अपना शहर चुनें

States

पश्चिम बंगाल चुनावः ओवैसी को मिल रहा समर्थन, मुस्लिम वोट में सेंधमारी से ममता परेशान

ममता बनर्जी की मांग को दलों ने खारिज कर दिया है. (Pic- ANI)
ममता बनर्जी की मांग को दलों ने खारिज कर दिया है. (Pic- ANI)

ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बिहार की तर्ज पर बंगाल में भी सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील की, लेकिन विपक्ष ने इसे खारिज कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 18, 2021, 5:24 PM IST
  • Share this:
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal Elections 2021) करीब आने के साथ ही कड़ाके की ठंड में भी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तपिश बढ़ गई है. टीएमसी (TMC) के अंदर मची भगदड़, मुसलमान सहित परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी और भाजपा की रणनीति को मात देने के लिए ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने बिहार की तर्ज पर बंगाल में भी सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील की, लेकिन विपक्ष ने इसे खारिज कर दिया. विपक्ष के दो टूक जवाब ने पिछले 10 वर्षों से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली ममता अब बंगाल के चुनावी मैदान में अकेली पड़ती नजर आ रही हैं.

असदुद्दीन ओवैसी भी ममता से झटकेंगे अल्पसंख्यकों का वोट
बिहार की जीत से उत्साहित एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की घोषणा कर ममता की जमीन पर अपना कब्जा जमाने की कोशिश शुरू कर दी है. उनको अपने समाज का भरपूर समर्थन भी मिल रहा है. इससे वे काफी उत्साहित हैं. उधर, ममता अपने परंपरागत वोटरों को गोलबंद करने का निरंतर प्रयास कर रही हैं, लेकिन उन्हें यहां पर वह समर्थन नहीं मिल पा रहा जो पिछले चुनाव में मिला करता था. मुस्लिम वोटों के बिखराव को लेकर वे चिंतित हैं, क्योंकि वे अच्छी तरह यह जानती हैं कि यह बिखराव उनका नुकसान करेगा और भाजपा को फायदा.


सिद्दीकुल्ला और अधीर की दोस्ती


परंपरागत वोटरों के रास्ता बदलने पर ममता के पुराने साथियों ने भी साथ छोड़ना शुरू कर दिया है. ममता सरकार के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी भी अपने नए घर में जाने की तैयारी मे हैं. सिद्दीकुल्ला चौधरी को ममता बनर्जी की शक्ति कहा जाता है. ममता कैबिनेट में वे कद्दावर अल्पसंख्यक चेहरा और ग्रंथागार मंत्री हैं. इसके साथ ही जमात-ए-उलेमा हिंद के बंगाल अध्यक्ष हैं. यह अल्पसंख्यकों का बड़ा संगठन है, जिसकी जड़ें पूरे देश में पसरी हुई हैं. जब भी सिद्दीकुल्ला चौधरी ने रैली की है तो उसमें लाखों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग राजधानी कोलकाता में जुटे हैं.

हाल के दिनों में उनकी कांग्रेस से दोस्ती की बड़ी चर्चा है. कुछ दिन पहले सिद्दीकुल्ला और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की तस्वीर भी सड़कों पर दिखी. इधर, वे कई बार कह चुके हैं कि तृणमूल के कुछ भ्रष्ट लोगों की सरपरस्ती में राज्य भर में बालू खनन का गोरख धंधा हो रहा है. इससे यह कयास लगाया जा रहा है कि सिद्दीकुल्ला शीघ्र ही कांग्रेस का हाथ पकड़ने वाले हैं. उनके कांग्रेस में जाने से ममता के पंरपरागत वोट पर यह दूसरा बड़ा चोट होगा. क्योंकि कांग्रेस का बंगाल में नहीं के बराबर जमीन है. लेकिन सिद्दीकुल्ला और अधीर चौधरी की जोड़ी कांग्रेस को बंगाल में अपने पांव पसारने का अवसर देगी या नहीं यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन इतना पक्का है कि ममता के वोट बैंक पर यह एक बड़ी चोट होगी.

4 जिले की 54 सीटों पर पड़ेगा असर
पश्चिम बंगाल के चार जिले मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और बीरभूम बिहार और झारखंड की सीमा से लगे हुए हैं. इसमें मुस्लिम आबादी 66.27 फीसदी है. इसी प्रकार मालदा, उत्तर दिनाजपुर और बीरभूम में क्रमशः 51.27 फीसदी, 49.92 फीसदी और 37.06 फीसदी मुसलमानों की आबादी है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 54 सीटें इन चार जिलों में हैं.मुर्शिदाबाद को छोड़कर अन्य तीन जिलों में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का अभी तक दबदबा है.

तृणमूल कांग्रेस की कोशिश यहां सभी सीटें जीतने की है. लेकिन सिद्दीकुल्ला और अधीर की दोस्ती और ओवैसी की इंट्री ने सारा समीकरण बिगाड़ कर रख दिया है. इस क्षेत्र में कांग्रेस के अधीर चौधरी का पहले से दबदबा है. सिद्दीकुल्ला से उनकी दोस्ती इन क्षेत्रों में कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा सकता है. मुर्शिदाबाद देश का सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला जिला है,यहां 47 लाख मुसलमान रहते हैं. जिले में 22 विधानसभा सीटें हैं, जो पश्चिम बंगाल के अन्य किसी भी जिले से ज्यादा है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी का यहां पर दबदबा है. वे करीब 35 वर्षों से यहां से लोकसभा के सदस्य चुनाते आ रहे हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज