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COVID-19: 6.5 करोड़+ टेस्ट, संक्रमण दर 0.01 फीसदी... समझें यूपी ने कैसे कंट्रोल किया कोरोना संक्रमण

स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि यूपी में जनवरी में कुल टीकाकरण 4.63 लाख था, जबकि जुलाई में यह बढ़कर 1.54 करोड़ हो गया है. (File pic)

स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि यूपी में जनवरी में कुल टीकाकरण 4.63 लाख था, जबकि जुलाई में यह बढ़कर 1.54 करोड़ हो गया है. (File pic)

Coronavirus in UP: रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में अभी तक 6.5 करोड़ से ज्यादा सैंपल टेस्ट किए गए हैं. इसके बाद महाराष्ट्र (4.8 करोड़) और कर्नाटक (3.8 करोड़) का नंबर आता है.

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    नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के 10 जिले कोरोना (Coronavirus) मुक्त हो गए हैं. रविवार को सरकार ने इस बारे में ऐलान किया. राज्य में कोविड रिकवरी रेट (Covid Recovery Rate) लगातार बढ़ रहा है और संक्रमण के नए मामले बहुत कम सामने आए रहे हैं. यहीं नहीं, सूबे के 75 जिलों में से किसी में भी संक्रमण के नए मामलों की संख्या दहाई में भी नहीं है. सवाल ये है कि यूपी ने ये मुकाम कैसे हासिल किया? आइए समझते हैं यूपी के इस ‘चमत्कार’ को?

    ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग
    ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी में अभी तक 6.5 करोड़ से ज्यादा सैंपल टेस्ट किए गए हैं. इसके बाद महाराष्ट्र (4.8 करोड़) और कर्नाटक (3.8 करोड़) का नंबर आता है. केंद्र सरकार ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के खिलाफ टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट ही लड़ाई का सबसे कारगर हथियार है. यूपी में कोरोना की दूसरी लहर के बाद से कोविड टेस्टिंग को तेजी से बढ़ाया गया है. राज्य सरकार के मुताबिक यूपी में कोविड संक्रमण की दर 0.01 प्रतिशत हो गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण (Rajesh Bhushan) ने रविवार को चेताया कि जिन राज्यों में संक्रमण की दर 10 प्रतिशत से ज्यादा है, वहां टेस्टिंग बढ़ाने की जरूरत है.

    तेजी से टीकाकरण
    स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि यूपी में जनवरी में कुल टीकाकरण 4.63 लाख था, जबकि जुलाई में यह बढ़कर 1.54 करोड़ हो गया है. मंत्रालय ने कहा कि यूपी देश के सबसे ज्यादा टीकाकरण करने वाले राज्यों में से एक है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण ही सबसे अहम हथियार है. टीकाकरण से कोविड संक्रमण के गंभीर होने और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम हो जाता है.

    बूथ स्तर पर टीकाकरण
    यूपी में टीकाकरण के विकेंद्रीकरण के लिए बीजेपी ने सूबे में 23 जुलाई से 25 जुलाई तक ‘अपना बूथ-वैक्सीनेशन युक्त’ अभियान चलाया है. बीजेपी ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से इस अभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया और अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित करने को कहा है.

    ग्रामीण इलाकों में वैक्सीनेशन के प्रति उत्साह
    आंकड़ों के मुताबिक यूपी के ग्रामीण इलाकों में वैक्सीनेशन के प्रति लोगों में उत्साह है. स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक 1 जुलाई से 14 जुलाई के बीच यूपी में कुल टीकाकरण का 67 प्रतिशत वैक्सीनेशन ग्रामीण इलाकों में हुआ है. इस दौरान राज्य के 75 जिलों में 72.69 लाख टीके लोगों को दिए गए हैं. इनमें से 50 लाख टीके ग्रामीण इलाकों में लगे हैं, जबकि शेष शहरी इलाकों में लगे हैं.

    कंटेनमेंट के उपाय
    कोरोना की दूसरी लहर ने देश में तबाही मचा दी, लेकिन समय पर टेस्टिंग और ट्रैकिंग बढ़ाने से यूपी इसे कंट्रोल करने में कामयाब रहा. 15 मार्च को यूपी में जहां 150 नए मामले थे, वहीं 20 अप्रैल को 30 हजार केस थे और इस तरह संक्रमण के नए मामलों में 200 फीसद का फैक्टर सामने आया. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “21 अप्रैल से यूपी में नाइट और वीकेंड कर्फ्यू लागू कर दिया गया. मार्केट, बाजार, माल और रेस्टोरेंट में आंशिक कर्फ्यू लागू हुआ. 24 अप्रैल को यूपी में 38 हजार नए केस सामने आए थे. इसके बाद संक्रमण के नए मामले लगातार घटते गए और 25 मई को सूबे में 4000 नए केस सामने आए.”

    रिपोर्ट के मुताबिक यूपी ने SUTRA मॉडल पर काम किया और 21 अप्रैल के बाद अगले दो हफ्तों में स्थिति बदल गई. यूपी सरकार के कड़े फैसलों की वजह से रीच में 60 फीसदी की कमी आई तो कॉन्टैक्ट रेट 0.29 फीसदी तक आ गया. इसमें 50 फीसदी की कमी देखी गई. कॉन्टैक्ट रेट में कमी की वजह से ग्रामीण इलाकों में संक्रमण को रोकने में काफी मदद मिली.

    महामारी में कॉन्टैक्ट रेट का इस्तेमाल एक बड़ी आबादी में संक्रमण के तेजी से फैलने की जांच के लिए किया जाता है. लोगों द्वारा लापरवाही बरतने पर कॉन्टैक्ट रेट तेजी से बढ़ता है और लॉकडाउन की स्थिति में यह कम होता है.

    मेडिकल ऑक्सीजन
    कोरोना की दूसरी लहर के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मेडिकल ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची थी. लेकिन, यूपी ने मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन को तेजी से बढ़ाया और राज्य में स्वीकृत 551 ऑक्सीजन प्लांट्स में से 254 प्लांट सक्रिय हो गए हैं. बीते शनिवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर तारिक अनवर ने प्रति मिनट 1000 लीटर ऑक्सीजन क्षमता वाले प्लांट का उद्घाटन किया है. इस प्लांट को पीएम केयर्स फंड से बनाया गया है. एक समय में यह प्लांट दो सौ मरीजों को संभाल सकता है. यूपी में पहला ऑक्सीजन प्लांट इसी साल जून महीने में स्थापित किया गया था.

    कोविड के गंभीर मामलों में इलाज के लिए मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है. वायरस संक्रमण का असर मरीज के फेफड़ों पर पड़ता है. तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों से मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई और उत्पादन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को लाभ मिल सके.

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