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समुद्र में डूबने के पांच दिन बाद जिंदा बच निकला मछुआरा, बांग्लादेश के चटगांव पहुंचा

रबींद्रनाथ दास गुरुवार को 100 मछुआरों के साथ मछली पकड़ने का छोटा जहाज लेकर काकद्वीप से समुद्र में गया था और शनिवार को तूफान में बह गया था.
रबींद्रनाथ दास गुरुवार को 100 मछुआरों के साथ मछली पकड़ने का छोटा जहाज लेकर काकद्वीप से समुद्र में गया था और शनिवार को तूफान में बह गया था.

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप से मछली पकड़ने के छोटे के साथ समंदर में उतरा था रबींद्रनाथ दास. छोटा जहाज डूबने के बाद वह बिना लाइफ जैकेटकेट के भूखे-प्यासे चार दिन तक समुद्र में तैरता रहा और जिंदगी की लड़ाई जीत गया.

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पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना का एक मछुआरा समुद्र में डूबने के पांच दिन बाद जिंदा बच निकला है. डूबकर जिंदा बच निकलने में कामयाब रहे मछुआरे रबींद्रनाथ दास पर एक चर्चित शेर 'फानूस बन के जिसकी हिफाज़त हवा करे वो शमा क्या बुझे जिसे रौशन खुदा करे' एकदम फिट बैठता है. दास के सामने समुद्र की उठती-गिरती लहरें और अथाह गहराई की चुनौती थी, लेकिन उसने अपना हौसला पस्त नहीं होने दिया. वह बिना लाइफ जैकेटकेट के भूखे-प्यासे पांच दिन तक समुद्र में तैरता रहा और जिंदगी की लड़ाई जीत गया.

काकद्वीप से 600 किमी दूर चटगांव पहुंच गया दास 

मछलियां पकड़ने वाली नाव के पलटने के पांचवें दिन बाद उसे बांग्लादेश के चटगांव तट पर बचा लिया गया, जो दक्षिण बंगाल के काकद्वीप से 600 किमी की दूरी पर है. दास गुरुवार को 100 मछुआरों के साथ मछली पकड़ने का छोटा जहाज लेकर काकद्वीप से समुद्र में गया था. सभी ने खराब मौसम की चेतावनी को अनदेखा किया था. इसी कारण उनकी नावें समुद्र में पलट गईं और वे बंगाल की खाड़ी में बह गए. वे शनिवार को तूफान में बहकर बांग्लादेशी समुद्री सीमा के अंदर चले गए.



तूफान में बहे 1,300 मछुआरों को बचा लिया गया था 
तूफान में नाव पलटने से बहे 1,300 मछुआरों को बांग्लादेशी नावों के जरिये बचाया गया. हालांकि, 25 मछुआरों समेत दो छोटे जहाजों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. अधिकारियों का मानना है कि उनकी मौत हो चुकी है. इनमें से ही एक रबींद्रनाथ को बुधवार सुबह 10.30 बजे चटगांव तट पर बांग्लादेश के एक जहाज एमवी जवाद ने तैरते हुए देखा.

आसान नहीं था रबींद्रनाथ का रेस्क्यू ऑपरेशन 

एमवी जवाद तक पहुंचना रबींद्रनाथ के लिए आसान नहीं रहा. वह जब भी जहाज के करीब पहुंचता, लहरें उसे दूर फेंक देतीं. आखिरकार जहाज ने उसे तीन नॉटिकल माइल (5.5 किलोमीटर) की दूरी पर पकड़ा. बचावकर्मियों ने उसके पास लाइफ जैकेट फेंकी और कुछ घंटों बाद उसे जहाज पर बैठाया. इसके बाद बांग्लादेशी नौसेना और तटीय सुरक्षा बल को अलर्ट किया गया.

लापता मछुआरों के परिवारों की उम्मीदों को मिला बल 

रबींद्रनाथ के चार दिनों तक समुद्र में जिंदा रहने की घटना ने बाकी लापाता 24 मछुआरों के परिवारों को भी उम्मीद दी है. दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी पी. उल्गानाथन ने बांग्लादेशी अधिकारियों से गुरुवार को मुलाकात की ताकि रबींद्रनाथ को जल्द वापस लाया जा सके. साथ ही और संभावित जिंदा मछुआरों को ढूंढने और बचाने काम तेजी से किया जा सके. फिलहाल रबींद्रनाथ चटगांव के एक अस्पताल में भर्ती है.

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