अगर कोई कोरोना वायरस के 2 वेरिएंट से एक साथ संक्रमित हो जाए तो क्या होता है?

कोरोना वायरस संक्रमण के नए वेरिएंट भी अब सामने आ रहे हैं. (File pic)

बेल्जियम (Belgium) की एक 90 साल की महिला पहली ऐसी शख्स हैं, जिन्हें एक ही वक्त में कोरोना वायरस (Coronavirus) के दो वेरिएंट ने संक्रमित किया है.

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    नई दिल्‍ली. बेल्जियम (Belgium) की एक 90 साल की महिला पहली ऐसी शख्स हैं, जिन्हें एक ही वक्त में कोरोना वायरस (Coronavirus) के दो वेरिएंट ने संक्रमित किया है. ये महिला इस साल मार्च में कोरोना वायरस (Corona Variants) से संक्रमित हुई थीं और उनमें अल्फा और बीटा दोनों कोरोना वेरिएंट पाए गए थे. पांच दिन अस्पताल में भर्ती होने के बाद इनकी मृत्यु हो गई थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी और संक्रमित बीमारियों पर हुई वार्षिक यूरोपियन कांग्रेस में इस अनूठे मामले पर चर्चा भी हुई.

    इसमें कोई हैरानी की बात नहीं
    इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले जिसमें कोई एक बार में ही दो वेरिएंट से संक्रमित हो जाता है, कम देखने को मिलते हैं, लेकिन ऐसा होना कोई हैरानी की बात नहीं है. थोड़े से समय में ही कई लोगों से संक्रमित होना ना तो असंभव है और ना ही ऐसी बात है जो पहली बार सुनी गई हो.

    अगर कोई व्यक्ति एक बार में कई संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आता है तो वो किसी एक से या सभी से संक्रमित हो सकता है. वायरस शरीर के अंदर बढ़ने में वक्त लेता है और सारी कोशिकाओं पर असर डालता है. जब तक ऐसा होता है. तब तक जो कोशिका संक्रमित नहीं हुई है उस पर किसी दूसरे स्रोत से आने वाले वायरस से संक्रमण हो सकता है. पैथोजन के खिलाफ इम्यूनिटी को जवाब देने में भी वक्त लगता है, इस दौरान इस बात की आशंका बनी रहती है कि व्यक्ति किसी और से या ज्यादा लोगों से संक्रमित हो जाए. दो बार संक्रमण एचआईवी के मरीज में आम बात है.

    इस मामले में आशंका कम
    ऐसे मामलों के होने की आशंका कम रहती है क्योंकि हर बार लोगों के बीच मेल मिलाप से संक्रमण फैले ये ज़रूरी नहीं है. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कोई आता है तो वो संक्रमित होगा ऐसा भी ज़रूरी नहीं है. इसलिए कोई व्यक्ति अगर किसी एक से या कई संक्रमित लोगों से थोड़ी अवधि में मिलता है और सभी के अंदर मौजूद वायरस उसे संक्रमित कर दें इस बात की आशंका कम रहती है.

    बेल्जियम की महिला ऐसी पहली महिला है जिसमें ऐसा लक्षण पाया गया, लेकिन हो सकता है कि दुनियाभर में ऐसे कई और भी मामले हों, हो सकता है ऐसा अभी भी हो रहा हो. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है. लेकिन इसका पता चलना मुश्किल होता है, ऐसा तभी हो सकता है जब संक्रमित व्यक्ति के वायरस सेंपल का जीनोम आकलन किया जाए. लेकिन अगर वायरस के एक ही वेरिएंट से कई बार संक्रमण हुआ है तो वो आसानी से नज़रअंदाज हो सकता है.

    बेल्जियम वाले मामले में महिला दो अलग वेरिएंट से संक्रमित हुई थी इसलिए पकड़ में आ गई. अन्य मामलों में ऐसा होना तभी संभव है जब शोधार्थी सक्रिय रूप से इसकी जांच कर रहे हों.

    घबराने की ज़रूरत नहीं
    एक साथ कई संक्रमण मरीज की स्थिति पर कोई असर नहीं डालता है. भले ही वेरिएंट अलग ही क्यों ना हों. सभी वेरिएंट मरीज के स्वास्थ्य पर एक जैसा असर डालते हैं. इसलिए इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि वेरिएंट एक स्रोत से आया है या कई स्रोतों से.

    बीमारी की गंभीरता मरीज की पहले की हालत और वायरस की घातकपन पर निर्भऱ करती है. इसका मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति एक या ज्यादा लोगों से संक्रमित होता है तो इसका ये मतलब नहीं है कि वो ज्यादा बीमार पड़ जाएगा.

    बेल्जियम की महिला का मामला उत्सुकता तो बढ़ाता है लेकिन इसे लेकर घबराहट बढ़ाने की ज़रूरत नहीं है. साथ ही वर्तमान में जितने तरह की वैक्सीन इस्तेमाल में लाई जा रही हैं वे सभी वायरस पर एक समान असर डाल रही हैं. और वेरिएंट कोई भी हो उपचार एक ही है. इसलिए जो एक वेरिएंट पर असर करेगा वही दूसरे पर भी करेगा.

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