3 आतंकी ढेर होने के बाद DGP दिलबाग सिंह बोले- हम दक्षिण कश्मीर में हिजबुल के खात्मे के बेहद करीब

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह (फोटो- ANI)

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि शोपियां एनकाउंटर हिजबुल (Hizbul Mjahideen) का कमांडर वसीम अहमद वानी और उसके साथी आदिल शेख, जहांगीर मार गिराए गए हैं. आदिल पहले स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) भी रह चुका है. वह शोपियां का रहने वाला था.

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    श्रीनगर. हिजबुल आतंकियों के साथ डीएसपी (निलंबित) दविंदर सिंह (davinder singh) की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षाबलों ने सोमवार को 3 और आतंकियों को मार गिराया. शोपियां में हुए मुठभेड़ में मार गिराए गए तीनों आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mjahideen) से थे. ऑपरेशन खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक (DGP) दिलबाग सिंह ने कहा कि मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन का सुप्रीम कमांडर वसीम अहमद वानी भी मारा गया है. हम दक्षिण कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के खात्मे के बेहद करीब हैं.

    मीडिया से बात करते हुए डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया, 'वसीम अहमद वानी दक्षिण कश्मीर में साल 2017 से सक्रिय था. उसके खिलाफ 19 एफआईआर दर्ज थे. वहीं, उसके साथ मारे गए दूसरे शख्स की पहचान आदिल शेख के तौर पर हुई है. आदिल पहले स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) भी रह चुका है. वह शोपियां का रहने वाला था.'

    पुलिस की नौकरी छोड़ आतंकी बन गया था आदिल शेख
    डीजीपी ने ये भी बताया कि आदिल शेख कुछ साल पहले हिजबुल में शामिल हो गया था. 29 सितंबर 2018 को उसने श्रीनगर से तत्कालीन विधायक अजाज मीर के घर से 7 हथियार और एक पिस्टल भी लूटे थे. वहीं, तीसरे आतंकी की पहचान जहांगीर के तौर पर हुई. वह पुलवामा का रहने वाला था.

    सही दिशा में चल रही दविंदर मामले की जांच
    डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस दौरान डीएसपी दविंदर मामले पर भी बात की. उन्होंने कहा कि मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को ट्रांसफर किया गया है. जो नई बातें सामने आई हैं, एनआईए को बता दी गई है. दविंदर सिंह की कस्टडी भी जांच एजेंसी के पास है. फिलहाल जांच सही दिशा में चल रही है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी.

    वहीं, दविंदर के बांग्लादेश कनेक्शन पर डीजीपी ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि दविंदर की बेटी बांग्लादेश में डॉक्टर की पढ़ाई कर रही है. अब दविंदर सिंह क्या सिर्फ इसलिए बांग्लादेश जाता था या कोई और भी एंगल है, इसकी जांच चल रही है.

    डी-रेडिकलाइजेशन कैंप का किया समर्थन
    डीजीपी दिलबाग सिंह ने इस दौरान गुमराह हुए युवाओं को मेन स्ट्रीम से जोड़ने के लिए कट्टरपंथ उन्मूलन केंद्रों (De-radicalisation camps) का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, 'हालिया समय में पाकिस्तान और इसकी एजेंसियों की ओर से इस क्षेत्र में कट्टरपंथ के प्रसार की कई कोशिशें हुई हैं. हमारे कुछ युवाओं का दिमाग इससे प्रभावित हुआ है और वे गुमराह हुए हैं. अगर ऐसे किसी कैंप की स्थापना होती है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए.'

    डीजीपी ने आगे कहा कि इस तरह के कैंप में अगर विषय के विशेषज्ञ और धार्मिक विशेषज्ञ शामिल हों, तो इससे युवाओं को मदद मिलेगी.

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