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West Bengal Assembly Election 2021: ओबीसी वोटों पर है TMC-BJP की नजर,आरक्षण के वादों से साधने की कोशिश

TMC VS BJP (फाइल फोटो)

TMC VS BJP (फाइल फोटो)

West Bengal Assembly Election 2021पश्चिम बंगाल चुनाव में हर दल की नजर राज्य के ओबीसी वोट पर है. TMC और BJP ने इस बाबत अलग-अलग ऐलान किये हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 7:10 AM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल चुनाव (West Bengal Assembly Election 2021) में हर दल की नजर राज्य के ओबीसी वोट पर है. एक ओर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जहां अपने घोषणापत्र में ऐलान किया है कि वह तामुल, शाह, महिसिया और तिलि जातियों को ओबीसी आरक्षण के दायरे में लाएगी तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी कह चुके हैं कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो इन समुदायों को ओबीसी कैटेगरी में आरक्षण देगी.

साल 2019 के लोकसभा परिणाम देखें तो भाजपा को SC, ST और OBC के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से दक्षिण बंगाल में लाभ मिला. जिसने BJP को तृणमूल के गढ़ में सेंध लगाने में मदद की. यदि एससी / एसटी वोटों के ट्रांसफर से भाजपा को जंगलमहल और उत्तर 24 परगना और नदिया में बेहतर परिणाम पाने में मदद मिली, तो ओबीसी वोटों के शिफ्टिंग ने पार्टी को पूर्व और पश्चिम मिदनापुर, हुगली और हावड़ा जैसे जिलों में सीटें जीतने में मदद की.

अगर भाजपा अब इस पकड़ को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, तो तृणमूल उम्मीद कर रही है कि आरक्षण का वादा ओबीसी को उसके पक्ष में लाएगा.



2012 में टीएमसी ने यह कानून किया था पारित
पहली बार सत्ता संभालने के एक साल बाद, 2012 में तृणमूल सरकार ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवा और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) विधेयक, 2012 पारित किया, जो कुछ अन्य पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण देता है.  सिद्दीकी और सैयद को छोड़कर सभी मुस्लिम समुदाय सूची में ओबीसी ए या ओबीसी बी के रूप में शामिल हैं. हिंदुओं के मामले में, ओबीसी सूची में कंसारी, कहार, मिदेस, कपाली, कर्मकार, कुम्भकार, कुर्मी, मजी, मोदक, नेपेट्स, सूत्रधार, स्वर्णकार, तेलिस और कोलस शामिल थे.

पश्चिम बंगाल सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अनुसार, इसने लगभग 38 लाख ओबीसी प्रमाणपत्र जारी किए हैं. हाल ही में, सरकार ने दुआरे सरकार (द्वार पर सरकार) कार्यक्रम के तहत हजारों और नामांकन करने का दावा किया है. उस समय, महसी , तोमर, तिलि और साह जैसे समूहों को ओबीसी श्रेणी से बाहर रखा गया था क्योंकि यह माना जाता था कि ये समुदाय विशेषाधिकार प्राप्त हैं और पहले से ही मुख्यधारा का हिस्सा हैं.

अपने वादों पर टीएमसी और बीजेपी का क्या है कहना?
अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार  पश्चिम बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि तृणमूल का घोषणा पत्र वोट बैंक हासिल करने के उद्देश्य से नहीं ऐलान किया गया है. उन्होंने दावा किया कि 'ममता बनर्जी हमेशा दलितों के लिए कुछ करने के लिए उत्सुक रहती हैं. उन्होंने उनके लिए भोजन, घर और स्वास्थ्य सुरक्षा का आश्वासन दिया. अब, कई नए समूह उसी तरह की मांग कर रहे हैं किवे 'पिछड़ा' हैं. हमने इस पर विचार करने का फैसला किया है और हमारी सरकार यह तय करेगी कि वे ओबीसी सूची में शामिल होने के योग्य हैं या नहीं.'



भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि उनका वादा 'तृणमूल की विभाजनकारी राजनीति' की तरह नहीं है. उन्होंने कहा, 'हमने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जो लोग मंडल कमीशन के अनुसार आरक्षण पाने के योग्य हैं, हम देंगे. यह सुनने के बाद, ममता बनर्जी ने महिसिया और अन्य समूहों के बारे में ऐलान किया.'
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