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अयोध्या फैसले पर भारत का पाकिस्तान को जवाब- ये हमारा आंतरिक मामला

भाषा
Updated: November 9, 2019, 11:16 PM IST
अयोध्या फैसले पर भारत का पाकिस्तान को जवाब- ये हमारा आंतरिक मामला
भारत ने अयोध्या फैसले पर पाकिस्तान को साफ जवाब दिया है.

अयोध्या मामले (Ayodhya Verdict) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले को लेकर भारत ने कहा कि हम पूरी तरह से आंतरिक एक सिविल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान (Pakistan) द्वारा की गई अनुचित और गंभीर टिप्पणियों को खारिज करते हैं.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसले में एक सदी से अधिक पुराने मामले पर सुनवाई करते हुए अयोध्या (Ayodhya) में विवादित स्थल पर राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया. साथ ही सरकार को आदेश दिया कि अयोध्‍या में मस्जिद के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन देने की व्‍यवस्‍था की जाए.

वहीं भारत ने अयोध्या के फैसले के समय को लेकर आपत्ति के लिए पाकिस्तान (Pakistan) की आलोचना की. भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने घृणा फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर टिप्पणी की है, वह बेहद निंदनीय है.

कुरैशी ने कही थी ये बात
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी (Shah Mehmood Qureshi) ने करतारपुर गलियारा (Kartarpur Corridor) खोले जाने के दिन अयोध्या मामले में फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस तरह के खुशी के मौके पर दिखाए गई ‘‘असंवेदनशीलता’’ से ‘‘बेहद दुखी’’ हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘‘‘हम एक सिविल मामले पर भारत के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर पाकिस्तान द्वारा की गई अनुचित और अनावश्यक टिप्पणियों को अस्वीकार करते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून के शासन और सभी धर्मों के लिए समान आदर की अवधारणाओं से संबंधित है जो उनके लोकाचार का हिस्सा नहीं हैं. इसलिए पाकिस्तान की समझ की कमी कोई आश्चर्य की बात नहीं है, घृणा फैलाने के स्पष्ट इरादे के साथ हमारे आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने की उनकी यह आदत निंदनीय है.”

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मत फैसला दिया और कहा कि हिंदुओं का यह विश्वास निर्विवाद है कि संबंधित स्थल पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था तथा वह प्रतीकात्मक रूप से भूमि के मालिक हैं.

शांति और सौहार्द बनाने की अपील
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शीर्ष अदालत के फैसले का हिन्दू नेताओं और समूहों ने व्यापक स्वागत किया. वहीं मुस्लिम नेतृत्व ने इसमें खामियां बताते हुए कहा कि वे निर्णय को स्वीकार करेंगे. उन्होंने भी शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की. इसके साथ ही राजनीतिक दलों ने कहा कि यह अब आगे बढ़ने का समय है.

अयोध्या में संबंधित स्थल पर विवाद सदियों पुराना है जहां मुगल बादशाह बाबर ने या उसकी तरफ से तीन गुंबद वाली बाबरी मस्जिद बनवाई गई थी. हिंदुओं का मानना है कि मुस्लिम हमलावरों ने वहां स्थित राम मंदिर को नष्ट कर मस्जिद बना दी थी.

यह मामला 1885 में तब कानूनी विवाद में तब्दील हो गया था जब एक महंत ने अदालत पहुंचकर मस्जिद के बाहर छत डालने की अनुमति मांगी. यह याचिका खारिज कर दी गई थी. दिसंबर 1949 में अज्ञात लोगों ने मस्जिद में भगवान राम की मूर्ति रख दी. कारसेवकों की बड़ी भीड़ ने छह दिसंबर 1992 को ढांचे का ध्वस्त कर दिया था.

(भाषा इनपुट के साथ)

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First published: November 9, 2019, 9:32 PM IST
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