बंगाल में नए कांग्रेस अध्यक्ष के लिए रस्साकशी, अब भी नाराज हैं अधीर रंजन चौधरी

बंगाल में नए कांग्रेस अध्यक्ष के लिए रस्साकशी, अब भी नाराज हैं अधीर रंजन चौधरी
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी

सच यह भी है कि 2018 में राहुल गांधी ने अधीर रंजन चौधरी को हटाकर सोमेन मित्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. अधीर 2014 से 2018 तक अध्यक्ष रहे और उनके हटाये जाने की खबर उनको मीडिया से मिली. जिसको लेकर वह काफी आहत थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 4, 2020, 9:04 PM IST
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कोलकाता. देश की सियासत में बंगाल टाइगर के नाम से मशहूर अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) यूं तो कभी किसी काम के लिए न नहीं कहते. उनकी कर्मठता की दाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी दे चुके हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव (2019 Lok Sabha Elections) में पश्चिम बंगाल से कांग्रेस (Congress) पार्टी के अकेले सांसद हैं अधीर रंजन चौधरी.

इस मजबूत पृष्ठभूमि के बावजूद अधीर रंजन चौधरी एक बात के लिए तीन बार न कर चुके हैं. पश्चिम बंगाल के नेता उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं. मगर उससे पहले ही पार्टी हाईकमान ने अपने कद्दावर नेता को संदेश भेजा है. दरअसल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सोमेन मित्रा का 30 जुलाई को निधन हो गया तबसे पश्चिम बंगाल में अध्यक्ष कुर्सी खाली पड़ी है. अधीर बहरामपुर से पांच बार सांसद और उससे पहले दो बार बंगाल के वियतनाम कहे जाने वाले नवग्राम से विधायक रह चुके हैं. पर अब अधीर दोबारा अध्यक्ष बनने को राज़ी नहीं हैं.

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विधानसभा चुनाव की तलवार
पश्चिम बंगाल में चुनाव सिर पर है. बंगाल में धरातल पर आई कांग्रेस के सामने चुनौती है कि राज्य में वह एक मजबूत नेतृत्व खड़ा करें. 2021 में होने वाले चुनाव से पहले पार्टी हाईकमान भी चाहता हैं कि अधीर जैसे नेता पश्चिम बंगाल की कमान संभालें. सूत्रों के मुताबिक एक नहीं तीन-तीन बार उनको सोनिया गांधी की तरफ से यह संदेश भेजा गया. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने पार्टी हाईकमान को यह संदेश दे दिया है कि किसी और को मौका दिया जाए.

आखरी बार उनको कुछ तीन दिन पहले संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व की तरफ से आ रही दरखास्त को लेकर अधीर पसोपेश में पड़े हैं.



ममता बनर्जी से ठनी
आधीर के कद काठी का नेता कांग्रेस पार्टी के पास पश्चिम बंगाल में है नहीं. उनकी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हमेशा आर-पार की लड़ाई रही है. यह लड़ाई आज की नहीं बल्कि तब की है जब अधीर रंजन ने अपना सियासी करियर शुरू किया था और उनको विधानसभा टिकट देने का ममता बनर्जी ने पुरजोर विरोध किया था.

सूत्रों के मुताबिक बतौर सांसद अधीर रंजन चौधरी की दर्जनों चिट्ठियों पर ममता बनर्जी ने आज तक कभी जवाब नहीं दिया. और तो और बंगाल में यह बात में किसी से छिपी नहीं की एक जिलाधिकारी का रातों रात ट्रांसफर इस बात को लेकर हो गया था कि उसने बहरामपुर जिले की कमेटी की बैठक बुला ली थी. अधीर और ममता की पुरानी रंजिश है और ऐसे में अधीर का रुख तृणमूल कांग्रेस के प्रति बेहद सख्त रहता है. 2019 के चुनावी समीकरणों को देखते हुए अधीर को हटाकर तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमेन मित्रा को अध्यक्ष पद सौंपा था.

राहुल गांधी से जग-जाहिर है नाराजगी
सच यह भी है कि 2018 में राहुल गांधी ने अधीर रंजन चौधरी को हटाकर सोमेन मित्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. अधीर 2014 से 2018 तक अध्यक्ष रहे और उनके हटाये जाने की खबर उनको मीडिया से मिली. जिसको लेकर वह काफी आहत थे.

उसके बाद एक बैठक में अधीर ने अपने बेबाक अंदाज में राहुल गांधी से नाराजगी भी जता दी थी. उन्होंने इस बात का दुख जताया, 'इतने साल पार्टी के लिए निस्वार्थ काम करने के बावजूद उनकी भावनाओं का खयाल नहीं किया गया, उनको बहुत अपमानित महसूस हुआ कि वह अध्यक्ष नहीं है इसकी खबर उनको अखबारों से लगी.'

राहुल ने गौरव गोगोई को लगाई थी फटकार
तब राहुल ने बंगाल के इंचार्ज गौरव गोगोई को बुलाकर लताड़ा था और अधीर से मांफी भी मांगी थी. राहुल ने राज्यों के इंचार्ज को यह निर्देश भी दिया था कि किसी भी मौजूदा पदाधिकारी को हटाने से पहले उनको सूचित किया जाएगा और फिर प्रेस रिलीज जारी की जाएगी.
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