क्‍या बहुत महंगा है भूकंपरोधी मकान बनाना?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 13, 2017, 10:43 AM IST
क्‍या बहुत महंगा है भूकंपरोधी मकान बनाना?
भूकंपीय जोन चार-पांच में आते हैं तो बनवाएं भूकंपरोधी मकान
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: August 13, 2017, 10:43 AM IST
जब भी कोई बड़ा भूकंप आता है तो हर शहर में खतरनाक इमारतों का सर्वे शुरू कर दिया जाता है. भूकंपरोधी भवन बनाने के लिए सख्‍ती करने की बात होती है लेकिन थोड़े दिन बाद हम सब भूल जाते हैं. जबकि बिना भूकंप के भी कई शहरों में इमारतें गिरने की घटनाएं होती रहती हैं.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्‍या भूकंपरोधी मकान बनाना इतना महंगा है कि लोग इससे बचते हैं. कंफेडरेशन ऑफ रीयल एस्‍टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के अध्‍यक्ष गीतांबर आनंद कहते हैं कि निजी मकान बनाते वक्‍त लोग पैसे बचाने के चक्‍कर में उसे भूकंपरोधी नहीं बनवाते. जबकि भूकंपरोधी भवन बनाना सिर्फ 25 फीसदी ही महंगा पड़ता है.

कंस्‍ट्रक्‍शन कंसल्‍टेंसी चलाने वाले अशरफ अली कहते हैं 15 फीसदी और रकम खर्च करके हम ज्‍यादा सुरक्षित हो सकते हैं. गुड़गांव नगर निगम के चीफ टाउन प्‍लानर रहे एससी कुश के मुताबिक भूकंप के लिहाज से सुरक्षित मकान बनाने में सिर्फ 20 से 25 फीसदी तक ही लागत बढ़ती है.

नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजास्‍टर मैनेजमेंट (एनआईडीएम) में जियो हेजार्ड रिस्‍क मैनेजमेंट डिवीजन के प्रमुख प्रोफेसर चंदन घोष कहते हैं कि यह भ्रम फैलाया गया है कि भूकंपरोधी बिल्‍डिंग महंगी पड़ती है.

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हकीकत यह है कि ऐसे मकान बनाने में बहुत ज्‍यादा पैसा नहीं लगता. हम नई बिल्‍डिंग बनाते वक्‍त तो सावधानी बरतें ही पुरानी को भी ठीक कराएं. इसके लिए स्‍वायल टेस्‍टिंग करवाकर स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियर की मदद ली जा सकती है.

क्या करता है स्ट्रक्चरल इंजीनियर
स्ट्रक्चरल इंजीनियर किसी निर्माण का स्ट्रक्चर से जुड़ा काम देखता है. बिल्डिंग के स्ट्रक्चर को डिजाइन करते समय वह आकलन करता है कि इमारत पर कितना लोड आएगा, किस पिलर पर कितना लोड होगा. मिट्टी की क्षमता कितनी है, उस स्थान पर भूकंप का कितना डर है. इन बातों को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार करता है. इसी हिसाब से कॉलम, बीम, फ्लोर, स्लैब आदि की मोटाई और उसमें सरिया आदि की संख्‍या तय होती है. ऐसा करने से मकान या बिल्डिंग सुरक्षित रहते हैं.

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रिपोर्ट आती है पर होता कुछ नहीं
गुजरात के भीषण भूकंप (2001) के बाद एक सर्वे में उत्‍तर प्रदेश में 2,600 ऐसी इमारतों की पहचान की गई थी जो भूकंप के झटके झेलने की लिहाज से कमजोर और खतरनाक थीं. इनमें सबसे अधिक 637 इमारतें आगरा में चिन्हित की गई थी. गाजियाबाद में 415 इमारतें, मथुरा-वृंदावन में 230, मुरादाबाद में 197, फिरोजाबाद में 187, कानपुर में 175, लखनऊ में 165, अलीगढ़ में 145, मेरठ में 121, झांसी में 113 और वाराणसी में 101 की पहचान भूकंप का झटका न झेल पाने वाली इमारतों के रूप में की गई थी. लेकिन क्‍या इन्‍हें भूकंपरोधी बनाने के लिए कुछ किया गया?, जवाब है नहीं.

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 बिल्‍डिंग ऑडिट और भवनों की रेटिंग का समय
हरियाणा इस्‍टीट्यूट ऑफ पब्‍लिक एडमिनिस्‍ट्रेशन में डिजास्‍टर मैनेजमेंट के प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्‍तव कहते हैं कि अब देश में बिल्‍डिंग ऑडिट करवाने की जरूरत है. ताकि पता चले कि कितनी बिल्‍डिगें खतरनाक हैं. हाईराइज बिल्‍डिंगें कितनी भूकंपरोधी हैं, सरकार इसकी रेटिंग करवाए. स्‍टार दे. वन स्‍टार, टू स्‍टार....और फाइव स्‍टार के हिसाब से उसका दाम तय होना चाहिए. रेटिंग देने का काम नौकरशाहों को न देकर वैज्ञानिकों को सौंपना चाहिए.

earthquake resistant building construction                        भूकंपरोधी बिल्‍डिंग का निर्माण (फाइल फोटो)

नगर निगमों के पास नहीं हैं स्‍वायल टेस्‍टिंग एक्‍सपर्ट
श्रीवास्‍तव कहते हैं कि भवनों का नक्‍शा लोकल अथॉरिटी पास करती है. उसके अधिकारी सिर्फ यह देखते हैं कि मकान के आगे-पीछे हवा के लिए जगह छूटी है या नहीं. लेकिन कभी यह चेक नहीं करते कि जिस जगह मकान बना है वहां की मिट्टी कैसी है. किसी भी नगर निगम के पास स्‍वायल टेस्‍टिंग का एक्‍सपर्ट नहीं है जो नक्‍शा पास करवाने के लिए जमा कराए गए सर्टिफिकेट को क्रॉसचेक करने के लिए मिट्टी की जांच कर सकें.
First published: August 13, 2017
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