सुंजवान हमले का बदला लेने के लिए भारत के पास क्या हैं ऑप्शन?

सुंजवान हमले ने सितंबर 2016 में उरी हमले की याद दिला दी, जिसके एक हफ्ते बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में सर्जिकल स्ट्राइक किया था.

News18Hindi
Updated: February 13, 2018, 3:01 PM IST
सुंजवान हमले का बदला लेने के लिए भारत के पास क्या हैं ऑप्शन?
जम्मू-कश्मीर के सुंजवान आर्मी कैंप में हुए आतंकी हमले में 6 जवान शहीद हो चुके हैं.
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Updated: February 13, 2018, 3:01 PM IST
(उदय सिंह राणा)

जम्मू-कश्मीर के सुंजवान आर्मी कैंप में हुए आतंकी हमले में 6 जवान शहीद हो चुके हैं. एक नागरिक की मौत हो गई है, जबकि 11 अन्य घायल हैं. जैश के मोहम्मद (JeM) के तीन आतंकियों के ढेर होने के बाद दो दिन से चल रहा एनकाउंटर खत्म हुआ.

सुंजवान हमले ने सितंबर 2016 में उरी हमले की याद दिला दी, जिसके एक हफ्ते बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में सर्जिकल स्ट्राइक किया था. सवाल ये है कि क्या भारत सुंजवान हमले पर भी वैसी प्रतिक्रिया दे सकता है, जैसा उसने उरी हमले के बाद दिया था?

इस आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए क्या भारत के पास मिलिट्री ऑपरेशंस के विकल्प हैं? क्या जंग की शुरुआत हो सकती है? विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका जवाब 'हां' है.

मेजर जनरल (रिटायर्ड) नरेश बड़ानी कहते हैं, "आंतकी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना के पास कई विकल्प हैं. हम नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान आर्मी पोस्ट को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग से सीजफायर उल्लंघन का जवाब दे सकते हैं. मेरा मानना है कि इसे जारी रखना चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने की जरूरत है."


उन्होंने कहा, "हालांकि यह कार्रवाई की सबसे अच्छी योजना नहीं है. इस तरह की प्रतिक्रिया की कुछ सीमाएं होती हैं. उदाहरण के लिए, यह एक वक्त में सिर्फ 2-3 पाकिस्तान आर्मी पोस्ट को टारगेट कर सकता है. इसके अलावा, इस तरह की कार्रवाई से दोनों पक्षों के नागरिकों की जान खतरे में पड़ने की संभावना ज्यादा है. भारतीय सेना निर्दोष और बेगुनाह लोगों को चोट नहीं पहुंचाती. यही कारण है कि हमें एक बेहतर प्लान पर काम करना होगा."

पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा, "हमले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसी स्थिति जंग से कितनी अलग है, ये सोचने वाली बात है. यदि कोई हवाई हमला है या भारतीय सेना नियंत्रण रेखा पार करती है या फिर सैन्य आन्दोलन का व्यापक प्रदर्शन होता है, तो उसे युद्ध का एक संकेत माना जा सकता है. इसके बजाय, हम 2016 के अपने ही सर्जिकल स्ट्राइक से सबक ले सकते हैं और बड़े पैमाने पर कुछ इसी तरह की कार्रवाई दोहरा सकते हैं."

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उन्होंने स्पष्ट किया, "नियंत्रण रेखा 760 किलोमीटर से ज्यादा लंबी है, जहां जगह-जगह पाकिस्तानी सेना के पोस्ट हैं. हमें जरूरत है एक ऐसे सैन्य प्रतिक्रिया है, जो नियंत्रण रेखा के पार कम से कम 20-30 प्वॉइंट तक कार्रवाई कर सके. हमें बहुत कम वक्त में नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सेना के ज्यादा से ज्यादा शिविरों को तबाह करना होगा."

मेजर जनरल (रिटायर्ड) नरेश बड़ानी ने बताया, "स्थानीय आतंकियों के पाकिस्तानी आतंकवादियों के जैसे प्रशिक्षित नहीं होने के पीछे कई कारण है. उन (आतंकवादियों) के पास पाकिस्तान सेना द्वारा उठाए गए नियंत्रण रेखा के उस तरफ आधारभूत संरचना उपलब्ध है. जब तक उनकी सेना को दर्द नहीं लगता, वे इन चीजों को रोकने नहीं जाएंगे. उन्हें अपने शिविरों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद होने की जरूरत है. हमें ऐसा माहौल बनाना होगा, ताकि पाकिस्तान अपने सैन्य शिविरों की फिक्र करे. ऐसा होने पर ही वह आतंकवादियों को प्रशिक्षित करना रोकेगा."


जम्मू आतंकवादी हमला पिछले तीन सालों से नियंत्रण रेखा के पार हुए आतंकी गतिविधियों में सबसे ताजा घटनाक्रम है. हालांकि, इस बार कई लोगों का मानना है कि आतंकवादियों ने भारतीय जवानों के परिवार की महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाकर 'रेड लाइन' क्रॉस कर दी है.

बड़ानी के मुताबिक, "इस हमले के बाद यह साफ होता है कि भारतीय सेना की छावनियों को मजबूत और अभेद्य बनाने की जरूरत है. अक्सर देखा गया है कि स्थानीय नागरिकों की आबादी और घुसपैठ के आतंकियों में अंतर करना बहुत मुश्किल है, क्योंकि पाकिस्तान ने उन्हें हमारे जैसा बना दिया है. ये आतंकी हमारे जैसे कपड़े पहनते हैं. हमारी तरह बाल कटवाते हैं. हमारी भाषा में बात करते हैं."

बड़ानी ने कहा इसलिए छावनियों में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के उपकरण लगाए गए. लेकिन, मुझे नहीं लगता कि हर जगह ऐसा किया गया हो. ये एक ऐसा मसला है, जिसपर भारत सरकार को गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

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