कोरोना वैक्सीन साझा करने पर भारत-यूएस में क्या है मुश्किलें.. यहां जानिए सबकुछ

भारत की मदद के लिए आगे आया अमेरिका

कोविड-19 महामारी (Covid19 Pandemic) ने भारत में भयानक तबाही मचाई और चार लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. भारत ने इससे हार नहीं मानी और हमारे घरेलू वैक्सीन निर्माण में खासी तेजी भी आई लेकिन फिर कच्चे माल की कमी हो जाने की वजह से हमें इस साल अप्रैल में सहायता के लिए यूएस का मुंह ताकना पड़ा. हालाँकि, अमेरिका से कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के भारत के अनुरोध को शुरू में बाइडेन प्रशासन के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिसके चलते अमेरिका को कड़ी आलोचना का सामना करने पड़ा.

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    नई दिल्‍ली. कोविड-19 महामारी ने भारत में भयानक तबाही मचाई और चार लाख से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. भारत ने इससे हार नहीं मानी और हमारे घरेलू वैक्सीन निर्माण में खासी तेजी भी आई लेकिन फिर कच्चे माल की कमी हो जाने की वजह से हमें इस साल अप्रैल में सहायता के लिए यूएस का मुंह ताकना पड़ा.

    हालांकि, भारत ने अमेरिकी प्रशासन से वैक्सीन के लिए कच्चे माल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने का आग्रह किया था, लेकिन उस दौरान बाइडन प्रशासन ने थोड़ी सख्ती दिखाई थी. जिसके चलते अमेरिका को कड़ी आलोचना का सामना करने पड़ा. हालांकि, उसने आगे चलकर ना सिर्फ अपना रुख बदला, बल्कि एक कदम आगे बढ़कर 3 जून 2021 को कोवैक्स पहल के तहत भारत को लाखों टीके दान करने की घोषणा तक कर डाली.

    शुरुआत से समझते हैं क्या है भारत और अमेरिका के बीच वैक्सीन साझा करने का रिश्ता ...

    पृष्ठभूमि
    अप्रैल 2021 की शुरुआत में, यूएस, राज्य के सचिव, एंटोनी ब्लिंकेन ने यूएसएआईडी के पूर्व प्रशासक गायल स्मिथ को नियुक्त किया. उन्हें वैक्सीन के प्रशासन को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई. जिसके तहत वैक्सीन-कूटनीति, निर्माण, और 2022 के अंत तक भारत-प्रशांत क्षेत्र में 100 करोड़ वैक्सीन देना शामिल था. इन वैक्सीन के उत्पादन का केंद्र भारत को बनाया गया था. हालांकि आगे चलकर जल्दी ही तनाव बढ़ गया. जब ये बात सामने आई कि यूनाइटेड स्टेट्स वैक्सीन के कच्चे माल के निर्यात पर से प्रतिबंध नहीं हटाया था.

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    अप्रैल 16, 2021
    भारत के सीरम इन्स्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को एक ट्वीट करते हुए लिखा कि Respected @POTUS अगर हम वायरस को मात देने के वाकई में एकजुट हैं तो वैक्सीन उद्योग (अमेरिका के बाहर स्थित) की तरफ से यूएस से गुज़ारिश करता हूं कि यूएस के बाहर कच्चे माल की निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाएं जिससे वैक्सीन उत्पादन में तेजी आ सके. आपके प्रशासन के पास सारी जानकारी मौजूद है.

    अप्रैल 21, 2021
    जब प्रेस ने यूएस प्रशासन से प्रतिबंध के बारे में सवाल किया तो यूएस विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस का जवाब था कि उनकी अमेरिकन लोगों के प्रति खास जिम्मेदारी है, जिन पर दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा वायरस की मार पड़ी है. उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका के लोगों को टीका लगे इसमें सिर्फ हमारी दिलचस्पी नहीं है बल्कि बाकी दुनिया भी अमेरिकियों को टीका लगते देखना चाहती है. पूनावाला के ट्वीट के बाद कई तरह की आलोचनाएं सामने आईं. नेट प्राइस के बयान को जनता ने आड़े हाथों लिया और अमेरिका को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.

    अप्रैल 25, 2021
    ब्लिंकेन ने अपने ट्वीट के ज़रिये भारत के साथ एकता का संदेश देते हुआ कोविड-19 की भयानक लहर के दौरान वायरस से लड़ने में अतिरिक्त सहायता देने का आश्वासन दिया. फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने बात को आगे बढ़ाते हुए देश की मदद के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की जिसमें वैक्सीन के लिए कच्चे माल का निर्यात भी शामिल था. अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी कहा कि जब अमेरिका को ज़रूरत थी तब भारत कभी पीछे नहीं हटा. उन्हीं के सुर में सुर मिलाते हुए उप राष्ट्रपति कमला हैरिस, यूएसएआईडी प्रशासक सामंथा पॉवर और सुरक्षा सचिव लॉयल ऑस्टिन ने भी भारत का समर्थन किया.

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    अप्रैल 26, 2021
    बाइडन ने घोषणा की कि वो एस्ट्राजेनका वैक्सीन का अपना पूरा भंडार दूसरे देशों जिसमें भारत भी शामिल है के साथ साझा करेगा. बस उन्हें फेडरल की सुरक्षा समीक्षा का इंतज़ार है.

    मई 2, 2021
    2 मई को व्हाइट हाउस से बात चली की बाइडेन प्रशासन कोरोना वायरस की वैक्सीन को भारत और दूसरे देशों में वितरित करने की सोच रहा है, अब तक लाखों अमेरिकियों को उनका वैक्सीन के डोज मिल चुके हैं.

    मई 30, 2021
    भारत और यूएस में औपचारिक तौर पर वैक्सीन के लिए आपूर्ति चेन खोलने और एक साथ काम करने को लेकर सहमति बनी. वे भारत के निर्माताओं की वैक्सीन उत्पादन में मदद के लिए अपनी सामग्री देने को सहमत हुए.

    जून 3, 2021
    यूएस की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बात करते हुए घोषणा की, कि बाइडन प्रशासन कोविड 19 वैक्सीन के ढाई करोड़ टीके दान करने की योजना बना रहा है. ये दान कोवैक्स पहल के तहत किया जाएगा.

    जून 22, 2021
    करीब दो हफ्ते गुज़र जाने के बाद यूएस ने ढाई करोड़ डोज दुनिया के साथ साझा करने की घोषणा की. उसने कहा कि बाकी बचे 55 लाख डोज  में से 16 मिलियन डोज़ एशिया को दिया जाएगा.

    जुलाई 13, 2021
    भारत को आज तक वो कोवैक्स पहल के तहत वो वैक्सीन नहीं मिली है जिसका यूनाइटेड स्टेट्स ने वादा किया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका तो वैक्सीन भेजने के लिए तैयार बैठा है, लेकिन भारत सरकार की तरफ से ही यूएस से वैक्सीन दान स्वीकार करने से जुड़ी कानूनी कार्रवाई की समीक्षा नहीं हुई है. भारत के पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, नेपाल, भूटान और बांगलादेश को यूएस से वैक्सीन प्राप्त हो चुकी है लेकिन भारत के लोगों तक अभी भी खेप नहीं पहुंची है.

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