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West Bengal Bypoll: 'मिनी भारत' कहलाता है कोलकाता का भवानीपुर, जहां दांव पर लगी है ममता की प्रतिष्ठा

West Bengal Bypoll: 'मिनी भारत' कहलाता है कोलकाता का भवानीपुर, जहां दांव पर लगी है ममता की प्रतिष्ठा

 भबानीपुर की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी गैर-बंगाली है, जो इस निर्वाचन क्षेत्र को सबसे अलग बनाती है.

भबानीपुर की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी गैर-बंगाली है, जो इस निर्वाचन क्षेत्र को सबसे अलग बनाती है.

West bengal bypoll: ममता बनर्जी का जन्म भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में पड़ने वाले कालीघाट में हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित घर में हुआ था और वो यहां से वोटर भी हैं. भवानीपुर की गलियों में घूमने पर आप लोगों से ममता की कई कहानियां सुन सकते हैं.

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  • News18Hindi
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    (कमालिका सेनगुप्ता)

    कोलकाता. आप कोलकाता में जैसे ही हाजरा रोड की तरफ कालीघाट की ओर मुड़ेंगे वहीं से भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र (Bhabanipur Assembly Constituency) शुरू हो जाता है. एक ऐसी सीट जिस पर इन दिनों हर किसी की निगाहें टिकी हैं. 30 सितंबर को यहां उपचुनाव (West Bengal bypoll) होंगे. इस हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र से ही ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) की किस्मत का फैसला होगा. दरअसल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के लिए ममता को ये सीट हर हाल में जीतना होगा.

    राजनेता अक्सर इस निर्वाचन क्षेत्र को ‘मिनी भारत’ कहते हैं. गुजराती से लेकर पंजाबी, बंगाली से लेकर सिंधी, देश के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग यहां रहते हैं. भबानीपुर की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी गैर-बंगाली है, जो इस निर्वाचन क्षेत्र को सबसे अलग बनाती है. ममता का जन्म कालीघाट में हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित घर में हुआ था और वो यहां से वोटर भी हैं. भवानीपुर की गलियों में घूमने पर आप लोगों से ममता की कई कहानियां सुन सकते हैं. ये वो लोग है जिन्होंने ममता को बड़े होते हुए देखा. इन सबने यहां उन्हें खेलते हुए देखा. जोगमाया देवी कॉलेज से छात्र राजनीति में उन्होंने कदम रखा और फिर एक दशक तक विधायक के रूप में इस क्षेत्र के लोगों की सेवा की.

    ममता हर किसी के साथ
    भवानीपुर के एक वार्ड के पार्षद संदीप बख्शी ने मुख्यमंत्री के बारे में बताया, ‘हमारी पिछली पीढ़ी ने उन्हें यहां खेलते हुए देखा है… हमने दीदी को उनके छात्र राजनीति के दिनों में देखा है. वह हमारी घोर मेये (हमारे घर की बेटी) है.’ उन्होंने ये भी उल्लेख किया है कि कैसे भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में गुजराती से लेकर उड़िया आबादी को मुख्यमंत्री ने हमेशा साथ लेकर चला. बख्शी ने कहा, ‘वार्ड 70 में उड़िया पट्टी है और ममता भी वहां जाती हैं.’

    ममता सबके साथ
    शोभनदेव चटर्जी ने 2021 में भवानीपुर सीट से 57 प्रतिशत वोटों के साथ जीत हासिल की. इसके बाद उन्होंने ममता के यहां से चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया. अनुभवी टीएमसी नेता और ममता के करीबी सहयोगी ने कहा कि भबानीपुर “मिनी इंडिया” है क्योंकि यहां ‘विविधता में एकता’ है. चटर्जी ने कहा, ‘हम इसका आनंद लेते हैं क्योंकि यहां हर वार्ड की अलग मांग है. हमारे निर्वाचन क्षेत्र में पार्क स्ट्रीट का एक हिस्सा और दूसरे वार्ड में गुजराती आबादी है.’

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    भवानीपुर में ममता की ताकत
    ममता 2011 के बाद से दो बार भवानीपुर से चुनाव लड़ चुकी हैं. साल 2011 में उन्होंने विधानसभा का उपचुनाव लड़ा था. दरअसल तब उन्होंने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था, क्योंकि वो पार्टी के प्रचार अभियान की देखरेख में व्यस्त थीं. 2016 के चुनाव में ममता को लगभग 48 प्रतिशत वोट मिले थे. इससे पहले साल 2011 में उन्हें यहां 77.46 प्रतिशत वोट मिले थे.


    जीत की उम्मीद

    2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े तृणमूल कांग्रेस के लिए इतने अच्छे नहीं थे. पार्टी ने इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3,000 मतों के अंतर से लीड हासिल की थी. रासबिहारी क्षेत्र में 5,000 मतों से पीछे चल रही थी. भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा, ‘ये उनका घरेलू मैदान है और क्योंकि उन्होंने यहां प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की है. लड़ाई अच्छी होगी.’

    Tags: Mamta Banarjee, West Bengal Bypolls

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