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सैयद अली शाह गिलानी के इस्तीफे के बाद क्या? हुर्रियत चीफ के लिए चर्चा में है भारत से भागे इस शख्स का नाम

सैयद अली शाह गिलानी के इस्तीफे के बाद क्या? हुर्रियत चीफ के लिए चर्चा में है भारत से भागे इस शख्स का नाम

सैयद अली शाह गिलानी के इस्तीफे के बाद सवाल है कौन बनेगा नया हुर्रियत मुखिया?

सैयद अली शाह गिलानी के इस्तीफे के बाद सवाल है कौन बनेगा नया हुर्रियत मुखिया?

हुर्रियत कांफ्रेंस (Hurriayt Confrence) के नेता और अलगाववादी नेता सैयल अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Gilani) ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया.

    श्रीनगर. पाकिस्तान समर्थित हुर्रियत कांफ्रेंस (Hurriayt Confrence) के नेता और अलगाववादी नेता सैयल अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Gilani) ने सोमवार को दल के सभी 16 धड़ों से खुद को अलग करते हुए इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही गिलानी ने पाकिस्तान स्थित रावलपिंडी में रह रहे अब्दुल्लाह गिलानी को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है.

    91 वर्षीय गिलानी ने आरोप लगाया गया कि 'जम्मू - कश्मीर और लद्दाख से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है जिसके चलते उन्हें इससे अलग होने का फैसला करना पड़ा. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि हुर्रियत में जिम्मेदारी नहीं तय हो रही है थी और लोगों में बगावत की भावना पनप रही थी.'

    कौन है अब्दुल्लाह गिलानी?
    अपने इस्तीफे में गिलानी ने लिखा - 'मैं ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी पूरी तरह से इस गठबंधन से अलग होने का फैसला करता हूं.' पाकिस्तान समर्थित अलगाववादियों में सबसे प्रमुख गिलानी 2003 में इस धड़े के गठन के बाद से ही इसके अध्यक्ष थे.

    गिलानी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित अलगाववादी नेताओं पर कश्मीर के मुद्दे को अपने फायदे के लिये इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने ये आरोप संगठन के घटकों को लिखे पत्र में लगाए. उन्होंने इस पत्र को 'हुर्रियत की मौजूदा हालत के मद्देनजर' शीर्षक दिया है.

    अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने कहा कि अब्दुल्लाह गिलानी को सैयल अली शाह गिलानी का उत्तराधिकारी चुना जाना इस बात के संकेत हैं कि घाटी में अलगववादी ताकतों को अलग रखा जा सकता है. बता दें अब्दुल्लाह गिलानी, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसएआर गिलानी का छोटा भाई है, जिनकी बीते साल हार्ट अटैक से मौत हो गई थी.

    रिपोर्ट के अनुसार पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने कहा कि अब्दुल्लाह गिलानी (Abdullah Gilani) ISI का करीबी माना जाता है. सैयल अली शाह गिलानी पर उनका पद छोड़ने का दबाव बनाया गया और उत्तराधिकार अब्दुल्लाह गिलानी को सौंपने को कहा. शख्स ने दावा किया कि ISI ना तो हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन के पक्ष में था, ना ही गुलाम मोहम्मद सफी को समर्थन दे रहा था.'

    हुर्रियत का मुखिया बनना चाह रहा था सलाहुद्दीन
    रिपोर्ट के अनुसार यह विवाद तब शुरू हुआ जब सैयद गिलानी ने हुर्रियत की पीओके इकाई के मुख्या सफी को हटा दिया था. सूत्रों ने यह दावा भी किया कि हाल ही में हिज्ब-उल मुखिया सलाहुद्दीन पर रावलपिंडी पर कथित तौर पर अब्दुल्लाह गिलानी ने ISI की मदद ली थी. दावा किया जा रहा था कि सलाहुद्दीन हुर्रियत का मुखिया बनना चाह रहा था.

    सैयद गिलानी के इस्तीफे के बाद से सवाल उठ रहे हैं कि अब क्या होगा? माना जा रहा है कि अब यह संगठन अलग तरीके से काम करेगा क्योंकि सारे आदेश सीधा पाकिस्तान से आएंगे. साल 2000 में अब्दुल्लाह गिलानी पाकिस्तान चला गया था और तब से वहीं हैं. 55 वर्षीय अब्दुल्लाह गिलानी की तीन में से 2 पत्नियां पाकिस्तानी हैं.

    Tags: Hurriyat conference, Jammu kashmir, Pakistan

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