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West Bengal Elections 2021: जंगलमहल में पूर्व नक्सली नेता के सहारे बीजेपी के कमल को क्या इस बार मुरझा पाएगी टीएमसी?

पूर्व नक्सली नेता छत्रधर महतो

पूर्व नक्सली नेता छत्रधर महतो

West Bengal Elections 2021 : पूर्व नक्सली नेता छत्रधर महतो (Chhatradhar Mahato) कभी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का खास चेहरा रहे किशनजी के करीबी हुआ करते थे. वह अब सत्तारूढ़ पार्टी की कोर स्टेट कमेटी के सदस्य के रूप में जंगलमहल क्षेत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के प्रमुख कार्यकर्ता हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 10:36 AM IST
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(अमन शर्मा)

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम स्थित तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लोकल दफ्तर में पूर्व नक्सली नेता छत्रधर महतो (Chhatradhar Mahato) एके -47 राइफल थामे अपने सुरक्षा गार्ड्स के साथ लोगों का स्वागत करते हैं. पूर्व नक्सली नेता कभी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का खास चेहरा रहे किशनजी के करीबी हुआ करते थे. 2011 में आर्मी ने एक ऑपरेशन में उन्हें मार गिराया था. तब से अब तक महतो ने एक लंबा सफर तय किया है. वह अब सत्तारूढ़ पार्टी की कोर स्टेट कमेटी के सदस्य के रूप में जंगलमहल क्षेत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के प्रमुख कार्यकर्ता हैं.

News18 से बात करते हुए महतो कहते हैं, 'दीदी इस इलाके को दोबारा जीतेंगी. लोग उनके साथ है और बीजेपी के झूठे वादों को अच्छी तरह से समझते हैं. मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं, लेकिन मैं आपको बता दूं कि आदिवासी लोग नहीं बंटने वाले. बीजेपी तो यही चाहती है. बीजेपी को इसी वजह से झारखंड में 2019 के चुनाव में आदिवासियों ने सत्ता से बाहर कर दिया था.'



2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने जंगलमहल क्षेत्र को नक्सलियों की चपेट में आने से बचाया था. एक दशक बाद उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है. बता दें कि बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में बड़ी मौजूदगी दर्ज की थी. तब पार्टी ने जंगलमहल में सभी चार सीटें झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पुरुलिया और बांकुरा सीट जीत ली थी. इन चार जिलों में 44 विधानसभा सीटें आती हैं.

बंगाल में भगवा लहराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिला मुख्यालय पुरुलिया और बांकुड़ा, खड़गपुर (पश्चिम मेदिनीपुर) में रैलियां की हैं. उन्होंने कथित रूप से माओवादियों का समर्थन करने के लिए ममता बनर्जी पर निशाना साधा है. इसे कई लोग महतो की पसंद के संदर्भ में देखते हैं.

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टीएमसी के साथ महतो की राजनीतिक पारी पिछले साल शुरू हुई थी. खुद ममता दीदी ने महतो को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी. इस बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत महतो के खिलाफ पहले से दर्ज मामले में जांच के लिए फिर से विचार कर रही है. कई लोग छत्रधर महतो को 2008 में लालगढ़ आंदोलन के नेता के रूप में देखते हैं, जिन्होंने जेल में एक दशक से अधिक समय काटा. इसे जंगलमहल में हाल में हुए बीजेपी की रैलियों में अपेक्षाकृत कम भीड़ के रूप में भी देखा जाना चाहिए.

मुद्दे
जंगलमहल में बीजेपी को घेरने की एक बड़ी वजह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का यहां की जनजातीय आबादी पर प्रभाव है. इलाके में बीजेपी अपने 2019 के प्रदर्शन को दोहराने की इच्छुक है. रैलियों में बीजेपी नेता जंगलमहल की बुनियादी सुविधाओं की बात करते हैं. बीजेपी ने कहा कि अगर जीत मिली, तो यहां पेयजल समस्या का समाधान करेगी, जो इस पिछड़े क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा है. बीजेपी अपनी महत्वाकांक्षी स्कीम 'हर घर जल योजना' के माध्यम से यहां वोट हासिल करना चाहती है. बीजेपी इसके साथ ही टीएमसी के सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत नौकरियों के आवंटन में अनियमितता जैसे मुद्दों का हवाला भी दे रही है.

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को झाड़ग्राम के भेलपहाड़ी में एक रैली में आरक्षित समुदायों के लिए बड़ा ऐलान किया. मुंडा ने कहा कि इस समुदाय की हर लड़की के लिए 3.72 लाख रुपये का लाभ दिया जाएगा. बीजेपी के घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र है. बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में सभी अनुसूचित जनजाति बहुल ब्लॉकों में मनरेगा के तहत 200 दिनों के रोजगार का भी वादा किया है.


इस बीच टीएमसी भी इस क्षेत्र में फिर से अपनी पैठ बनाने की पुरजोर कोशिश कर रही है. टीएमसी ने 2016 के विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र की 44 सीटों में से 37 सीटें जीती थी. तब झाड़ग्राम पश्चिम मेदिनीपुर जिले का एक हिस्सा था.

2019 को आम चुनाव में आदिवासी लोगों को बीजेपी द्वारा गुमराह किया गया था, लेकिन वे अब बीजेपी की 'हिंदुत्व की राजनीति' को समझते हैं. इससे अनुसूचित जाति (अनुसूचित जाति) / एसटी समुदाय, बीरबा हांसदा, टीएचसी उम्मीदवारों को फायदा नहीं पहुंचाता है. संथाली सिनेमा के अभिनेता हांसदा भी केंद्र की बीजेपी सरकार पर इस मुद्दे को लेकर हमलावर हैं.

मोदी फैक्टर
हालांकि, बीजेपी रविवार को बांकुड़ा में आयोजित पीएम मोदी की विशाल रैली में भारी भीड़ की उम्मीद करती है. इसके साथ ही पुरुलिया में पहले से ही ऐसा प्रचारित किया जा रहा है कि यहां बीजेपी को अच्छा खासा समर्थन मिल रहा है. एक बीजेपी नेता कहते हैं, 'बांकुड़ा में 3-4 लाख से अधिक लोग पीएम की बात सुनने के लिए आए थे. ऐसे में लोगों की भावना स्पष्ट है.'

हालांकि, टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने बीजेपी नेता के इस तर्क को खारिज करते हैं. टीएमसी नेता के मुताबिक, खड़गपुर में पीएम की रैली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दिलीप घोष के निर्वाचन क्षेत्र होने के बावजूद वैसी नहीं थी. उन्होंने कहा, 'कोलकाता में सत्ता में आने के लिए बीजेपी को फेज 1 (बंगाल में 8 फेज में मतदान होने हैं) में जंगलमहल को कब्जे में करने की जरूरत है. अगर ऐसा नहीं होता है और तृणमूल इस क्षेत्र में सीटें जीतती है, जैसा कि हम उम्मीद करते हैं, तो बीजेपी के लिए कोलकाता अभी बहुत दूर है.'

बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में, पश्चिम बंगाल और जंगलमहल के कई बड़े वादे किए हैं. जैसे कि जंगलमहल विकास बोर्ड की स्थापना और भ्रष्टाचार या भेदभाव के बिना एसटी प्रमाणपत्रों का निर्बाध वितरण सुनिश्चित करना; इसने जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के 15 दिनों के भीतर नवजात एसटी बच्चों को ऐसे प्रमाणपत्र प्रदान करने का संकल्प भी लिया गया है.


बीजेपी ने झाड़ग्राम में पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने और 49 वन उपज के लिए न्यूनतम वन उपज (एमएफपी) मूल्य को लागू करने का भी वादा किया है. पार्टी के घोषणा पत्र में कहा गया है कि यह स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी आइकन के योगदान को याद करने के लिए झाड़ग्राम में एक आदिवासी स्मृति संग्राम खोलेगा. साथ ही पारंपरिक रोजगार गतिविधियों में आदिवासी युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एक वन धन समृद्धि योजना शुरू करने का वादा किया गया है.

इसके अलावा, एसटी-बहुल जिलों के हर ब्लॉक में एक एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल खोलने का भी वादा है. एसटी छात्रों के लिए शिक्षा और जीवन यापन के लिए 50% वित्तीय सहायता देने की भी बात कही गई है.

इन सबके बीच टीएमसी को उम्मीद है कि आदिवासी लोग जंगलमहल में ममता बनर्जी पर दोबारा भरोसा दिखाएंगे. साथ ही लाल (वामपंथी राजनीति) से भगवा (2019 में इस इलाके में बीजेपी की जीत) में बदलाव स्थायी नहीं है. अगर ऐसा है तो टीएमसी का मानना ​​है कि भगवा पार्टी के लिए कोलकाता का सफर मुश्किल हो जाएगा.
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