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पश्चिम बंगाल: राज्यपाल से टकराव के चलते स्थगित हुआ शीतकालीन सत्र

भाषा
Updated: December 11, 2019, 5:00 AM IST
पश्चिम बंगाल: राज्यपाल से टकराव के चलते स्थगित हुआ शीतकालीन सत्र
तृणमूल ने कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने जानबूझकर कई विधेयकों को मंजूरी नहीं दी है.

तृणमूल ने कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankar) ने जानबूझकर कई विधेयकों को मंजूरी नहीं दी है. वहीं धनखड़ ने सरकार पर धीमी गति से काम करने और उनके सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया.

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) और राज्यपाल के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बीच विधानसभा का शीतकालीन सत्र मंगलवार को अचानक स्थगित कर दिया गया. तृणमूल ने कहा कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने जानबूझकर कई विधेयकों को मंजूरी नहीं दी है. वहीं धनखड़ ने सरकार पर धीमी गति से काम करने और उनके सवालों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया.

बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुके इस मुद्दे पर संसद में भी हंगामा हुआ और तृणमूल सांसदों ने दोनों सदनों में इस मुद्दे को उठाया. राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति न मिलने पर उन्होंने सदन से बहिर्गमन किया. तृणमूल सांसदों ने विधेयकों को मंजूरी देने में कथित तौर पर देरी को लेकर धनखड़ की आलोचना की और उन्हें हटाने की मांग की.

राज्यपाल ने खारिज किए आरोप
धनखड़ ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि वह संविधान के अनुसार काम करेंगे और विधेयकों के लंबित रहने के लिए उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता. संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी ने सदन को बताया कि राज्य सरकार ने राज्यपाल के सभी प्रश्नों का विधिवत समाधान किया. विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कहा कि सदन ने धनखड़ के सभी प्रश्नों का जवाब दिया.

बाद में राज्यपाल ने राज भवन में संवाददाताओं से कहा, 'मैं देश के संविधान के अनुसार काम करूंगा. यदि सरकार मेरे प्रश्नों का उत्तर धीमी गति से देती है तो यह मेरी गलती नहीं है. मुझे दोषी ठहराकर वह अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती.'मंत्रियों और विधायकों ने दावा किया कि राज्यपाल ने महत्वपूर्ण विधेयकों को रोक कर रखा है जिन्हें विधानसभा में चर्चा के लिए प्रस्तुत किए जाने की जरूरत है.

नये विधेयक पर चर्चा नहीं
मंत्री तापस राय ने कहा, “क्या कोई राज्यपाल इस तरह से काम करता है? वह राज्य की विधानसभा को ठीक से नहीं चलने दे रहे. राज्यपाल की मंजूरी न मिलने के कारण हम पिछले सप्ताह से किसी भी नये विधेयक पर चर्चा नहीं कर पा रहे हैं. अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य विधेयक उनकी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं.”तृणमूल के महासचिव चटर्जी ने विधानसभा में बताया कि राज्यपाल से लंबित विधेयकों के बारे में बात करने के बावजूद उन्हें स्वीकृति नहीं मिली है. राय ने कहा कि विधानसभा का सत्र 29 नवंबर से शुरू हुआ था और 13 दिसंबर तक चलने वाला था लेकिन चर्चा के लिए कोई विधेयक न होने पर सत्र को स्थगित करने का निर्णय लिया गया.

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First published: December 11, 2019, 5:00 AM IST
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