बंगाल चुनाव में चीनी भारतीय वोटर्स को लुभाने के लिए TMC ने बनाई ये रणनीति

चाइना टाउन में कभी 20,000 चीनी मूल के भारतीय नागरिक रहते थे, लेकिन अब इनकी आबादी लगभग 2,000 ही रह गई है. (PTI)

चाइना टाउन में कभी 20,000 चीनी मूल के भारतीय नागरिक रहते थे, लेकिन अब इनकी आबादी लगभग 2,000 ही रह गई है. (PTI)

West Bengal Assembly Elections 2021: यह इलाका चाइना टाउन (China Town) के नाम से जाना जाता है. यहां लगभग 2 हजार चीनी भारतीय वोटर हैं. टीएमसी समर्थकों का कहना है कि इस समुदाय के वोटरों को हिंदी और बंगाली भाषा कामचलाऊ आती है. इसलिए पार्टी उनकी मातृभाषा में चुनाव प्रचार कर रहे हैं, ताकि वे आसानी से समझ सके.

  • News18India
  • Last Updated: March 23, 2021, 2:51 PM IST
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2021) शुरू हो रहा है. लेकिन, कोलकाता के पूर्वी हिस्से में चुनाव प्रचार चीन की भाषा में चल रहा है. सुनने में अजीब लगे, लेकिन ये सच है. पूर्वी कोलकाता के दो से तीन विधानसभा क्षेत्रों में चीनी मूल के लगभग 2000 वोटरों को रिझाने के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) वॉल पेंटिंग के जरिए चीनी भाषा में इश्तेहार दे रही है. इसमें टीएमसी के पक्ष में चीनी मूल के भारतीय मतदाताओं से मतदान करने की अपील की जा रही है.

यह इलाका चाइना टाउन (China Town) के नाम से जाना जाता है. यहां लगभग 2 हजार चीनी भारतीय वोटर (C हैं. टीएमसी समर्थकों का कहना है कि इस समुदाय के वोटरों को हिंदी और बंगाली भाषा कामचलाऊ आती है. इसलिए पार्टी उनकी मातृभाषा में चुनाव प्रचार कर रहे हैं, ताकि वे आसानी से समझ सके.

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पूर्वी कोलकाता के इंटाली विधानसभा और कस्बा विधानसभा जैसी सीटों पर चीनी मूल के वोटर हैं. इसी इलाके में चीनी भाषा में प्रचार किया जारहा है. पार्टी के होर्डिंग्स चीनी भाषा में तैयार किए गए हैं. पाम्पलेट भी चीनी भाषा में छपवाए गए हैं. इंटाली से स्वर्ण कमल साहा मौजूदा विधायक हैं. टीएमसी समर्थकों के मुताबिक ये इश्तेहार उन्होंने लिखवाया है.
इस बारे में इंटाली से बीजेपी की प्रत्याशी प्रियंका टिबड़ेवाल कहती हैं, 'मैं अलग भाषा जाति के नाम पर कभी वोट नहीं मांगूंगी. ये टीएमसी वाले यही बांटने का काम करते हैं.'

इस इलाके में कई चीनी रेस्टोरेंट हैं, जहां पूरे कोलकाता से लोग चीनी डिशेज खाने आते हैं. हालांकि, इनकी संख्या दिन-ब-दिन कम होती जा रही है. एक चीनी रेस्टोरेंट में खाना पकाने वाली महिला कहती हैं, 'यहां काम नहीं है. इसलिए लोग बाहर चले गए.'

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रिपोर्ट के मुताबिक, चाइना टाउन में कभी 20,000 चीनी मूल के भारतीय नागरिक रहते थे, लेकिन अब इनकी आबादी लगभग 2,000 ही रह गई है. 1951 में इनकी संख्या लगभग 5700 थी, जो अब 2 हज़ार के करीब ही बची है. कोलकाता का यह चीनी भारतीय समुदाय पारंपरिक व्यवसाय टैनिंग के साथ-साथ चीनी रेस्टोरेंट में भी लंबे समय से काम कर रहा है.

कहा जाता है कि 1780 में योंग अटच्यू नाम के एक चीनी नागरिक बंगाल आए थे. यहां आकर उन्‍होंने गन्ने की खेती की और चीनी मिल लगाया. इसके बाद 18वीं शताब्दी के अंत में चीनी मजदूरों ने भारत आना शुरू कर दिया. शुरुआत में चीन से आए ये मजदूर केवल चमड़े का काम करते थे. बाद में उन्‍होंने रेस्टोरेंट और कपड़ों समेत कई क्षेत्रों में काम करना शुरू कर दिया.

राजनीतिक नजरिए से देखें, तो चीन और पश्चिम बंगाल के बीच लेफ्ट की वजह से कई समानता रही है. पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक वामपंथियों की सरकार रही है. वाममोर्चा का संबंध अक्‍सर चीन से जोड़ा जाता रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 1960 और 1970 के समय में कोलकाता की दीवारों पर 'चीन का चेयरमैन ही हमारा चेयरमैन है' जैसे नारे दिखाए देते थे, जिन्हें माओवादियों ने लिखा होता था. हालांकि, यह नारे बंगाली में लिखे होते थे.
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