पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को मोदी सरकार ने भेजा नोटिस

अलपन बंदोपाध्याय. (तस्वीर-मनीकंट्रोल)

अलपन बंदोपाध्याय. (तस्वीर-मनीकंट्रोल)

पूर्व मुख्य सचिव और IAS अधिकारी रहे अलपन बंद्योपाध्याय (Alapan Bandyopadhyay) को मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक में शामिल नहीं होने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है.

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal) के पूर्व मुख्य सचिव और IAS अधिकारी रहे अलपन बंद्योपाध्याय (Alapan Bandyopadhyay) को मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक बैठक में शामिल नहीं होने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया गया है. बंद्योपाध्याय सोमवार को बंगाल के मुख्य सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए और बनर्जी द्वारा उन्हें तुरंत मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया. सोमवार शाम को जारी नोटिस में बंद्योपाध्याय को बंगाल में चक्रवात 'यास' पर बैठक से उनकी अनुपस्थिति के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया था.


केंद्र ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत नोटिस दिया है और बंद्योपाध्याय को तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है. नोटिस इस आधार पर जारी किया गया है कि जिस बैठक में पूर्व IAS अधिकारी शामिल नहीं हुए, उसमें 'केंद्र के मामले' शामिल थे. साल 1987 बैच के आईएएस अधिकारी रहे अलपन बंद्योपाध्याय साल 2019 में गृह और सूचना विभाग में नियुक्त होने से पहले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों और वस्त्र विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव थे.


अगले तीन सालों तक मुख्य सलाहकार रहेंगे बंद्योपाध्याय

इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय को सेवा विस्तार के बाद केंद्र द्वारा दिल्ली बुलाए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि सेवानिवृत्त हुए मुख्य सचिव अगले तीन सालों तक उनके मुख्य सलाहकार बने रहेंगे. इससे पहले बनर्जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे मुख्य सचिव को वापस बुलाने के केंद्र के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था और कहा था कि उनकी सरकार शीर्ष नौकरशाह को 'कार्यमुक्त नहीं कर रही' है.


ममता ने बताया कि उनके इस पत्र पर केंद्र का जवाब आया है जिसके मुताबिक बंद्योपाध्याय को मंगलवार को 'नॉर्थ ब्लॉक' में कार्यभार संभालने को कहा गया है. उन्होंने बताया कि केंद्र के पत्र में मुख्य सचिव को वापस बुलाए जाने की वजह का जिक्र नहीं किया गया है. ममता ने यहां कहा कि केंद्र किसी अधिकारी को राज्य सरकार की सहमति के बिना कार्यभार ग्रहण करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता.

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