Opinion | यूं ही नीतीश को बिहार का सीएम नहीं बना रही बीजेपी, इसके पीछे है ये रणनीति

नीतीश कुमार बिहार के सीएम के तौर पर सातवीं बार शपथ लेंगे.
नीतीश कुमार बिहार के सीएम के तौर पर सातवीं बार शपथ लेंगे.

बिहार चुनाव के नतीजों से जहां बीजेपी गदगद है, वहीं जनता दल (यूनाइटेड) के खराब प्रदर्शन ने नीतीश कुमार की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जेडीयू के इतने खराब प्रदर्शन के बावजूद बीजेपी सीएम पद के लिए नीतीश कुमार को ही क्यों आगे कर रही है.

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  • Last Updated: November 13, 2020, 2:45 PM IST
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(अशोक मिश्रा)

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections 2020) में एनडीए को 125 सीटें मिली हैं जबकि राष्ट्रीय जनता दल को 110 सीटें हासिल हुई हैं. इस बार के बिहार चुनाव के नतीजों से जहां बीजेपी गदगद है, वहीं जनता दल (यूनाइटेड) के खराब प्रदर्शन ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि जेडीयू के इतने खराब प्रदर्शन के बावजूद बीजेपी सीएम पद के लिए नीतीश कुमार को ही क्यों आगे कर रही है. नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना बीजेपी की भविष्य की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है.






बिहार में सुशासन बाबू के टैग के साथ मैदान में उतरी नीतीश कुमार की पार्टी चुनाव नतीजे आने के बाद छोटे भाई की भूमिका में आ गई है. नी​तीश कुमार ने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार चढ़ाव देखे हैं. इस बार के चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन ने नीतीश कुमार की कुर्सी को हिलाकर रख दिया है. चुनाव नतीजे आने के बाद भाजपा नेताओं के एक धड़े ने खराब प्रदर्शन के बावजूद नीतीश कुमार को सीएम बनाए जाने पर सवाल उठाने भी शुरू कर दिए हैं
हालांकि, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अभी भी नीतीश कुमार को ही बिहार का अगला मुख्यमंत्री मानता है और वह राज्य में कोई बदलाव नहीं चाहता. ऐसा माना जा रहा है कि नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल चुनाव तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे क्योंकि बीजेपी अब अपना पूरा ध्यान बंगाल पर लगाने जा रही है. बीजेपी पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के मूड में दिख रही है. ऐसे में पार्टी नहीं चाहती कि वह नीतीश कुमार जैसे नेता नाराज होकर एनडीए से बाहर जाएं. पंजाब में कृषि सुधार बिल को लेकर शिरोमणि अकाली दल के एनडीए से अगल होने के बाद से एनडीए इस तरह का कोई कदम नहीं उठाना चाहती है, जिससे एनडीए में घटक दल उससे अलग हो.

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2024 में लोकसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल पर बीजेपी की नजर
भाजपा भले ही बिहार में एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसकी योजना अगले साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव में नीतीश पर बड़ा दांव लगाने की है. नीतीश कुमार अति पिछड़ी जाति के बड़े नेताओं में शामिल हैं. बंगाल में बिहार के काफी लोग है जो विशेष रूप से चाय के बागानों और कंपनियों में काम करते हैं. ऐसे में बीजेपी पश्चिम बंगाल में नीतीश कुमार को ट्रंप कार्ड के रूप में इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है.

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1995 के बाद पहली बार जनता दल (यू) का रहा इतना खराब प्रदर्शन
इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू की राष्ट्रीय जनता दल से कड़ी टक्कर मिली है. जेडीयू का प्रदर्शन 1995 के बाद पहली बार इतना खराब रहा है. 1995 में 324 सीट वाले​ बिहार विधानसभा में जेडीयू को केवल 7 सीटें मिली थीं, ज​बकि इस बार जनता दल (यू) ने जिन 115 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 43 सीटों पर ही वह जीत हासिल कर सकी. गौरतलब है ​कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की 125 सीटों में 74 सीट बीजेपी के खाते में गई हैं जब​कि जनता दल (यूनाइटेड) के खाते में सिर्फ 43 सीटें आई हैं. वहीं एनडीए के साथ चुनाव लड़ रही जीतन राम मांझी की पार्टी को 4 सीटें मिली हैं जबकि विकासशील इंसान पार्टी के खाते में भी 4 सीटें गई हैं.

(Disclaimer: लेखक सीनियर जर्नलिस्ट हैं. ये उनके निजी विचार हैं)
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