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शुभेंदु अधिकारी बोले- ममता बनर्जी बंगाल की बेटी नहीं, घुसपैठियों की मौसी और रोहिंग्याओं की चाची हैं

शुभेंदु अधिकारी हाल ही में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं (ANI)

शुभेंदु अधिकारी हाल ही में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं (ANI)

West Bengal Assembly Elections 2021: बंगाल चुनाव में मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट अब बेहद अहम हो गई है. ये सीट हाल ही में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी के पाले में रही है. शुभेंदु ममता सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री भी रह चुके हैं

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West Bengal Assembly Elections 2021: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव प्रचार के साथ ही सियासी बयानबाजी का दौर जारी है. नंदीग्राम विधानसभा सीट (Nandigram Assembly Seat) से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के खिलाफ चुनाव लड़ रहे शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने उनपर बड़ा बयान दिया है. अधिकारी ने कहा, 'ममता बनर्जी बंगाल की बेटी नहीं, बल्कि घुसपैठियों की मौसी और रोहिंग्याओं की चाची हैं.' शुभेंदु अधिकारी हाल ही में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं.

शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ये बयान दिया. उन्होंने कहा,'ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस अब एक राजनीतिक पार्टी नहीं है. यह एक निजी लिमिटेड कंपनी है और कंपनी की अध्यक्ष का नाम ममता बनर्जी है. वहीं, प्रबंध निदेशक उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी हैं.’

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बंगाल में किस चरण में कितनी सीटों पर चुनाव?
पहले चरण में पश्चिम बंगाल की 294 में से 30 सीटों पर 27 मार्च को वोट डाले जाएंगे. वहीं, दूसरे चरण में 30 सीटों पर एक अप्रैल को, तीसरे चरण में 31 सीटों पर 6 अप्रैल को, चौथे चरण में 44 सीटों पर 10 अप्रैल को, पांचवे चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को, छठे चरण में 43 सीटों पर 22 अप्रैल को, सातवें चरण में 36 सीटों पर 26 अप्रैल को और आठवें चरण में 35 सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. नतीजों की घोषणा दो मई को होगी.
नंदीग्राम कैसे बना बंगाल चुनाव का केंद्र
बंगाल चुनाव में मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट अब बेहद अहम हो गई है. ये सीट हाल ही में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी के पाले में रही है. शुभेंदु ममता सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री भी रह चुके हैं. ममता बनर्जी के यहां से ऐलान करने के बाद शुभेंदु ने कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री यहां से 50 हजार मतों से हारेंगी या वे राजनीति छोड़ देंगे.

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कहा जाता है कि नंदीग्राम ने ममता को बंगाल की सत्ता दिलाने में नंदीग्राम का अहम रोल है. लेकिन यहां हुए भूमि अधिग्रहण आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी ने बड़ी भूमिका निभाई थी. बीजेपी में शामिल होने के बाद हो सकता है कि अधिकारी नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ें. हालांकि, तमाम तथ्यों के अलावा सीएम ममता की पारंपरिक भवानीपुर सीट पर भी बीजेपी की नजरें हैं. भगवा दल के कई दिग्गज यहां अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं.

नंदीग्राम सीट का जाति समीकरण
नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में आता है. नंदीग्राम में मुस्लिम वोटर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. 2011 का सेंसस बताता है कि नंदीग्राम कस्बे के ब्लॉक-1 में 34, ब्लॉक-2 में 12.1 और ब्लॉक-3 में 40.3 प्रतिशत थे. हालांकि, 10 साल में इन आंकड़ों में इजाफा हुआ होगा. वहीं, पिछले चुनाव भी क्षेत्र में मुस्लिम भूमिका को काफी बड़ा बताते हैं. 2011 विधानसभा चुनावों में टीएमसी के मुस्लिम उम्मीदवार की जीत हुई थी. जबकि 2016 में टीएमसी का वोट प्रतिशत बढ़ गया था. उस समय शुभेंदु अधिकारी यहां से चुनाव लड़ रहे थे.
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