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केरल का 'वाटर बेल' तेलंगाना पहुंचा

News18Hindi
Updated: December 2, 2019, 2:47 PM IST
केरल का 'वाटर बेल' तेलंगाना पहुंचा
'वाटर बेल'

केरल के 'वाटर बेल' कंसेप्ट को तेलंगाना ने भी अपनाया, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इसे लागू करने का स्पष्ट निर्देश भेजा.

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  • Last Updated: December 2, 2019, 2:47 PM IST
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बालकृष्ण एम

हैदराबाद. हैदराबाद के स्कूल, केरल के 'वाटर बेल' कंस्पेट को अपना रहे हैं. केरल और कर्नाटक में 'वाटर बेल' का यह कंसेप्ट काफी जोर-शोर से चल रहा है. और अब यह तेलंगाना के स्कूलों में भी पहुंच गया है. इस कंसेप्ट की मुख्य बात यह है कि स्कूलों में घंटियां दिन में दो बार बजेंगी, जो छात्रों को यह याद दिलाएगी की पानी पीना है. इस तरह छात्रों के शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहेगी.

TIME की प्रिंसिपल ने न्यूज18 से की बात
वाटर बेल, स्कूलों में नाश्ते के लिए होने वाली नियमित छुट्टी से अलग है और यह छात्रों के शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा की उपलब्धता सुनिश्चित करता है. यद्यपि छात्र घर से पानी का बोतल लाते हैं, पर अमूमन इसमें से बहुत ही कम पानी पीते हैं और इसे ऐसे ही वापस अपने घर ले जाते हैं. पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं. 'वाटर बेल' का कंसेप्ट न केवल बच्चों को लाभ पहुंचाएगा, बल्कि शिक्षकों को भी पानी पीने की याद इससे आएगी जो स्कूल में काफी व्यस्त होने के कारण अमूमन पानी पीने से रह जाते हैं. न्यूज18 से बात करते हुए टीआईएमई किड्स प्रीस्कूल, सैनिकपुरी, हैदराबाद की प्रिंसिपल ज्योति एम ने यह कहा.

राज्य सरकार ने स्कूलों में 'वाटर बेल' के कंसेप्ट को लागू करने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं. तेलंगाना की शिक्षा मंत्री पी सबिता इंद्रा रेड्डी ने राज्य के जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी सरकारी स्कूलों में 'वाटर बेल' कंसेप्ट को लागू करें.

डॉ. कुमार ने बताये पानी के फायदे
'वाटर बेल के आइडिया को अपनाने के लिए हम तेलंगाना सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं. पसीने और पेशाब के कारण बच्चों के शरीर से पानी निकलता है और उन्हें इस पानी की भरपाई (replenish) करने की जरूरत होती है. पानी भोजन के पाचन में मदद करता है और यह कब्ज को दूर करता है तथा यह शरीर में रक्त के उचित प्रवाह और शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए जरूरी है. जब बच्चे पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं तो वे स्वस्थ रहते हैं, न्यूज़18 से बात चीत में यह कहना था डॉ. चल्लागली प्रभु कुमार का जो तेलंगाना के एक प्रमुख डॉक्टर हैं.
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वाटर बेल की शुरुआत सबसे पहले केरल से हुई जहां कम पानी पीने की वजह से बहुत सारे बच्चे बीमार पड़ रहे थे. बच्चों के पानी कम पीने की वजह से उनमें मोटापा बढ़ता है, पेशाब नली में संक्रमण का डर रहता है, बदहजमी हो सकती है, चिडचिडापन आ सकता है और उसकी शारीरिक क्षमता प्रभावित होती है.

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First published: December 2, 2019, 2:47 PM IST
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