Narada Case Updates: नारदा केस में गिरफ्तार चारों नेता देर रात ले जाए गए जेल, TMC के निशाने पर राज्यपाल धनखड़

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (PTI Photo/Swapan Mahapatra)

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (PTI Photo/Swapan Mahapatra)

CBI ने टीएमसी के नेता फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा, पूर्व टीएमसी नेता एवं कोलकाता के पूर्व महापौर सोवन चटर्जी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी लेने के लिए सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ का रुख किया था. वर्ष 2014 में कथित अपराध के समय ये सभी मंत्री थे.

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कोलकाता. नारदा स्टिंग ऑपरेशन (Narada Case) के मामले में गिरफ्तार किए गए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो मंत्रियों व एक विधायक के साथ पार्टी के पूर्व नेता को सोमवार देर रात कोलकाता के निजाम पैलेस स्थित सीबीआई दफ्तर से जेल ले जाया गया. केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में टीएमसी नेता फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा, पूर्व टीएमसी नेता एवं कोलकाता के पूर्व महापौर सोवन चटर्जी को गिरफ्तार किया है. सीबीआई ने चारों नेताओं के अभियोजन की मंजूरी के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) से संपर्क किया था. दिल्ली में सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी ने बताया कि धनखड़ ने सात मई को सभी चारों नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी जिसके बाद सीबीआई ने अपने आरोप-पत्र को अंतिम रूप दिया और उन्हें गिरफ्तार किया. इसके बाद सत्तारूढ़ टीएमसी ने राज्यपाल पर सवाल उठाए हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने नारद मामले में बंगाल के दो मंत्रियों तथा अन्य लोगों की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया और कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के आधार पर सीबीआई ने जो कदम उठाया है वह कानून संगत नहीं है. बिमान बनर्जी ने कहा, ‘मुझे सीबीआई की ओर से कोई पत्र नहीं मिला है और न ही प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक मंजूरी मुझसे ली गई.’

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘वे राज्यपाल के पास क्यों गए और उनकी मंजूरी क्यों ली, इसकी वजह मुझे नहीं पता. तब विधानसभा अध्यक्ष का पद खाली नहीं था और मैं पद पर था. यह मंजूरी पूरी तरह से गैरकानूनी है और इस मंजूरी के आधार पर किसी को गिरफ्तार करना भी गैरकानूनी है.’

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CPIM सांसद ने टीएमसी पर लगाए आरोप

अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार सीपीआई (एम) के राज्यसभा सदस्य और जाने-माने वकील बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने कहा- 'टीएमसी राज्यपाल को दोष क्यों दे रही है? यह एक कानूनी मुद्दा है और कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच का आदेश दिया गया था. हालांकि, राज्यपाल की हालिया गतिविधियों और बयानों से पता चलता है कि वह पक्षपातपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं.' टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, 'वह बीजेपी के एजेंट के तौर पर बंगाल आए थे। यह एक बार फिर साबित हो गया है.'

घोष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘बंगाल में रोजाना आने-जाने वाले जिन मुसाफिरों को राज्य की जनता ने चुनाव में पूरी तरह नकार दिया, उन्होंने इस महामारी के संकट के बीच पिछले दरवाजे से घुसने की साजिश रची है.’ उन्होंने भी तृणमूल कार्यकर्ताओं से संयम बरतने का आग्रह किया. कुणाल घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गये मुकुल रॉय और शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गयी है जबकि उनके नाम भी मामले में सामने आये थे.



बीजेपी ने क्या तर्क दिया?

इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि रॉय और अधिकारी ने सीबीआई की जांच में सहयोग दिया जबकि हिरासत में लिये गये तृणमूल नेताओं ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों द्वारा लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किये जाने की निंदा की. दिलीप घोष ने कहा, ‘सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय पार्टी को कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए.’ वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर विधानसभा चुनाव में हार के बाद राजनीतिक बदले के लिए सीबीआई के इस्तेमाल का आरोप लगाया.

क्या है मामला?

नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में एक कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आए.


जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि हकीम को स्टिंग ऑपरेशन करने वाले से पांच लाख रुपये रिश्वत लेने की बात स्वीकार करते हुए देखा गया जबकि मित्रा और मुखर्जी को कैमरे पर पांच-पांच लाख रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया. चटर्जी को स्टिंग करने वाले से चार लाख रुपये लेते हुए देखा गया. सीबीआई के अनुसार मिर्जा को भी कैमरे पर पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया. यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था.

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