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भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 17 साल बाद सत्ता का स्वाद चखने के लिए क्या क्या किया ?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद 1992 में अपनी कुर्सी से धोना पड़ा था ।

  • News18Hindi
  • | March 11, 2017, 10:31 IST
    LAST UPDATED 5 YEARS AGO

    हाइलाइट्स

    उत्तर प्रदेश में बीजेपी  के पहले मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद  1992 में अपनी  कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था.


     1997 में बीजेपी  के साथ एक असफल गठबंधन के बाद उत्तर प्रदेश में बीजेपी  के दूसरे मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह का कार्यकाल 2002 में ख़त्म हुआ.


    तबसे लेकर 2017 तक बीजेपी  उत्तर प्रदेश  की सत्ता में वापसी करने का सपना  देखा है.


     भाजपा ने उत्तर प्रदेश में फिर से सत्ता का स्वाद चखने के लिए यह सब किया :


    1. मोदी: भाजपा एक दशक पहले की अपनी सोच से काफी आगे निकल बेहद आक्रामक हो गई है. कारण यह भी है कि केंद्र में भी भाजपा की सरकार है. अभी तक मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कोई चेहरा सामने  लाने का पूरा फ़ायदा भाजपा को मिला क्योकि मोदी आकर्षण का केंद्र बने रहे.


    2 एंटी इंकम्बेनसी: बीजेपी के पिछले तीन बार सत्ता में न रहने के कारण इस बार जनता ने मौका देने का निर्णय लिया.


    3. जाति: बीजेपी ने मंडल कोप ही मंडलवाद के खिलाफ खड़ा किया।  निचले तबके के लोगों के लिए सामाजिक राजनैतिक और आर्थिक न्याय की बात की। यादव, जाटव और मुस्लिम खुद को बनते हुए और अकेले पाते हैं पर ऊँची जातियों के  बीजेपी को फायदा हुआ.


    4. केशव प्रसाद मौर्या : एक अनुसूचित जनजाती के नेता को पार्टी अध्यक्ष बनाने से ऊँची जातियों ने बीजेपी को थोडा विरोध झेलना पड़ा पर ज़्यादातर अनुसूचित जनजाती के लोगों को साथ लिया। लेकिन यह अमित शाह के दिमाग की उपज नहीं बल्कि 1991 में कल्यान सिंह द्वारा की गई सोशल इंजीनियरिंग का नतीजा था।


    5 बसपा के नेताओं को टिकट देना: बीजेपी ने बसपा के दलित नेताओं टिकट देकर खुश की और अपने साथ लिया। इससे मायावती के ब्राह्मणों, दलितों, व् अन्य पिछड़ी जातियों को साथ लाकर सर्जकर बनाने का इरादा धरा रह गया.


    6. सामरिक ध्रुवीकरण: उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण के बाद सामरिक ध्रुवीकरण काम आया. तब तक वोटिंग के मामले में बीजेपी समां अपनी तरफ बाँध  चुकी थी.

     
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