कई राज्‍यों में जीका वायरस का प्रकोप, जानिए भारत में कैसे आई यह बीमारी?

ये मच्छर पीने योग्य जल स्रोतों में घरों के आसपास और आसपास पूरे साल पैदा होते हैं, लेकिन मानसून के दौरान घनत्व बहुत अधिक होता है जब बड़ी संख्या में प्रजनन स्थल उपलब्ध हो जाते हैं. उच्च आर्द्रता और तापमान के चलते वह कई दिन तक उनका अस्तित्व रहता है.

News18Hindi
Updated: November 11, 2018, 7:35 AM IST
कई राज्‍यों में जीका वायरस का प्रकोप, जानिए भारत में कैसे आई यह बीमारी?
प्रतीकात्मक तस्वीर- AP
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Updated: November 11, 2018, 7:35 AM IST
देश भर में जीका वायरस के कई मामले सामने आ रहे हैं. हालांकि एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि भारत में जीका पहले से मौजूद नहीं था. भारत में पर्यावरण एडीज इजिप्ती (बुखार वाले पीले मच्छर) और एडीस अल्बोपिक्टस मच्छरों की मौजूदगी के चलते ZIKV के लिए अनुकूल है जो आमतौर पर सुबह से शाम तक सक्रिय रहते हैं.

यद्यपि ये मच्छर पीने योग्य जल स्रोतों में घरों के आसपास और आसपास पूरे साल पैदा होते हैं, लेकिन मानसून के दौरान घनत्व बहुत अधिक होता है जब बड़ी संख्या में प्रजनन स्थल उपलब्ध हो जाते हैं. उच्च आर्द्रता और तापमान के चलते वह कई दिन तक उनका अस्तित्व रहता है. इस प्रकार, उन्हें हर 3-4 दिनों में अंडे रखने का अवसर मिलता है. उन्हें खून पीने का मौका भी मिलता है.

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बता दें भारत में 70 से ज्यादा मामले अब तक जीका वायरस के मामले सामने आ चुके हैं. यह वायरस जानलेवा है. वहीं गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद खतरनाक है. भारत सरकार की ओर से भी कहा गया है कि  जीका विषाणु से पीड़ित महिलाओं में गर्भधारण के दौरान समस्याएं पैदा होने की संभावना है.

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राजस्थान, गुजरात और दिल्ली में जीका वायरस के कई मरीज सामने आ चुके हैं. आशंका जताई जा रही है कि यह कुछ और राज्यों में फैल सकता है. जीका वायरस का असर फिलहाल दुनिया के 86 देशों में फैल चुका है.

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