बंगाल चुनाव: राहुल गांधी ने जहां-जहां की रैली, वहां कांग्रेस कैंडिडेट की जमानत हुई जब्त

राहुल गांधी ने साधा सरकार पर निशाना. (File pic)

राहुल गांधी ने साधा सरकार पर निशाना. (File pic)

West Bengal Assembly Election 2021: पश्चिम बंगाल में तीसरा मोर्चा (Third Front) के खाते में सिर्फ एक सीट आई है. उनके पतन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके 85 फीसदी उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए.

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Begnal Assembly Election 2021) में तीसरा मोर्चा (Third Front) के खाते में सिर्फ एक सीट आई है. उनके पतन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके 85 फीसदी उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए. इतना ही नहीं जिन दो सीटों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने रैली की थी, वहां भी पार्टी की इज्जत नहीं बची.

News18 द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार चुनाव में सिर्फ 42 सीटों पर ही जमानत बचा पाए. सभी 292 सीटों पर लड़ने वाला तीसरा मोर्चे के एक सदस्य भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा (ISF) ने अन्य दो सहयोगियों कांग्रेस और वामदलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. कांग्रेस और वामदल के पास अब एक भी सीट नहीं है.

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कांग्रेस के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा कि वह उन दो सीटों - माटीगारा-नक्सलबाड़ी और गोलपोखर में भी बुरी तरह हार गई- जहां राहुल गांधी ने 14 अप्रैल को रैलियां की थीं. वहां के उम्मीदवारों भी अपनी जमानत नहीं बचा पाए. कांग्रेस एक दशक तक माटीगारा-नक्सलबाड़ी पर काबिज थी, लेकिन मौजूदा विधायक शंकर मालाकार इस बार सिर्फ 9% वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे. गोलपोखर में भी कांग्रेस का उम्मीदवार सिर्फ 12% वोट पाकर तीसरे स्थान पर आया. साल 2006 से साल 2009 तक और फिर साल 2011 से साल 2016 तक इस सीट से कांग्रेस का विधायक था.
तीनों दल का अलग-अलग विश्लेषण

तीन सहयोगी दलों को अलग-अलग विश्लेषण करें तो पाएंगे कि वामपंथी 170 सीटों में से सिर्फ 21 सीट पर अपनी जमानत बचा सके. 90 में से 11 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों की जमानत बची और 30 में से 10 सीटों पर आईएसएफ के उम्मीदवारों की जमानत बची. आईएसएफ ने एक सीट जीती और चार में दूसरे नंबर पर आई. सभी चार निर्वाचन क्षेत्रों में ISF ने भाजपा को तीसरे नंबर पर धकेल दिया. इससे पता चलता कि थर्ड फ्रंट में फुरफुरा शरीफ के मौलवी अब्बास सिद्दीकी की नई पार्टी ही लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र था.





लेफ्ट पार्टियां केवल चार सीटों पर दूसरे और कांग्रेस केवल दो (जॉयपुर और रानीनगर) में नंबर 2 पर आई. तीसरे मोर्चे के पतन का सीधा फायदा तृणमूल कांग्रेस को हुआ, जिसने 213 सीटें जीतीं. कुल मिलाकर कांग्रेस पश्चिम बंगाल में केवल 2.94% वोट शेयर पाई जबकि वाम दलों को लगभग 5% वोट मिले.
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