पहले ही मिल जाएगी भूस्खलन, ग्लेशियर के टूटने जैसी प्राकृतिक घटनाओं की जानकारी

इससे आंधी, तूफान, बिजली कड़कने, धूल भरी आंधी, चक्रवात का बेहतर आकलन करके कम समय में जानकारी मुहैया करायी जा सकेगी, जिससे जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकेगा .

इससे आंधी, तूफान, बिजली कड़कने, धूल भरी आंधी, चक्रवात का बेहतर आकलन करके कम समय में जानकारी मुहैया करायी जा सकेगी, जिससे जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकेगा .

Weather : इसमें कहा गया है कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पद्धति के माध्यम से न केवल मौसम परिस्थितियों, भूस्खलन, ग्लेशियर के टूटने जैसी स्थितियों का बेहतर पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा बल्कि ऊर्जा उत्पादन, परिवहन बाधा, कृषि प्रभावोत्पादकता, आपूर्ति श्रृंखला प्रभाव आदि के बारे में सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी.

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नई दिल्ली. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मौसम परिस्थितियों, भूस्खलन, ग्लेशियर के टूटने जैसी स्थितियों के पूर्वानुमान के अलावा ऊर्जा उत्पादन, परिवहन बाधा, कृषि प्रभावोत्पादकता, आपूर्ति श्रृंखला प्रभाव आदि के आकलन के लिये ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग’ के उपयोग की योजना बनाई है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) ने इस उद्देश्य के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए देश में तीन बहुविषयक एवं बहु संस्थागत उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित करने का प्रस्ताव किया है.’’

उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए इन तीन उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना करने का मकसद बेहतर मौसम, जलवायु एवं भू जोखिम स्थितियों का पूर्वानुमान व्यक्त करना है .

योजना के प्रस्ताव प्रपत्र में कहा गया है कि पिछले छह दशकों में वायुमंडल में काफी बदलाव आया है . उच्च क्षमता वाली कम्प्यूटर आधारित गणना ने वैज्ञानिकों की वास्तविक पृथ्वी विज्ञान प्रणाली आधारित मॉडल सृजित करने में और अधिक मदद की.

भूस्खलन और ग्लेशियर टूटने की स्थितियों का लगेगा पूर्वानुमान
इसमें कहा गया है कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग पद्धति के माध्यम से न केवल मौसम परिस्थितियों, भूस्खलन, ग्लेशियर के टूटने जैसी स्थितियों का बेहतर पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा बल्कि ऊर्जा उत्पादन, परिवहन बाधा, कृषि प्रभावोत्पादकता, आपूर्ति श्रृंखला प्रभाव आदि के बारे में सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी.

जानमाल के नुकसान को किया जा सकेगा कम

इससे आंधी, तूफान, बिजली कड़कने, धूल भरी आंधी, चक्रवात का बेहतर आकलन करके कम समय में जानकारी मुहैया करायी जा सकेगी, जिससे जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकेगा .




प्रस्ताव प्रपत्र में कहा गया है कि वैश्विक मौसम पूर्वानुमान में अभी उपग्रह के जरिये उपलब्ध आंकड़ों का महज 5 प्रतिशत का उपयोग किया जा रहा है. वहीं, पारंपरिक माध्यम से पूर्वानुमान की पद्धति पर पहले से अधिक दबाव है . ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के जरिये वास्तविक मौसम की सटीक भविष्यवाणी बेहतर तरीके से की जा सकेगी.

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