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West Bengal Election 2021: लेफ्ट और कांग्रेस नेताओं की तारीफों के पुल क्यों बांध रहे हैं शुभेंदू अधिकारी?

BJP नेता शुभेंदू अधिकारी की फाइल फोटो
BJP नेता शुभेंदू अधिकारी की फाइल फोटो

पश्चिम बंगाल (West Bengal Election 2021) में इस साल चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले कई नेता एक दल से दूसरे दल में जा रहे हैं. सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 30, 2021, 12:35 PM IST
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सुजीत नाथ

कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal Election 2021) में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं का दलबदल जोरों पर है. सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो चुके हैं. इनमें से एक हैं शुभेंदू अधिकारी (Suvendu Adhikari). शुभेंदू ने हाल ही में एक रैली के दौरान वामदल और कांग्रेस के कुछ नेताओं की प्रशंसा की. हुगली जिले के चंदननगर में 20 जनवरी को अधिकारी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता बुद्धदेव भट्टाचार्जी की प्रशंसा की, जो वहां मौजूद लोगों के लिए काफी अचरज भरा था.

इसके बाद 25 जनवरी को पूर्वी मिदनापुर के तमलुक में एक सार्वजनिक रैली में, भारतीय जनता पार्टी के नेता ने सीपीआई (एम) के बड़े नामों जैसे कि प्रोमोद दासगुप्ता, बिनॉय चौधरी, गीता मुखर्जी, बिस्वनाथ मुखर्जी और सुकुमार सेनगुप्ता के बारे में अपनी राय दी. ऐसे में यह सवाल उठता है कि टीएमसी से बीजेपी में गए शुभेंदू आखिर वामदल और कांग्रेस के नेताओं की प्रशंसा क्यों कर रहे हैं?



शुभेंदू ने कहा कि 'मैं वाम मोर्चा की राजनीति के खिलाफ कभी नहीं था. बुद्धदेव भट्टाचार्जी एक अच्छे इंसान थे. मैं लक्ष्मण सेठ सरीखे मार्क्सवादी नेता और गुंडा संस्कृति के खिलाफ था.' शुभेंदू यहीं नहीं रुके. वह माकपा नेताओं बिमान बोस, बुद्धदेव और कांग्रेस की बंगाल इकाई के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की प्रशंसा करते रहे.
लेफ्ट और कांग्रेस के नेताओं की आलोचना करने से बचते रहे शुभेंदू
भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदू लेफ्ट और कांग्रेस के नेताओं की आलोचना करने से बचते रहे हैं. कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदू इस कोशिश में लगे हुए हैं कि साल 2016 और 2019 में लेफ्ट और कांग्रेस के 33 फीसदी वोट जो बीजेपी के पक्ष में आए थे, वह इस चुनाव में भी बरकरार रहे. इन सालों में टीएमसी के वोट शेयर में 3 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई ऐसे में भाजपा के प्रति 33 प्रतिशत वाम और कांग्रेस के वोट वास्तव में टीएमसी विरोधी वोट थे.

माकपा नेताओं को लगता है कि इसी वोट शेयर को भाजपा में बनाए रखने और मतदाताओं की वापसी रोकने के लिए शुभेंदू मतदाताओं के इस वर्ग का विश्वास जीतने के लिए सार्वजनिक रैलियों में वाम मोर्चा नेताओं की प्रशंसा कर रहे हैं.

माकपा नेता अमिया पात्रा ने कहा, 'अधिकारी के बयानों पर ज्यादा चर्चा हो सकती है लेकिन हम उनके बयानों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे हैं. वह शख्स जो खुद के बलिदान करने की बात करता है वह टीएमसी में अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े  पदों पर रहा. उनके परिवार के सदस्य कई पदों (जिसमें सांसद, विधायक, सहकारी बैंकों के अध्यक्ष और विभिन्न बोर्ड और संगठन शामिल हैं) पर रहे. वाम दलों और कांग्रेस के नेताओं के लिए उनकी अचानक प्रशंसा कुछ और नहीं बल्कि शुद्ध राजनीति है जो इन दोनों दलों के वोटों के रिवर्स माइग्रेशन को रोकने की कोशिश है लेकिन मुझे लगता है कि वह सफल नहीं हो पाएंगे क्योंकि बंगाल में कई जिलों से रिवर्स माइग्रेशन शुरू हो चुका है.'

33% वोट शेयर हासिल करने की मेहनत कर रही TMC
इसी तरह टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस 33 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. साल 2016 के विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 10.2 प्रतिशत था और 2019 के लोकसभा चुनावों में यह 40.3 प्रतिशत हो गया. पिछले तीन सालों में भाजपा ने बंगाल में धर्म आधारित राजनीति करने में कामयाबी हासिल की है. यह बीजेपी के वोट शेयर में बंगाल में वृद्धि के साथ स्पष्ट हुआ है.

गौरतलब है कि साल 2011 के विधानसभा चुनावों से लेकर साल 2016 तक, वाम मोर्चे के वोट शेयर में 9.88% की गिरावट देखी और साल 2014 के लोकसभा चुनावों से 2019 उसके वोट शेयर में लगभग 16% की कमी आई. हालांकि साल 2011 से साल 2016 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 8.91% से बढ़कर 12.3% हो गया. लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनावों में यह गिरकर 9.6% हो गया, जबकि साल 2019 के आम चुनावों में पार्टी केवल 5 फीसदी वोट पाने में सफल रही.

साल 2011 के विधानसभा चुनावों में, तृणमूल का वोट शेयर 39 % था, जो 2016 में बढ़कर 39.56 % हो गया. इसी तरह, 2014 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी का वोट शेयर 39.03 % था, जो  साल 2019 में बढ़कर 43.3 % हो गया.
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