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West Bengal Elections: बंगाल चुनाव की तैयारी में AIMIM, मुस्लिम बहुल 90 सीटों पर ओवैसी बढ़ाएंगे ममता की मुसीबत!

AIMIM के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी

ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी टीएमसी को 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 98 सीटों पर बढ़त मिली थी और उसे करीब 47 प्रतिशत वोट मिले थे. इन 130 में से 74 सीटों पर मुस्लिम आबादी (Muslim Population) 40 से 90 प्रतिशत तक है. इन 74 में से 60 पर तृणमूल ने 48 प्रतिशत वोट पाकर बढ़त हासिल की. एआईएमआईएम इन्हीं सीटों पर वोट बंटवारा कर ममता बनर्जी की राह मुश्किल कर सकती है.

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    कोलकाता. पश्चिम बंगाल में अगले साल अप्रैल-मई में विधानसभा (West Bengal Assembly Elections 2021) के चुनाव होने हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) ने पहली बार बंगाल में चुनाव लड़ने का फैसला किया है. AIMIM के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने इसे लेकर मीटिंग की. बंगाल में 294 विधानसभा सीटों में से 90 सीटें मुस्लिम बहुल हैं. इन सीटों पर जीत-हार मुस्लिम मतदाता करते हैं.

    माना जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और कुछ अन्य सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 294 विधानसभा सीटों वाले राज्य में मुस्लिम समुदाय 120 सीटों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. 27 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में AIMIM बड़ा दांव खेलना चाहती है. AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार ने मीटिंग के बाद न्यूज़ एजेंसी PTI को बताया कि पार्टी ने बंगाल के 23 में से 22 जिलों में अपनी यूनिट स्थापित कर ली है. बताया जा रहा है कि ओवैसी जल्द ही कुछ सीटों पर जनसभा कर चुनावी बिगुल फूकेंगे.

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    CAA और NRC है बड़ा मुद्दा

    बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) एक बड़ा मुद्दा है जो मुसलमानों को एकजुट कर सकता है. राज्य के माल्दा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना जैसे जिले मुस्लिम बहुल हैं. इन पांचों जिलों में 60 से ज्यादा विधानसभा सीटे हैं. दक्षिण 24 परगना को छोड़कर बाकी सभी जिले बिहार की सीमा पर हैं. बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को पांच सीटें मिलने का संदेश इन जिलों में आसानी से पहुंच गया होगा.

    अभी टीएमसी है राज्य की सबसे बड़ी पार्टी
    बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस अभी सबसे बड़ी पार्टी है. इसके बाद कांग्रेस का नंबर आता है. बिहार में मुस्लिम मतदाताओं के बीच AIMIM का उभार ममता बनर्जी के चिंता का सबब है. बंगाल में तीन जिले ऐसे हैं जहां मुस्लिम वोटर 50 फीसदी से भी अधिक है, जबकि कई जिलों में 25 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है.

    टीएमसी के शासन में अब तक चुने गए 59 मुस्लिम विधायक
    टीएमसी के शासन में 2011 और 2016 में 59 मुस्लिम विधायक चुने गए. 2006 में जब लेफ्ट फ्रंट ने एकतरफा चुनाव जीता था तब 46 मुस्लिम चुनकर विधानसभा पहुंचे थे. टीएमसी को 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 98 सीटों पर बढ़त मिली थी और उसे करीब 47 प्रतिशत वोट मिले थे। इन 130 में से 74 सीटों पर मुस्लिम आबादी 40 से 90 प्रतिशत तक है. इन 74 में से 60 पर तृणमूल ने 48 प्रतिशत वोट पाकर बढ़त हासिल की. एआईएमआईएम इन्हीं सीटों पर वोट बंटवारा कर ममता बनर्जी की राह मुश्किल कर सकती है.

    बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती
    लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के बाद बीजेपी के हौंसले बुलंद है. चुनाव में बीजेपी ने ममता के गढ़ में बढ़ी सेंध लगाते हुए 18 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. बंगाल में इस प्रचंड जीत के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या 2021 में बंगाल में बीजेपी अपनी सरकार बना सकती है?

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    2016 के विधानसभा चुनाव में किसे मिली थी कितनी सीटें?

    2016 में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 211, लेफ्ट को 33, कांग्रेस को 44 और बीजेपी को मात्र 3 सीटें मिली थीं. वोट शेयर में भी बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है. टीएमसी ने जहां 43.3 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया वहीं बीजेपी को 40.3 प्रतिशत वोट मिले. बीजेपी को कुल 2 करोड़ 30 लाख 28 हजार 343 वोट मिले जबकि टीएमसी को 2 करोड़ 47 लाख 56 हजार 985 मत मिले हैं.
    Published by:Anjali Karmakar
    First published: