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West Bengal Elections 2021: क्या भबानीपुर में ममता बनर्जी की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे शोभनदेव?

भबानीपुर की लड़ाई

भबानीपुर की लड़ाई

West Bengal Assembly Election: कहा जा रहा है कि ममत बनर्जी ने खुद शोभनदेव चट्टोपाध्याय को अपनी पुरानी सीट भबानीपुर से चुनाव लड़ने को कहा है. शोभनदेव टीएमसी के एक ताकवर नेता हैं. उनको पहली बार 1998 में TMC विधायक के रूप में चुना गया था.

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(सुजीत नाथ)

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) ने इस बार नंदीग्राम विधानसभा सीट (Nandigram Assembly seat) से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जबकि भबानीपुर से इस बार शोभन देव चट्टोपाध्याय चुनाव लड़ेंगे. बता दें कि साल 2011 से ही ममता भबानीपुर से विधायक रही हैं. ऐसे में हर किसी की निगाहें इस सीट पर टिक गई हैं. वैसे नंदीग्राम और भबानीपुर दोनों सीटें राजनीतिक तौर पर बेहद अहम हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या शोभन देव ममता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे?

उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'मैं वादों पर विश्वास रखती हूं. आज मैं आधिकारिक रूप से घोषणा करना चाहूंगी कि मैं नंदीग्राम से चुनाव लड़ने जा रही हूं. वास्तव में देखा जाए तो सभी सीटों से मैं चुनाव लड़ रही हूं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उम्मीदवार कौन हैं. इस बार मैं भबानीपुर से चुनाव नहीं लड़ रही हूं. यहां से शोभनदेव चट्टोपाध्याय को मैदान में उतारने का फैसला लिया गया है.'



'दीदी का शुक्रिया'
कहा जा रहा है कि ममता ने खुद शोभनदेव को इस सीट से चुनाव लड़ने को कहा है. शोभनदेव टीएमसी के एक ताकवर नेता हैं. न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, 'दीदी ने मुझे ये सीट दी है. आज मुझे खासा गर्व महसूस हो रहा है. उन्हें लगा होगा कि उनके न रहते हुए यहां से मैं पार्टी के लिए सीट बरकरार रख सकता हूं. मैं जीत के लिए पूरी ताकत झौंक दूंगा. ये मेरे लिए सम्मान की बात है.'

दांव पर शोभनदेव की साख
शोभनदेव चट्टोपाध्याय को पहली बार 1998 में TMC विधायक के रूप में चुना गया था. वे भारतीय राष्ट्रीय तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTTUC) के संस्थापक अध्यक्ष थे. ये TMC की श्रमिक शाखा है. इसके अलावा वे 2011 से 2016 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य सचेतक थे. 27 मई, 2016 को उन्होंने ममता के मंत्रिमंडल में राज्य के ऊर्जा और गैर पारंपरिक ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला.

शोभनदेव का राजनीति में लंबा अनुभव
कई लोगों ये नहीं जानते होंगे कि चट्टोपाध्याय अपने कॉलेज के दिनों में बॉक्सिंग करते थे. वे उन दिनों टीवी पर कोई भी मैच देखना नहीं छोड़ते थे. आज भी वे अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद कोई भी बॉक्सिंग का मैच मिस नहीं करते हैं. पेशे से वकील चट्टोपाध्यायकोलकाता ऑटो रिक्शा संचालक संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. 1991 और 1996 में, उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बरूईपुर सीट पर जीत हासिल की थी. 2001 और 2006 में, उन्होंने टीएमसी के टिकट पर दक्षिण कोलकाता में राशबिहारी सीट जीती. वे 2016 में उसी सीट से दोबारा चुने गए थे.

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भबानीपुर का राजनीतिक इतिहास
भबानीपुर दक्षिण कोलकाता में स्थित है और ये सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी. ममता बनर्जी उन दिनों कांग्रेस के साथ ही थी. बाद में ये बनर्जी का गढ़ बन गया क्योंकि उनका कालीघाट घर इसी निर्वाचन क्षेत्र में स्थित है. साल 2011 में सुब्रत बख्शी ने इस सीट को ममता के लिए खाली किया था. इसके बाद ममता बनर्जी को भबानीपुर सीट से उपचुनाव में जीत मिली थी. हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान राजनीतिक स्थिति बदल गई जब भाजपा के पास विधानसभा क्षेत्र में 180 से अधिक वोटों की बढ़त थी.

कौन मारेगा बाज़ी?
साल 2015 के कोलकाता नगर निगम चुनावों में टीएमसी की भबानीपुर के दो वार्डों में हार हुई थी. भबानीपुर विधानसभा क्षेत्र में बंगाली मतदाताओं का वर्चस्व है, लेकिन सिखों और गुजराती मतदाताओं की महत्वपूर्ण संख्या यहां रहती है. इसलिए यहां और नंदीग्राम में टीएससी और बीजेपी के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है.
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