क्या है 'एंटीबॉडी कॉकटेल दवा' और कैसे कोरोना के खिलाफ बन सकती है गेम चेंजर, एक्सपर्ट से समझें

दिल्ली के RML अस्पताल के डॉक्टर राजीव सूद का कहना है कि ये एंटीबॉडी लैब में बना है, कोरोना वायरस के जिस पाइक प्रोटीन की बात हम करते हैं उसे खत्म करने का काम ये कॉकटेल ड्रग करता है.

दिल्ली के RML अस्पताल के डॉक्टर राजीव सूद का कहना है कि ये एंटीबॉडी लैब में बना है, कोरोना वायरस के जिस पाइक प्रोटीन की बात हम करते हैं उसे खत्म करने का काम ये कॉकटेल ड्रग करता है.

कोरोना संक्रमण के बीच इन दिनों 'मोनोक्लोनल एंटीबॉडी' या 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा की चर्चा चल रही है. एक्सपर्ट इस दवा को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में 'गेम चेंजर' मान रहे हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ देश में जारी जंग में अब एक और हथियार मिल गया है. कोरोना को मात देने में कारगर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी यानी कॉकटेल ड्रग्स का भारत में इस्तेमाल शुरू हो गया है. स्विट्जरलैंड की ड्रग कंपनी रोशे और सिप्ला ने इसे भारत में लॉन्च किया है. इस मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल को लेकर दावा है कि अगर किसी कोरोना मरीज़ को ये दी जाती है, तो ये 70 फीसदी तक असर करता है.

इसकी मदद से मरीज़ के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम हो जाती है. दरअसल, 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दो दवाइयों का मिक्सचर है जो कोरोना से लड़ने में किसी मरीज की शक्ति को बढ़ाती है. इसमें कासिरिविमाब (Casirivimab) और इम्देवीमाब (Imdevimab) दवाई शामिल हैं. इन दोनों दवाओं के 600-600 MG मिलाने पर 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा तैयार की जाती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये दवा कोरोना वायरस को मानवीय कोशिकाओं में जाने से रोकती है, जिससे वायरस को न्यूट्रिशन नहीं मिलता, इस तरह ये दवा वायरस को रेप्लिकेट करने से रोकती है.

कैसे काम करती है ये दवा

दिल्ली के RML अस्पताल के डॉक्टर राजीव सूद का कहना है कि ये एंटीबॉडी लैब में बना है, कोरोना वायरस के जिस पाइक प्रोटीन की बात हम करते हैं उसे खत्म करने का काम ये कॉकटेल ड्रग करता है. उन्होंने कहा कि एंटीबॉडी कॉकटेल एक तरह का इम्युनिटी बूस्टर ही है. इसे किसी शख्स के कोरोना पॉजिटिव होने के 48 से 72 घंटे के अंदर दिया जाता है. जानकारी के मुताबिक, ये दवाई देने में 20 से 30 मिनट का वक्त लगता है. दवाई के बाद किसी भी मरीज़ को कुछ देर एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा जाता है, जिस तरह वैक्सीन के वक्त होता है.
लखनऊ मेदांता की डॉ. रुचिता शर्मा ने न्यूज़18 से बातचीत करते हुए कहा कि इस कॉकटेल का इस्तेमाल किस पर करना है और किस पर नहीं उसका ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. जो पेशेंट कोरोना संक्रमित होने के बाद ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, सीवियर दिक्कत है उन्हें ये एंटीबॉडी ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा सकेगी. वहीं, जल्दी संक्रमित होने वाले पर ये फायदेमंद है.

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कोरोना के दूसरे लहर में हुई तबाही ने कितनों के परिवार खत्म कर दिए, ऐसे में देश में कोरोना इलाज के लिए इस्तेमाल किए जा रहे "मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थेरेपी" मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं. आने वाले समय मे और मरीजों में इस्तेमाल होने पर असर और देखने को मिलेगा.

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