जानिए क्या है जैवविविधता, जो इस साल पर्यावरण दिवस पर है UN की थीम

जानिए क्या है जैवविविधता, जो इस साल पर्यावरण दिवस पर है UN की थीम
विश्व पर्यावरण दिवस पर संयुक्त राष्ट्र लोगों में जैवविविधता की जागरुकता पैदा करना चाहता है.

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment day) पर इस बार संयुक्त राष्ट्र की थीम जैवविविधता (Biodiversity) है. जैवविविधता के बिना हमारे जीवन और विकास की कल्पना करना भी मुश्किल है.

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नई दिल्ली:  दुनिया भर में पर्वायवरण के प्रति जागरुकता के लिए 5 जून को पूरा संसार विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाता है. हर साल इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) एक नई थीम जारी करता है. यह एक ऐसा विषय होता है जिस पर पर्ववरण संरक्षण (Environment conservation) के लिए ज्यादा जो दिया जाता है और लोगों में ज्यादा जागरुकता फैलाई जाती है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने साल 2020 के लिए जैवविविधता यानि Biodiversity  को चुना है.

क्या कहाना है संयुक्त राष्ट्र का इस थीम पर
 संयुक्त राष्ट्र ने अपने बयान में कहा है, “हाल ही में हुई घटनाएं ब्राजील, अमरिका और ऑस्ट्रेलिया में लगी जंगल की आग, वैश्विक महामारी, पूर्वी अफ्रीका से लेकर एशिया में भारत तक टिड्डियों का हमला आदि जाहिर करते हैं कि मानव की पृथ्वी पर बसे अन्य जीवन पर कितनी निर्भरता है.”

क्या है यह जैवविविधता



सरल शब्दों में करहें दो जैवविविधता का अर्थ पृथ्वी पर जीवन की विविधता और विभिन्नता से हैं. यह एक बहुत ही वृहद यानि व्यापक स्तर का अध्ययन है, इसमें पारिस्थितकी तंत्र, पर्वावरण और जीवन जैसे कई  विषय शामिल हो जाते हैं. पृथ्वी पर कितने और किस तरह के जीव हैं और उनमें आपस में कितनी निर्भरता है यही इस विषय की नींव है.



क्या खतरा है इस जैवविविधता को
पिछले कुछ दशकों में हमारी पृथ्वी से दस लाख से ज्यादा प्रजातियां नष्ट हो गई हैं. विलुप्त हो गई हैं. यह दर आमतौर पर होने वाली दर से बहुत ही ज्यादा है जो चिंताजनक है. आमतौर पर हम जंगलों के नष्ट होने जैसी घटनाओं को पर्यावरण के मामले में केवल प्रदूषण को स्तर पर ही देखते हैं. लेकिन हम यह नहीं देख पाते कि जंगल में पेड़ों के कटने से कई प्रकार के जीवों की प्रजातियों पर अस्तित्व का संकट तक खड़ा हो जाता है.  जो हमारे वनों के अन्य जीवों पर निर्भर करते हैं. इससे एकतरह का पारिस्थितिकी असंतुलन पैदा हो जाएगा.

Carbon emission
हमारे जीवन की सबसे ज्यादा निर्भरता पेड़ों पर हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


बहुत निर्भरता है जीवों की एक दूसरे पर
आमतौर पर पृथ्वी पर बहुत सारे जीव एक दूसरे पर निर्भर हैं. कई पौधों में बीचे बनने की प्रक्रिया पर मक्खियों और भवरों पर निर्भरता है. कई प्रजातियां एक दूसरे के भोजन हैं जो फूड चेन बनाते हैं. इस तरह की कई फूड चेन एक दूसरे पर निर्भर होती हैं जो एक जटिल फूड वेब बनाती हैं.कई जीवों की गतिविधि दूसरे जीवों के लिए बहुत जरूरी होती हैं. ऐसे कई जीवन वातावरण की गतिविधियों पर भी निर्भर करते हैं. लेकिन इन सभी को मानवीय दखल से बहुत समस्या हो रही है.

तेजी से कम होती जा रही है जैवविविधता
हाल ही में इटरगवर्नमेंटल साइंस पॉलिसी प्लेटफॉर्म ऑन बायोडाइवर्सिटी एंड इकोसिस्टम सर्विसेस (IPBES) की 2019 की रिपोर्ट में पाया गया है कि हाल के दशकों में सभी पशुओं और पौधों की प्रजातियों की 25 प्रतिशत प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं या होने वाली हैं.

कैसे जुड़े हैं हम जैवविविधता से
जैवविविधता से हमें बहुत से फायदे हैं. इससे हमें बेहतर गुणवत्ता की फसल मिलती है. यह हमारी मिट्टी को बचाती है. हवा के साफ होने और बने रहने में भी इसकी भूमिका है. यह हमारी जमीन को बंजर बनने से रोकती है. विविधता हमें कई बीमारियों से बचाती है तो कई बीमारीयों का इलाज ढूंढने में मददगार होती है.

World Environment day
जैवविविधता को बचाना हमारी पृथ्वी को बचाने के समान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


अर्थव्यवस्था पर भी है गहरा प्रभाव
जैवविविधता का हमारी अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव हैं. जैवविविधता है हमारे दवा उद्योग का आधार है. यहां तक कि आज जो बंद बोतलों में पीने का पानी मिल रहा है. वह भी हमारी नदियों के उद्गम स्थल के जितना हो सके पास से हासिल किया जाता है. हमारे भोजन से लेकर हमारे रहन सहन में भी जैवविविधता की अहम भूमिका है. ऐसे में इसके संरक्षण को लेकर जागरुकता बहुत जरूरी है. आज भले ही लोग जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की बात करते हैं, लेकिन इनको लेकर हम अगर जैवविविधता के लिए जागरुक न हुए तो हमारे प्रयास भी बेकार हो सकते हैं.

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