारे में इतना "परेशान" नहीं होना चाहिए था.

प्रदर्शनकारियों ने तब पुलिस वाले से पूछा कि क्या उसकी एक बेटी है. इस पर उसने कहा, "नहीं, मैं अविवाहित हूं." प्रदर्शनकारियों ने इसके बाद जब उससे पूछा कि क्या उसकी मां है? सिपाही ने जवाब दिया, "मैं बिना मां के पैदा हुआ था. मैं बस पृथ्वी पर गिर गया था."

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उपरोक्त बातचीत का लिखित विवरण गुवाहाटी स्थित मयूरी डेका ने फेसबुक पर पोस्ट किया, जो शनिवार को हाथरस गैंगरेप पीड़िता के लिए आयोजित ऑल-वुमेंस प्रोटेस्ट आयोजन का हिस्सा थीं.
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