बंगाल चुनाव नतीजे : अब अजेय नहीं दिख रहीं ममता बनर्जी! अपने जीवन के सबसे कठिन चुनाव का किया सामना

पश्चिम बंगाल के 2021 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को बीजेपी से कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है. (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल के 2021 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को बीजेपी से कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है. (फाइल फोटो)

West Bengal Assembly Election Results: साल 2016 में बंगाल की 'दीदी' ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस ने 294 सीटों में से 211 सीटें जीतीं और विपक्ष का सफाया कर दिया. हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी से कड़ी टक्कर मिलती दिखी.

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कोलकाता. ममता बनर्जी  (Mamata Banerjee) ने इस बार बंगाल (West Bengal) में सबसे कड़ी लड़ाई लड़ी है. खुद को स्ट्रीटफाइटर कहने वाली ममता अब अजेय नहीं दिख रहीं है. इस बार ममता को भाजपा से कड़ा मुकाबला मिला. साल 2016 में बंगाल की 'दीदी' की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस ने 294 सीटों में से 211 सीटें जीतीं और विपक्ष का सफाया किया. वह साल 2011 की तुलना में और भी अधिक बहुमत के साथ फिर से चुनी गईं. इस दौरान उन्होंने 'परिवर्तन' का नारा दिया था.

नारदा घोटाले में कथित तौर पर कई पार्टी नेताओं के शामिल होने बावजू ममता को साल 2016 में भी लैंडस्लाइड विक्ट्री मिली.  इस बार भाजपा ने 'परिवर्तन' का नारा दिया है. भाजपा ने इस चुनाव में 'असोल परिवर्तन' का नारा दिया है.  पिछले एक साल में टीएमसी और ममता ने अपने कई करीबी सहयोगियों को खो दिया. अधिकतर बड़े नेता भाजपा में शामिल हो गए.

ममता का सबसे बड़ा नुकसान शुवेन्दु अधिकारी 

उनका सबसे बड़ा नुकसान शुवेन्दु अधिकारी हैं, जो अब ममता का सबसे बड़ा 'दुश्मन' है. दोनों नंदीग्राम में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार हैं. इसी जगह से दोनों ने 15 साल पहले एक साथ प्रचार किया था. भाजपा की चुनौती के बाद ममता ने कोलकाता में अपनी सुरक्षित सीट भवानीपुर को छोड़ कर और नंदीग्राम (Nandigram Results) से चुनाव लड़ने की घोषणा की. उनका यह फैसला कैसा था, इस बारे में तो परिणाम के बाद ही पता चल सकेगा.  हालांकि नंदीग्राम से चुनाव लड़ने के फैसले से यह संदेश गया कि ममता लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगी.
नंदीग्राम में कार की एक्सीडेंट की  घटना में सीएम को गंभीर चोट आई. इस घटना ने कई लोगों को अगस्त 1990 को याद दिलाया जब ममता बनर्जी पर कथित वामपंथी गुंडों ने हमला किया था. भाजपा, और कांग्रेस में से कई ने ममता बनर्जी के हमले के दावों पर सवाल उठाया है. घटना के बाद पूरे प्रचार अभियान में ममता व्हीलचेयर पर नजर आईं और यह चर्चा का केंद्र बना रहा.



ममता ने पहली बार साल 1984 में चुनाव लड़ा था. साल 1997 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और तृणमूल कांग्रेस कीस्थापना की. हालांकि उन्हें बंगाल की सत्ता तक पहुंचने में 14 साल लग गए.
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