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बंगाल विधानसभा चुनावः ममता के खिलाफ नंदीग्राम में बीजेपी के 'ट्रंप कार्ड' बनेंगे मिथुन चक्रवर्ती!

कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में बॉलीवुड अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने बीजेपी की सदस्यता ली. ANI

कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में बॉलीवुड अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने बीजेपी की सदस्यता ली. ANI

सुवेन्दु अब बीजेपी में हैं, मिथुन भी उनके पीछे हो लिए हैं. दोनों कभी ममता के साथी थे... अब राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं. नंदीग्राम की चुनावी जंग में ममता को मात देने के लिए सुवेंदु एक बार फिर मिथुन के भरोसे हैं.

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नई दिल्ली. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद और लोकप्रिय अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने 7 मार्च को बीजेपी का दामन थामा. इस मौके पर चक्रवर्ती ने टीएमसी के साथ अपने कार्यकाल को खराब निर्णय बताया और कहा कि उन्होंने बीजेपी गरीबों की सेवा करने के लिए ज्वॉइन की है. प्रधानमंत्री की रैली में पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने मिथुन चक्रवर्ती को बीजेपी का झंडा थमाकर पार्टी ज्वॉइन कराई. ब्रिगेड परेड ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने मिथुन चक्रवर्ती को बंगाल का बेटा ('बंगलार चेले') करार दिया. बीजेपी की ये कोशिश टीएमसी के उस नारे की काट में है, जिसमें पार्टी ने कहा है कि बंगाल अपनी बेटी को चाहता है (बंगाल निजेर मेये के चाय). इस नारे के जरिए टीएमसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बंगाल की बेटी के तौर पर प्रोजेक्ट किया है.

बंगाल के स्टार्स पर बीजेपी की नजर
बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की कोशिश लोकप्रिय बंगाली चेहरों को अपने साथ जोड़ने की रही है. पार्टी टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को अपने दल में शामिल करने के लिए जी तोड़ कोशिश करती रही, लेकिन गांगुली ने अपने निकट संबंधियों को बता दिया कि राजनीति में आने की उनकी इच्छा नहीं है. इनके अलावा बीजेपी ने बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के ऑइकॉन प्रोसेनजीत चटर्जी को पार्टी में शामिल करने की रही है. 23 जनवरी को प्रोसेनजीत चटर्जी ने विक्टोरिया मेमोरियल पर आयोजित नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जन्मदिन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया था. हालांकि चटर्जी ने अभी तक किसी तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षा प्रदर्शित नहीं की है.

मोहन भागवत से मुलाकात
दूसरी ओर मिथुन चक्रवर्ती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत से पिछले महीने मुंबई में अपने आवास पर मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने के अटकलों ने जोर पकड़ा. मिथुन के राजनीतिक करियर को देखें, तो उन्होंने हर घाट का पानी पीया है. लेफ्ट फ्रंट की सरकार के दौरान मिथुन चक्रवर्ती को ट्रांसपोर्ट और स्पोर्ट्स मंत्री सुभाष चक्रवर्ती का करीबी माना जाता था. बाद में ममता बनर्जी की सरकार बनी तो वे टीएमसी के साथ हो लिए और 2014 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भी भेजा. दो साल बाद मिथुन ने टीएमसी छोड़ दी और खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राज्यसभा सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक मिथुन चक्रवर्ती का नाम सारदा पोंजी स्कीम में भी आया था, जिसके बाद उन्होंने राज्यसभा छोड़ी.



12 मार्च से शुरू करेंगे प्रचार
मिथुन ने बीजेपी ज्वॉइन करने के बाद अपने एक इंटरव्यू में कहा, "मैंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी. आज, मैं इस बारे में किसी पर उंगली नहीं उठाना चाहता कि गलती किसकी थी. ये मेरा गलत फैसला था. इस विषय को यही खत्म करते हैं." 1976 में बंगाल के महान फिल्मकार मृणाल सेन की फिल्म मृगया से मिथुन चक्रवर्ती को स्टारडम हासिल हुआ. इस फिल्म में उन्होंने एक आदिवासी तीरंदाज की भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मिथुन चक्रवर्ती 12 मार्च से चुनाव प्रचार शुरू करेंगे.

बंगाल, बीजेपी और सेलेब्रिटीज
2021 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की कोशिश ज्यादा से ज्यादा सेलेब्रिटीज को अपने साथ जोड़ने की रही है, खासतौर पर बंगाली फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को, ताकि स्वयं को बंगालियों का पक्षधर दिखाया जा सके. बीजेपी के साथ जुड़े बंगाली फिल्म कलाकारों में रूद्रनील घोष, यश दासगुप्ता, हिरन चटर्जी, पायल सरकार, श्राबंती चटर्जी जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा बंगाली टीवी इंडस्ट्री के कलाकारों ने बड़ी संख्या में पार्टी ज्वॉइन की है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बांग्लादेश के फिल्म कलाकार फिरदौस ने ममता बनर्जी के लिए चुनाव प्रचार किया था. राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अपील और बंगाल के घर-घर में पहचान रखने वाले मिथुन चक्रवर्ती बीजेपी की रैलियों में बड़ी भीड़ जुटा सकते हैं.

बंगाल के घर-घर में पहचान
1980 के दशक में मिथुन चक्रवर्ती ने कामयाबी की बुलंदियों को छुआ और सोवियत यूनियन सहित वैश्विक फिल्म बाजार में लोकप्रियता हासिल की. 1980 से 2000 के बीच मिथुन युवाओं के लिए रोल मॉडल की तरह रहे. उन्होंने बंगाली फिल्मों नदी थेके सागरे, त्रोयी और कलंककिनी कांताबाती और एमएलए फाटाकेश्तो के जरिए बंगाल के घर-घर में अपनी पहचान बनाई.

नजर नंदीग्राम पर
मिथुन चक्रवर्ती का टीएमसी के पूर्व कद्दावर नेता और राज्य के कैबिनेट मंत्री रहे सुवेंदु अधिकारी के साथ करीबी रिश्ता है. बीजेपी ने सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम से मैदान में उतारा है, उनके खिलाफ ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में मिथुन चक्रवर्ती ने सुवेंदु के लिए प्रचार किया था, और अधिकारी जीतने में कामयाब रहे. 2021 में समीकरण बदल गए हैं.

सुवेन्दु अब बीजेपी में हैं, मिथुन भी उनके पीछे हो लिए हैं. दोनों कभी ममता के साथी थे... अब राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं. नंदीग्राम की चुनावी जंग में ममता को मात देने के लिए सुवेंदु एक बार फिर मिथुन के भरोसे हैं.
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