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water crisis due to drying up of hiran river a tributary of narmada

 बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती, लाखों की प्‍यास बुझाने वाली नर्मदा की ‘बहन’ हिरन

जिले की कुंडम तहसील में हिरन नदी का उद्गम स्थल है

जिले की कुंडम तहसील में हिरन नदी का उद्गम स्थल है

मध्‍य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी अपनी सहायक नदियों के साथ कल-कल बहती है. इन सहायक नदियों में से एक है हिरन नदी. जबलपुर महानगर की प्‍यास बुझाने में कभी इस नदी की महती भूमिका होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह खुद अपनी प्‍यास बुझाने के लिए बूंद-बूंद पानी को तरस रही है.

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जबलपुर. कैग की हो या नीति आयोग की. सभी रिपोर्ट्स भूजल स्तर को लेकर चेतावनी देती रही हैं. कई राज्यों के शहरों-गांवों में स्थिति बिगड़ती जा रही है. उसके बाद भी प्रशासनिक अमला उस पर ध्यान नहीं दे रहा है. जबलपुर में भी हाल कुछ वैसा ही है. गर्मियों में पानी की किल्लत साल-दर-साल बढ़ती जा रही है. नर्मदा की सबसे बड़ी सहायक नदी हिरन भी कई साल से सूखी पड़ी है. दूसरी छोटी नदियों का तो जैसे अस्तित्व ही मिटता जा रहा है. लेकिन, अब क्षिप्रा नदी की तर्ज पर हिरन नदी को भी पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है.

‘नदी किनारे घोंघा प्यासा’ कहावत हर किसी ने सुनी होगी. ऐसा ही कुछ हाल जबलपुर का भी है. मां नर्मदा के तट पर बसा यह नगर बीते कई वर्षों से गर्मियों में प्यासा रहता है. कम बारिश और नीचे जाता जलस्तर इस शहर की 25 लाख आबादी को परेशान करता है. नगर निगम और जिला प्रशासन लोगों के घरों तक नर्मदा जल पहुंचाने के लिए जोरों से दंभ भरता है, लेकिन अभी भी शहर के कई क्षेत्र पानी की समस्या से जूझ रहे हैं.

hiran river

27 वर्षों से हिरन नदी बदहाली का शिकार
नर्मदा के अलावा जबलपुर में गौर और हिरन नदी भी पानी का मुख्य स्त्रोत हैं. लेकिन गौर नदी में जहां डेयरियों से निकलने वाली गंदगी ने पानी को दूषित कर दिया है तो वहीं हिरन नदी पूरी तरह सूख चुकी है. बीते लगभग 27 वर्षों से हिरन नदी बदहाली का शिकार है. उसे पुनर्जीवित करने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन ये प्रयास महज औपचारिक ही नजर आते हैं.

बता दें कि जिले की कुंडम तहसील में हिरन नदी का उद्गम स्थल है. इसे कुंडेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि कई सदियों पहले यहां राजा महाराजाओं के समय में एक युवती वर्तमान कुंडेश्वर धाम पर पहुंची थी, जहां उसका लोटा गिर गया था. उसके घर वापस लौटने के बाद जब उसे याद आया कि उसका लोटा रास्ते में छूट गया है तो वह उसे लेने के लिए वापस पहुंची और जैसे ही उसने लोटा उठाया तो अचानक वहां पानी की धार फूट गई और हिरिया नामक युवती उस पानी में डूब गई. हिरिया के नाम से ही उसे हिरन नदी का नाम दिया गया.

लगातार ट्यूबवेल खुदने से सूख गया नदी का सोर्स
स्थानीय लोगों द्वारा इस हिरन नदी की धार के उद्गम को एक कुंड के रूप में संजोया गया और कई सदियों तक इसका पानी लोगों के लिए वरदान बना रहा. यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि कुंडम क्षेत्र में लगातार ट्यूबवेल की खुदाई होने के कारण जमीन के अंदर पानी की झिरें खुल गईं और नदी में जाने वाला पानी ट्यूबवेल के जरिये बाहर आने लगा और नदी का सोर्स धीरे-धीरे खत्म हो गया. आलम यह है कि अब नदी पूरी तरह सूख चुकी है.

hiran river

स्थानीय बीजेपी नेता सतीश अवस्थी कहते हैं, इसे पुनर्जीवित करने के लिए जनप्रतिनिधि, स्थानीय लोग और प्रशासन महानदी का सहारा ले रहे हैं. योजना के मुताबिक महानदी से एक नहर के जरिये हिरन नदी के उद्गम स्थल के पास पानी छोड़ा जाएगा, जिससे यह पुनर्जीवित हो उठेगी. नदी के रास्ते में जहां भी अतिक्रमण हुए हैं उन्हें हटाया जाएगा और नदी के दोनों तटों को व्यवस्थित किया जाएगा. इसके साथ ही नदी को गहरा करने के प्रयास भी किए जाएंगे.

करोड़ों रुपये की राशि मिली, लेकिन सब…
स्थानीय कांग्रेस नेता भवानी साहू का कहना है कि बीते 15 सालों से यहां भाजपा की विधायक पदासीन हैं लेकिन उन्होंने कभी भी इस क्षेत्र के विकास को लेकर कोई प्रयास नहीं किए. हिरन नदी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए करोड़ों रुपये की राशि प्रदान की गई, लेकिन उसमें भी बंदरबांट कर ली गई. इसी का परिणाम है कि नदी के साथ-साथ यहां की कृषि भूमि भी प्यासी है.

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समाजसेवी और यहां के लिए काम कर रहे कमलेश साहू कहते हैं, कुंडेश्वर धाम को यहां के लोग ना सिर्फ हिरन नदी का उद्गम स्थल मानते हैं, बल्कि एक धार्मिक स्थल भी मानते हैं. उद्गम स्थल को संरक्षित करने के लिए हमारे पूर्वजों ने यहां कुंड और मंदिर बनवाए थे. कुंडेश्वर धाम की इस स्थिति को देखकर वे भी काफी दुखी हैं. उनका मानना है कि पूर्वजों ने जो भी प्रयास किए वह जल ही जीवन मानकर किए थे. लेकिन बीते सालों में परिस्थितियों के बदलने के बाद आज जो हालात हैं, वो बहुत परेशान करने वाले हैं. आने वाली पीढ़ी इस ऐतिहासिक नदी के पानी से वंचित ना हो इसके लिए शासन और प्रशासन स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है.

हिरन बांध के बनने से दिखेगा असर
जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जामदार कहते हैं, हिरन नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास आज से करीब 10 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था. इसके लिए शासन द्वारा प्रस्ताव बनाकर करोड़ों रुपये भी स्वीकृत किए गए. लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति में कमी के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सके. बहरहाल जन अभियान परिषद के माध्यम से अब पुनः प्रयास किए जा रहे हैं. जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जामदार का कहना है कि हिरन नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास उसी स्तर पर करना होगा जिस तरह क्षिप्रा नदी को पुनर्जीवित किया गया. बहरहाल इस सप्ताह कुंडम में एक जलाभिषेक संसद का आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर नदी के विकास के लिए मंथन करेंगे. इसके साथ ही गौर एवं परियट नदी को स्वच्छ एवं अतिक्रमण मुक्त करने के लिए भी विचार विमर्श किया जाएगा.

hiran river

हिरन जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री आरडी अहिरवार का कहना है कि हिरन नदी में बधिया गांव के ठीक ऊपर हिरन बांध का निर्माण हो रहा है. ये लगभग 70% बन गया है. इसके बन जाने से आसपास के गांवों में सिंचाई की व्यवस्था होगी. इसका अतिरिक्त पानी नदी में जाएगा. पानी भंडारित होने से नीचे के गांवों का जलस्तर बढ़ जाएगा.

Tags: Environment news, Narmada, News18 Hindi Originals, Water Crisis

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