Bengal Elections: ममता बनर्जी ने क्यों कहा- 'यूपी-बिहार के गुंडे... समझिए राजनीतिक मायने

ममता बनर्जी

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West Bengal Assembly Elections 2021: ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) चाहती हैैं कि बांग्ला अस्मिता के नाम पर लेफ्ट और कांग्रेस के कुछ वोट हासिल हो जाए तो उनका काम बन जाएगा'

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(नितेश सिन्हा)

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान चल रहा है. चार जिलों के 40 सीटों में ममता बनर्जी का चुनाव क्षेत्र नंदीग्राम भी शामिल है. नंदीग्राम ममता बनर्जी का कर्मक्षेत्र भी रहा है. बीजेपी और टीएमसी सियासत की जंग को जीतने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का पुरजोर इस्तेमाल कर रही है. चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी यूपी और बिहार के लोगों को गुंडा बता चुकी हैं. माना जा रहा है कि ममता ने ये बयान एक स्ट्रैटजी के तहत दिया है.

हिंदी बनाम गैर हिंदी की लड़ाई

ममता बनर्जी अपने बयानों के जरिए बांग्ला भाषियों को एकजुट करना चाह रहीं हैं. उनको लगता है कि भाषा और संस्कृति के नाम पर अगर लोग एकजुट हो गए तो उनका 'ताज' सुरक्षित रह सकता है.
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ममता बनर्जी अपने भाषणों में यूपी के लोगों का जिक्र तो करती रहीं थी, मगर उन्होंने यूपी के साथ इस बार बिहार को भी समेट लिया. चूंकि आमतौर पर माना जाता है कि यूपी की अपेक्षा बिहार के ज्यादा लोग बंगाल में रहते हैं और पॉलिटिकली ऐक्टिव भी रहते हैं. बंगाल में ऐसी आम धारणा है कि ज्यादातर हिन्दी भाषी भारतीय जनता पार्टी के समर्थक हैं.

ममता इस पूरी लड़ाई को हिंदी और गैर हिंदी के तौर पर लड़ना चाह रही हैं. मगर इसका कितना फायदा मिलेगा, इसके लिए काउंटिंग तक इंतजार करना पड़ेगा.



ममता बनर्जी ने क्या कहा था?

दूसरे चरण के चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी और बिहार के लोगों को अपने निशाने पर रखा था. बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने एक रणनीति के तहत इस तरह का बयान दिया. ममता ने कहा कि 'उन्होंने मुझ पर हमला किया, नंदीग्राम के किसी व्यक्ति ने मुझ पर हमला नहीं किया, लेकिन आप यूपी, बिहार से गुंडे लाए. हम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं. अगर वे आते हैं, तो महिलाओं को बर्तनों से पीटना चाहिए'.

पिछले हफ्ते पूर्वी मिदनापुर में रैली के दौरान ममता बनर्जी ने कहा था कि 'बीजेपी यूपी से गुंडे ला रही है. वे मिदनापुर में घुसपैठ कर रहे हैं. अगर गुंडे आपको निशाना बनाते हैं तो आपके हाथ जो भी लगे, वही लेकर उन्हें दौड़ा लें.'

बंगाल में हिंदी भाषियों की आबादी बढ़ी है.

देश के किसी भी गैर हिंदी भाषी राज्य में यूपी-बिहार के प्रति बहुत अच्छा भाव स्थानीय लोग नहीं रखते हैं. ये किसी से छिपा हुआ नहीं है. हिंदी भाषियों की मेहनत और कामयाबी से लोकल लोग ईर्ष्या करते हैं. ये कटु सत्य है.

कई गैर हिंदी भाषी राज्यों में 1961-2011 के बीच हिंदी भाषी लोगों की आबादी बढ़ी है. बंगाल में भी इनकी आबादी में अच्छा-खासा इजाफा हुआ है. इनमें हिन्दी के अलावा भोजपुरी, मारवाड़ी, राजस्थानी और सदरी बोलने वाले लोग शामिल हैं.

कांग्रेस और लेफ्ट के वोट पर ममता की नजर

2011 जनगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में हिंदी भाषी लोगों की आबादी 63 करोड़ यानी करीब 7 फीसदी के आसपास है. मगर फिर भी ये इतने नहीं कि बांग्ला भाषियों का मुकाबला कर सकें. इसका मतलब ये नहीं कि 93 फीसदी बांग्ला भाषी ममता बनर्जी को वोट करते हैं.

ममता बनर्जी बांग्ला भाषियों के इकलौते नेता के तौर पर खुद को साबित करने के चक्कर में बिहार और यूपी के लोगों को बदनाम कर रही हैं, ताकि इसका चुनावी फायदा लिया जा सके. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि बंगाल में लेफ्ट और कांग्रेस दोनों कमजोर हैं. ममता बनर्जी चाहती है कि बांग्ला अस्मिता के नाम पर लेफ्ट और कांग्रेस के कोटे के कुछ वोट हासिल हो जाएं तो उनका काम बन जाएगा.
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