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West Bengal Election 2021: बंगाल चुनाव पर कितना असर डाल पाएगी ममता बनर्जी को लगी चोट?

ममता बनर्जी को शुक्रवार रात अस्पताल में छुट्टी मिल जाएगी.

ममता बनर्जी को शुक्रवार रात अस्पताल में छुट्टी मिल जाएगी.

West Bengal Assembly Elections 2021: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का आरोप है कि नंदीग्राम (Nandigram) में हुए हमले में उन्हें चोटें आईं. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह हमला था या हादसा?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 13, 2021, 8:33 AM IST
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संदीप बर्धन
कोलकाता. 
पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का आरोप है कि नंदीग्राम में 'चार-पांच आदमियों' द्वारा किए गए हमले में उन्हें चोटें आईं. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह हमला था या हादसा? ममता के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने दावा किया है कि ममता पर हमला नहीं हुआ, हालांकि इसका आखिरी फैसला जांच दल करेगा, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इस घटना का क्या मतलब है? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2021) में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक भयंकर प्रतियोगिता के बीच क्या यह प्रकरण और बनर्जी की अस्पताल की तस्वीर निर्णायक होगा?

इन्हीं सब विषयों पर News18.com, दीदी और द अनटोल्ड ममता बनर्जी की लेखक शुतापा पॉल और प मिशन बंगाल: ए सैफ्रन एक्सपेरिमेंट के लेखक, पत्रकार स्निग्धेंदु भट्टाचार्य से बातचीत की. उसके कुछ संपादित अंश यहां पढ़ें...

इस घटना का क्या होगा जमीन पर असर?
इसमें कोई संदेह नहीं है कि मौजूदा घटनाक्रम से बनर्जी को कुछ सहानुभूति नहीं मिलेगी. पॉल का कहना है कि इस घटना का बंगाल के लोगों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है जो सामान्य रूप से 'भावुक' हैं, वहीं भट्टाचार्य को यकीन नहीं है कि यह चुनावी लाभ में बदल पाएगा.



पॉल: 'ममता बनर्जी और जमीन के लोगों के बीच बहुत कुछ है. इस तरह की एक घटना जाहिर है कि यह एक गंभीर मामला है. मामले की जांच कर रही टीम को को पता लगाना चाहिए कि पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं थी जब मुख्यमंत्री चुनावी अभियान पर थीं. मुख्यमंत्री तक पहुंच आसान नहीं होनी चाहिए.'

भट्टाचार्य : 'अब तक, ऐसा लगता है कि लोगों का बहुत अधिक ध्रवीकरण हो गया है. उनमें से ज्यादातर ने पहले ही तय कर लिया है कि किसे वोट देना है. शुवेन्दु अधकारी के समर्थक कह रहे हैं कि ममता ने नंदीग्राम की धरती पर षड्यंत्र का आरोप लगाकर यहां का अपमान किया है. '

'स्ट्रीट फाइटर ममता'
हालिया घटना से एक और संदेश देने की कोशिश की गई है कि ममता एक स्ट्रीट फाइटर हैं और वह चुनौतियों का सामना करने से नहीं डरतीं. बुधवार को नंदीग्राम की घटना ने 16 अगस्त, 1990  की याद दिला दी जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ता ने ममता के सिर पर डंडे से मारा था. पॉल का कहना है कि नंदीग्राम (2016 में सीट जीतने वाली) से बनर्जी का चुनाव लड़ने का निर्णय भी एक प्रतीकात्मक और आश्चर्यजनक कदम है. जो यह संदेश देता है कि कोई भी राजनीतिक चुनौती दीदी के सामने बड़ी नहीं है, क्योंकि वह लोकप्रिय है.

पॉल: 'स्ट्रीट फाइटर' की छवि का ममता बनर्जी पूरा ख्याल रखती हैं. ममता इसे जाने नहीं देना चाहती हैं. उसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोगों से उनका जुड़ाव है. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर टीएमसी की रणनीति बनाते समय इस भरोसा किया था. ममता हमेशा बहुत भावुक नेता रही हैं. उनके राजनीतिक जीवन में चोट और दुर्घटनाओं की घटनाएं आम रही हैं. उन्हें सिर पर चोट लगी है. साल 1990 की घटना किसे नहीं याद. कम से कम दो और घटनाएं हुईं, जहां उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट लगी थी. वह इन सबका साहसपूर्वक सामना कर रही हैं.'

भट्टाचार्य: 'ममता ने कभी अपनी स्ट्रीट फाइटर इमेज नहीं खोई. लेकिन यह कहा जा सकता है कि TMC समर्थकों को (नंदीग्राम प्रकरण के बाद) थोड़ा और उत्साहित होंगे. यह (स्ट्रीट फाइटर टैग) उनकी यूएसपी रहा है. यहां तक कि नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के उनके निर्णय को भी इसी तर्ज पर देखा गया. शुवेंदु का सामना उनके घरेलू मैदान पर करने से टीएमसी समर्थकों का उत्साह और ज्यादा बढ़ गया है.'

साहुनूभूति पाने की रणनीति या नौटंकी कहना कितना सही?
हालांकि बीजेपी ने इस मामले की जांच की मांग की. कुछ ने कहा कि घटना कुछ और नहीं बल्कि बनर्जी की कार के दरवाजे से हुई दुर्घटना थी. कांग्रेस ने भी इसे जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए 'नौटंकी' करार दिया है. राज्य में उसके चुनावी सहयोगी लेफ्ट ने भी ऐसा ही रुख अपनाया है. इस मामले पर पॉल को लगता है कि राजनीतिक दलों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा उचित नहीं थी. भट्टाचार्य ने कहा कि घटना पर आई टिप्पणियां राजनीतिक पतन की ओर इशारा कर रही हैं.

पॉल: 'जब इस तरह के नेता घायल हो जाते हैं, हम कांग्रेस सरीखे विपक्ष से उम्मीद नहीं करते हैं कि वह 'नौटंकी' शब्द इस्तेमाल करेंगे या भाजपा से यह आशा नहीं है कि वह इसे सहानुभूति हासिल करने के लिए एक रणनीति कहें. ममता को अपना पॉलिटिकल कैंपेन छोटा करना पड़ा. अस्पताल जाना पड़ा. कुछ राजनीतिक मर्यादा बनी रहनी चाहिए.'

भट्टाचार्य: 'यह खबर आने के लगभग तुरंत बाद कांग्रेस और माकपा दोनों ने आरोप लगाया है कि ममता ने नौटंकी किया. विपक्षी दल इस बात से परेशान हैं कि कही ममता को इसका कोई लाभ ना मिल जाए.


हमला है या हादसा?

आखिर में यह सवाल जरूर उठेगा कि आखिर यह हमला है या दुर्घटना? कौन क्या मानकर बहस कर रहा है इसको दरकिनार करते हुए देखें तो यह बंगाल की राजनीति में एक और निचला स्तर है. जहां हिंसक राजनीति जगह ले रही है. जुबानी हमलों से भी यह स्पष्ट हो गया है कि यह मामला यहीं थमने वाला नहीं है. मार्च की गर्मी और 8 चरणों में हो रहे इलेक्शन से अभी राज्य का राजनीतिक पारा और बढ़ेगा.
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