शुवेंदु अधिकारी के ल‍िए नंदीग्राम सीट जीतना और ममता बनर्जी को हराना इतना अहम क्‍यों है?

तृणमूल सरकार (Trinamool Congress) में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे शुवेंदु के लिए  यह लड़ाई बहुत व्यक्तिगत भी है. (फाइल फोटो)

तृणमूल सरकार (Trinamool Congress) में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे शुवेंदु के लिए यह लड़ाई बहुत व्यक्तिगत भी है. (फाइल फोटो)

West Bengal Assembly election result 2021: शुवेंदु अधिकारी को बंगाली राजनीति में 'दादा' कहते हैं. यानि इस चुनाव में बड़े पैमाने पर उनके समर्थक उनका राजनीतिक भविष्य देख रहे हैं. जो लोग शुवेंदु का हाथ पकड़कर भाजपा में शामिल हुए वे भी आज आने वाले नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि शुवेंदु ने कभी कुछ नहीं कहा है, लेकिन उनके समर्थकों के बीच चर्चा गर्म है कि जीत होने पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किसे राज्‍य का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

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नई दिल्‍ली/कोलकाता : पश्चिम बंगाल (West Bengal) की सत्‍ता हासिल कर नील बाड़ी से सरकार चलाना भले ही भाजपा (BJP) का मकसद और वोटों की लड़ाई हो, लेकिन शुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के लिए बिल्कुल नहीं है. उनके सामने पास कई चुनौतियां हैं. तृणमूल सरकार (Trinamool Congress) में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे पूर्व मंत्री शुवेंदु के लिए यह लड़ाई बहुत व्यक्तिगत भी है.

भाजपा के टिकट पर नंदीग्राम (Nandigram) में तृणमूल के पूर्व विधायक की जीत एक चुनौती है, लेकिन अगर भाजपा नंदीग्राम में समग्र जीत हासिल नहीं कर पाती है, तो निश्चित ही शुवेंदु अपनी पुरानी पार्टी को राजनीतिक जवाब नहीं दे पाएंगे. यही वजह है कि बंगाल में आज सबकी निगाहें नंदीग्राम सीट पर लगी हैं.

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19 दिसंबर को मिदनापुर में अमित शाह के हाथ से पद्म ध्वज लेने के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उन पर भरोसा करना शुरू कर दिया था. उसी दिन अमित शाह कोलकाता और न्यूटाउन के होटलों में वोटिंग योजना को लेकर संगठनात्मक बैठक में शामिल हुए. चाहे वह कोलकाता हो या दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिगेड रैली की तैयारी हो या जेपी नड्डा के निवास पर महत्‍वूपर्ण चर्चा, उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए शुवेंदु को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला. यहां तक की उन्हें चुनावी प्रचार में भी सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में से एक के रूप में भी इस्तेमाल किया गया. उन्हें इस अभियान में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के चेहरे के रूप में चित्रित किया गया है, इसलिए उन्हें भाजपा के राज्य या केंद्रीय नेतृत्व से बहुत उम्मीदें हैं.

केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि उनके समर्थकों को भी उनसे काफी उम्मीदें है. उनके समर्थक शुवेंदु को बंगाली राजनीति में 'दादा' कहते हैं. यानि इस चुनाव में बड़े पैमाने पर उनके समर्थक उनका राजनीतिक भविष्य देख रहे हैं. जो लोग शुवेंदु का हाथ पकड़कर भाजपा में शामिल हुए वे भी आज आने वाले नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि शुवेंदु ने कभी कुछ नहीं कहा है, लेकिन उनके समर्थकों के बीच चर्चा गर्म है कि जीत होने पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किसे राज्‍य का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. इस 'बंगाल के बेटे' उनको लेकर काफी कयास लग रहे हैं. शुवेंदु के कई समर्थक भी 'दादा मुख्यमंत्री' की मांग कर रहे हैं. कयास हैं कि अगर वह नंदीग्राम में जीतते हैं, तो उन्हें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने का बड़ा इनाम मिलेगा.
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